दो बच्चों की जनसंख्या नीति लागू करने के लिए केंद्र पर दबाव बनाएगा विहिप, बन रही रणनीति

विश्व हिंदू परिषद जल्द ही केंद्र सरकार से देश में दो बच्चों की जनसंख्या नीति लागू करने की मांग कर सकता है। विश्व हिंदू परिषद 19-20 जून को हरिद्वार में होने वाली मार्गदर्शक मंडल की बैठक में इस मुद्दे पर अंतिम रणनीति तय कर सकता है। इस बैठक में विश्व हिंदू परिषद (विहिप) से जुड़े शीर्ष संत, महामंडलेश्वर और अन्य धर्माचार्य हिस्सा ले सकते हैं

विहिप सूत्रों के मुताबिक संगठन देश की लगातार बढ़ रही अनियंत्रित आबादी के खतरे से चिंतित है। संगठन की राय है कि अनियंत्रित रूप से बढ़ती आबादी भविष्य में देश की अखंडता और सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा साबित हो सकती है। यही कारण है कि विश्व हिंदू परिषद समय रहते आबादी के सही नियंत्रण का रास्ता तैयार करना चाहता है।

यहां से उपजा भरोसा

दरअसल, माना जा रहा था कि दो बच्चों की जनसंख्या नीति का एक समुदाय विशेष की तरफ से विरोध किया जा सकता है। लेकिन असम राज्य सरकार ने अपने यहां जनसंख्या नीति सफलतापूर्वक लागू की है। राज्य में दो से अधिक बच्चे पैदा करने पर कई तरह के अधिकारों में कटौती की घोषणा की गई है। कानून लागू करने के बाद से अब तक किसी समुदाय की तरफ से किसी विरोध की बात सामने नहीं आई है। यही कारण है कि अब जनसंख्या नीति पर विहिप जैसे संगठन केंद्र सरकार पर दबाव बनाना चाहते हैं।

सुप्रीम कोर्ट में भी याचिका दाखिल

जनसंख्या नीति लागू करने के मामले पर दिल्ली भाजपा के प्रवक्ता और सुप्रीम कोर्ट के वकील अश्विनी उपाध्याय ने सर्वोच्च अदालत में याचिका दाखिल कर रखी है। अदालत ने इस मामले पर केंद्र सरकार को अपना रुख स्पष्ट करने को भी कहा है। अश्विनी उपाध्याय ने इस मसले पर अमर उजाला से अपनी राय स्पष्ट करते हुए कहा कि भारत में रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं की कमी या बिजली जैसी कोई भी समस्या हो, इसका मूल कारण बढ़ती आबादी है।

उनका कहना है कि परिवहन के संसाधनों की कमी हो, बढ़ता अपराध हो या पर्यावरण की समस्या हो, सबके मूल में देश की बढ़ती आबादी सबसे बड़ा कारण है। हम हर तरह के समाधान की बात कर रहे हैं, लेकिन कोई भी उपाय काम नहीं कर रहा है क्योंकि उपाय के असर से ज्यादा आबादी बढ़ जा रही है जो सुधारों का प्रभाव खत्म कर दे रही है। यही कारण है कि अब तक किसी भी समस्या का स्थाई समाधान संभव नहीं हुआ है। यही कारण है कि सरकार को चीन की तरह अब भारत में भी स्पष्ट जनसंख्या नीति लागू करनी चाहिए।

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