हिंदुत्व की प्रयोगशाला में बीजेपी को मात देने के लिए कांग्रेस ने ओढ़ा भगवा चोला

मंगलुरु पिछले 28 सालों से हिंदुत्व की प्रयोगशाला और बीजेपी के गढ़ के तौर पर जाना जाता रहा है. यहां बीजेपी के लिए हिंदुत्व सबसे बड़ा मुद्दा है और कांग्रेस इससे निबटने के लिए एक और नया सॉफ्ट हिंदुत्व का फार्मूला लेकर उतरी है. बीजेपी के हिंदुत्व को चुनौती देने के लिए कांग्रेस ने भगवा चोला पहन लिया है. कांग्रेसी नेता भगवा पहनकर मतदाताओं को लुभाने की जुगाड़ में लगे हैं. हिंदुत्व के सामने विकास कहीं पीछे छूटता नज़र आ रहा है.

हिंदुत्व की प्रयोगशाला माना जाने वाला मंगलुरु चुनावी कश-म-कश के बीच एक अलग खामोशी ओढ़े बैठा दिखाई देता है. 18 अप्रैल को लोकसभा चुनाव के दूसरे चरण में मंगलुरु अपने नेता का चुनाव करने वाला है. हालांकि, दक्षिण कन्नड़ का जिला मुख्यालय और पोर्ट सिटी मंगलुरु, एक अजीब सी ख़ामोशी से घिरा दिखाई देता है. यहां दूर-दूर तक चुनाव की हलचल का पता नहीं चलता. जमीन पर एक अजीब शांति है और न ही यहां चुनाव से जुड़ी कोई खास गतिविधि दिखाई पड़ रही है.

सांस्कृतिक रूप से विविधता समेटे, आर्थिक रूप से संपन्न और उद्योग व व्यापार के केंद्र मंगलुरु को दक्षिण में 1990 के शुरू से ही बीजेपी की “हिंदुत्व की प्रयोगशाला” के तौर पर जाना जाता है. मंगलुरु में मूल रूप से हिंदू, जैन, मुसलमान और ईसाई हैं. यह पांच राष्ट्रीय बैंकों का जन्मस्थान के रूप में भी जाना जाता है. यहां कई नामी धार्मिक और शैक्षणिक केंद्र भी हैं. आज से करीब 30 साल पहले लालकृष्ण आडवाणी ने यहां रथयात्रा निकाली थी, तब से मंगलुरु ने कई सांप्रदायिक संघर्ष भी देखे हैं.

आज़ादी के बाद से ही मंगलुरु कांग्रेस पार्टी का एक गढ़ रहा है. पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के बैंकों के राष्ट्रीयकरण और कर्नाटक के तत्कालीन मुख्यमंत्री डी. देवराज उर्स के द्वारा किए गए भूमि सुधार की वजह से यह क्षेत्र को कांग्रेस का अभेद्य किला बन गया. इस क्षेत्र की पिछड़ी जातियां बिल्लवास (ताड़ी निकालने वाले) और मोगवीरस (मछुआरे) एक समय में कांग्रेस और इसकी नीतियों के ज़बरदस्त प्रशंसक हुआ करते थे, लेकिन 1990 की शुरुआत में सब बदल गया और मंगलुरु साम्रदायिकता के नाम पर बंट गया.

अब मंगलुरु हिंदुत्व के रंग में रंगा हुआ है और बीजेपी चुनाव में पूरी तरह इसी को अपना आधार मानकर चल रही है. कांग्रेस लगातार सात बार से बीजेपी के सामने चुनाव हार रही है. लेकिन अब कांग्रेस भी हिंदुत्व के सहारे बीजेपी को टक्कर देने की कवायद में लग गई है. 28 साल के बाद मंगलुरु की सीट वापस छीनने के लिए कांग्रेस ने 34 वर्षीय मिथुन एम राय को यहां मैदान में उतारा है. गेरुआ दुशाला ओढ़े मिथुन और दूसरे कांग्रेसी नेता लोकसभा क्षेत्र में घूम-घूम कर अपने आपको हिंदुत्व का असली संरक्षक बता रहे हैं. उनका आरोप है कि कट्टर हिंदुत्व के जरिए बीजेपी लोगों को मूर्ख बना रही है जबकि कांग्रेस एक शांतिपूर्ण हिंदुत्व को बढ़ावा दे रही है.

