रायपुर, मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने कल 25 सितम्बर को पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती के अवसर पर जनता को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। डॉ. सिंह ने आज यहां जारी शुभकामना संदेश में कहा है कि पंडित उपाध्याय ने समाज की अंतिम पंक्ति के लोगों की तरक्की और खुशहाली के लिए पूरे देश को अन्त्योदय और एकात्म मानववाद की क्रांतिकारी विचारधाराओं से जोड़ा। वे एकात्म मानववाद के प्रवर्तक तो थे ही साथ ही गंभीर चिंतक, लेखक और सजग पत्रकार भी थे। उन्होंने भारतीय अर्थनीति का अवमूल्यन, एकात्म मानववाद और राष्ट्र जीवन की दशा जैसी कई महत्वपूर्ण पुस्तकों की रचना की। उनका यह चिंतन था कि आम जनता और विशेष रूप से समाज की अंतिम पंक्ति के लोगों के जीवन में सुख-समृद्धि लाना ही देश और समाज के आर्थिक विकास का सिर्फ और सिर्फ एक ही उद्देश्य होना चाहिए।
डॉ. रमन ने कहा-छत्तीसगढ़ सरकार ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय के प्रेरणादायक आदर्शो पर चलकर विगत 15 साल में कई ऐसे निर्णय लिए हैं, जिनसे राज्य में अन्त्योदय और एकात्म मानववाद का सपना साकार हो रहा है। उनके अन्त्योदय के हर सपने को साकार करने के लिए राज्य सरकार वचनबद्ध है। सड़क, रेल, बिजली, सिंचाई और दूरसंचार जैसी बुनियादी सुविधाओं के विकास और विस्तार का फायदा समाज के अंतिम छोर के लोगों और गांवों तक पहुंच रहा है। डॉ. रमन सिंह ने कहा- प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भी पंडित दीनदयाल जी के चिंतन और दर्शन के अनुरूप गांव, गरीब और किसानों के लिए राष्ट्रीय स्तर पर अनेक बड़ी योजनाएं सफलतापूर्वक संचालित हो रही हैं, जिनमें प्रधानमंत्री आवास योजना, उज्ज्वला योजना, कृषि सिंचाई योजना, जन-धन योजना भी शामिल है। प्रधानमंत्री किसानों के सशक्तिकरण और उनकी आमदनी वर्ष 2022 तक दोगुनी करने पर भी विशेष रूप से जोर दे रहे हैं। उन्होंने उजाला योजना के तहत हर गांव को और सहज बिजली हर घर योजना (सौभाग्य) के तहत हर घर को रौशन करने का राष्ट्रीय अभियान शुरू किया है।
डॉ. रमन सिंह ने कहा-देश का पहला खाद्य और पोषण कानून बनाकर छत्तीसगढ़ सरकार ने अपने राज्य के लगभग 58 लाख गरीब परिवारों को सिर्फ एक रूपए किलो में चावल, निःशुल्क नमक और पांच रूपए किलो में पौष्टिक चना वितरण की जिस योजना की शुरूआत की है, उससे राज्य में भूख, कुपोषण और पलायन की समस्या को समाप्त करने में मदद मिली है। युवाओं के लिए छत्तीसगढ़ ने देश का पहला कौशल विकास कानून बनाकर उन्हें हुनरमंद बनने का अधिकार दिया है और उनके कौशल प्रशिक्षण के लिए प्रदेश के सभी 27 जिलों में लाइवलीहुड कॉलेज खोले गये हैं। उन्होंने कहा कि संचार क्रांति योजना के तहत प्रदेश में 40 लाख महिलाओं और पांच लाख कॉलेज छात्र-छात्राओं को दिए जा रहे निःशुल्क स्मार्टफोन से महिलाओं और युवाओं के सशक्तिकरण का सपना भी साकार हो रहा है। राज्य के सुदूरवर्ती आदिवासी बहुल और अनुसूचित जाति बहुल क्षेत्रों के समग्र विकास के लिए विशेष प्राधिकरणों की स्थापना की गई है, जिनके माध्यम से बस्तर और सरगुजा में भी मेडिकल कॉलेज खोले गए हैं। सरस्वती साइकिल योजना के तहत अनुसूचित जाति, जनजाति और बीपीएल श्रेणी की बालिकाओं को हाईस्कूल कक्षाओं में निःशुल्क साइकिल दी जा रही है। प्रदेश के वन क्षेत्रों में हर साल मौसमी रोजगार के लिए  तेंदूपत्ता संग्रहण करने वाले लगभग 13 लाख मेहनतकश परिवारों का संग्रहण पारिश्रमिक इस वर्ष 1800 रूपए प्रति मानक बोरा से बढ़ाकर ढाई हजार रूपए कर दिया गया है। सहकारी समितियों के उपार्जन केन्द्रों में धान बेचने वाले किसानों को समर्थन मूल्य के साथ प्रति क्विंटल 300 रूपए का बोनस भी दिया जा रहा है। नई पीढ़ी की शिक्षा के लिए बड़ी संख्या में स्कूल और कॉलेज खोले गए हैं।
डॉ. रमन सिंह ने कहा-राज्य के आदिवासी बहुल और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के प्रतिभावान बच्चों को 11वीं और 12वीं की पढ़ाई के साथ पीएमटी, पीईटी, जेईई जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की निःशुल्क कोचिंग की सुविधा देने के लिए प्रयास आवासीय विद्यालयों का प्रकल्प सफलतापूर्वक चल रहा है। यह प्रकल्प मुख्यमंत्री बाल भविष्य सुरक्षा योजना के तहत चलाया जा रहा है, जिसके उत्साहजनक नतीजे मिल रहे हैं। केन्द्र सरकार के सहयोग से छत्तीसगढ़ के अंतिम छोर के गांवों तक सड़क और संचार नेटवर्क का तेजी से विस्तार हो रहा है। कृषक जीवन ज्योति योजना के तहत छत्तीसगढ़ में तीन से लेकर 5 हार्स पावर तक सिंचाई पम्पों को 7500 यूनिट बिजली हर साल निःशुल्क दी जा रही है। सौर सुजला योजना के तहत किसानों के खेतों में अत्यंत कम कीमत पर सौर ऊर्जा आधारित सिंचाई पम्प लगाए जा रहे हैं। छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य की सात विशेष पिछड़ी जनजातियों के 44 हजार से ज्यादा परिवारों के लगभग 2 लाख सदस्यों के सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए मुख्यमंत्री का 11 सूत्रीय कार्यक्रम भी शुरू किया है। कमार, बैगा, पहाड़ी कोरवा, बिरहोर, अबूझमाड़िया, पण्डो और भूंजिया समुदायों को इस कार्यक्रम का लाभ मिल रहा है। प्रदेश में असंगठित श्रमिकों के कल्याण के लिए भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार मंडल और असंगठित कर्मकार राज्य सामाजिक सुरक्षा मंडल की स्थापना की गई है। इन दोनों संस्थाओं के माध्यम से अब तक 22 लाख से ज्यादा श्रमिकों का पंजीयन किया गया है और उन्हें निःशुल्क साइकिल, सिलाई मशीन, औजार किट आदि का वितरण किया जा रहा है। उनके बच्चों की शिक्षा के लिए छात्रवृत्ति और विवाह योग्य बेटियों की शादी में मदद के लिए भी योजनाएं शुरू की गई हैं।