जिले के एक मात्र कांग्रेसी विधायक और मुस्लिम नेता UT खादर अपने दूसरे साथियों के साथ गेरुआ शाल पहने नज़र आते हैं. मंगलुरु से कांग्रेस के एमएलसी इवान डी’सूज़ा भी गेरुआ शॉल में दिखाई दे रहे हैं.

इसी चुनाव क्षेत्र में मिथुन राय बंटवाल के पास एक गौशाला भी चलाते हैं और उनके समर्थक उन्हें सच्चा हिन्दू बताने से गुरेज़ नहीं करते. एक स्थानीय कांग्रेसी नेता सजीव सुवर्ण बताते हैं कि लोगों को 28 साल के बाद महसूस हो रहा है कि बीजेपी हिंदुत्व के नाम पर उनसे हवा हवाई बातें करती रही है इसलिए इसबार कांग्रेस ही जीतेगी.

वे कहते हैं, “बीजेपी ने जिले के लिए कुछ नहीं किया, सभी विकास के काम कांग्रेस के शासन में हुए हैं. स्थानीय बीजेपी विधायक और सांसद सिर्फ साम्प्रदायिक राजनीति में व्यस्त हैं. लेकिन अब इसकी अति हो गई है, उनके नकली हिंदुत्व की हवा निकालने के लिए हम असली हिंदुत्व को सामने ला रहे हैं. ”

अविभाजित दक्षिण कन्नड़ जिला देश की चार राष्ट्रीयकृत बैंक- केनरा, ओरिएंटल, विजया और सिंडिकेट बैंक का जनक भी हैं. जहां केनरा बैंक को एक कोंकणी ने स्थापित किया था, कॉर्पोरेशन बैंक की नींव एक मुस्लिम ने रखी थी. सिंडिकेट बैंक को भी एक कोंकणी ने ही स्थापित किया था. विजय बैंक को बंट जाती के लोगों ने बनाया. पहले के दौर में प्रभुत्व वाली जातियों और धर्म के लोगों में व्यापार को लेकर एक प्रतिद्वंदिता थी और इसके लिए वे एक-दूसरे से कुछ अच्छा करने का प्रयास भी करते थे. जिसके चलते मंगलुरु को पूरे भारत में एक मज़बूत ब्रांड के तौर पर पहचान मिली.

सांप्रदायिक राजनीति ने पिछले 30 सालों में इस ब्रांड को एक बड़ा नुकसान पहुंचाया है लेकिन लोगों को इससे कोई शिकायत नहीं है. पहली अप्रैल को घाटे के चलते विजया बैंक का बैंक ऑफ़ बड़ौदा के साथ विलय हो गया जिससे मंगलुरु और आस-पास के क्षेत्र में लोगों में रोष फ़ैल गया और लोगों ने काफी विरोध जताया. बंट जाति के लोग जिन्होंने विजया बैंक की स्थापना की थी, अपनी पहचान और विरासत को लेकर दुखी थे. कुछ लोग विजया बैंक के विलय के मुद्दे को चुनावी मुद्दा बनाने के लिए बीजेपी और कुछ कांग्रेस को दोषी ठहराते हैं. एक लम्बे समय के बाद कांग्रेस ने बीजेपी के एक बंट प्रत्याशी के खिलाफ एक बंट को ही चुनाव मैदान में उतारा है इसके लिए बंट जाती के कुछ नेता तर्क देते हैं कि एक युवा बंट को मौका देने से राजनीति में परिवर्तन की उम्मीद नजर आती है.

लेकिन कुछ लोग अभी भी बीजेपी और मोदी में ही विश्वास जताते हैं. गुरुवायनकेरे के युवा योगेश आचार्य बताते हैं कि उन्हें बीजेपी और स्थानीय सांसद का किया गया कोई भी काम दिखाई नहीं देता लेकिन हिन्दुत्व के चलते मोदी ही उनकी प्राथमिकता हैं. उन्होंने कहा, “यह सच है कि हमारे एमपी ने कोई काम नहीं किया. अगर आम हालात में चुनाव होते तो शायद उनकी जमानत भी जब्त हो जाती. लेकिन हमारे लिए हिंदुत्व महत्वपूर्ण हैं. धर्म की गहरी खाई खिंची हुई है और हिंदू मुस्लिम एकता संभव नहीं है. क्योंकि मुसलमान कांग्रेस को वोट करते हैं इसलिए हम बीजेपी को ही वोट करेंगे.”

इस माहौल में कुछ ऐसे भी लोग हैं जो किसी भी तरफ नहीं हैं. मंगलुरु के रहने वाले रमेश उपाध्याय बताते हैं कि वह अंतिम दिन तक इंतज़ार करेंगे और फिर फैसला लेंगे. वह कहते हैं, “दोनों ही प्रत्याशी बंट जाति से हैं. दोनों हिन्दू हैं. मैं इस बार उसे वोट दूंगा जो बेहतर होगा.”

बीजेपी के चुनाव प्रचार का जिम्मा इस बार RSS ने लिया है और इसके स्वयंसेवक घर-घर जाकर चुनाव प्रचार कर रहे हैं. आरएसएस कार्यकर्ता नकुल शेनॉय ने बताया कि समुद्री किनारे के क्षेत्रों में हिंदुत्व को भारी समर्थन प्राप्त है. यहां कांग्रेस की फिर से हार तय है. वह कहते हैं, “अगर हम अपने धर्म को बढ़ावा देते हैं तो इसमें बुरा क्या है? हिंदुत्व सबसे ऊपर है और इसलिए लोग इसे वोट देते हैं.”

कांग्रेस की गठबंधन की सहयोगी जेडीएस को दक्षिण कन्नड़ की राजनीति में बाहर की शक्ति माना जाता है. ऐसे में यहां कांग्रेस अकेले युद्ध लड़ रही है. राहुल गांधी, मोदी, राज्य सरकार के बारे में बात करने की बजाय कांग्रेस जान बूझकर स्थानीय मुद्दों और हिंदुत्व पर फोकस कर रही है जिसे कुछ लोग सॉफ्ट हिंदुत्व कहते हैं.

गेरुआ शॉल ओढ़ने को सही ठहराते हुए मिथुन राय कहते हैं कि गेरुए रंग पर बीजेपी का कोई कॉपीराइट या एकाधिकार नहीं है. वह कहते हैं, “गेरुआ रंग शांति और सद्भाव का प्रतीक है. हिन्दू धर्म में इसका विशेष महत्त्व है. राजनीतिक रूप से बीजेपी ने इसका गलत इस्तेमाल किया है. केवल वोट के लिए उन्हें हिंदुत्व में रुचि है. कांग्रेस सभी जाति धर्म के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है. बीजेपी दूसरे मुद्दों पर हमसे बात नहीं कर सकती क्योंकि विकास के नाम पर बीजेपी ने कुछ भी नहीं किया है.”

मंगलुरु में मोदी जल्दी ही एक चुनाव रैली को सम्बोधित करने वाले हैं और बीजेपी के लोगों को उम्मीद है कि कर्नाटक के समुद्र तट से मोदी नाम की सुनामी उठने वाली है.

14 thoughts on “हिंदुत्व की प्रयोगशाला में बीजेपी को मात देने के लिए कांग्रेस ने ओढ़ा भगवा चोला

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