शहीद की अंतिम यात्रा में उमड़ा जनसैलाब, बेटे दीपांशु ने दी मुखाग्नि, परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल

दक्षिणी कश्मीर के अनंतनाग में आतंकी हमले में शहीद हुए शामली के जांबाज सीआरपीएफ जवान सतेंद्र कश्यप का शुक्रवार को राजकीय सम्मान के साथ उनके पैतृक गांव में अंतिम संस्कार किया गया। शहीद के बेटे दीपांशु ने मुखाग्नि दी।

बता दें कि इस दौरान प्रदेश के गन्ना राज्य मंत्री सुरेश राणा, सांसद प्रदीप चौधरी, शामली विधायक तेजेंद्र निरवाल और डीएम अखिलेश सिंह सहित जिले भर के जनप्रतिनिधि और विभिन्न राजनीतिक दलों के लोग सतेंद्र की अंतिम यात्रा में शामिल हुए। सीआरपीएफ के आईजी देवेन्द्र चौहान व डीआइजी के. थॉमस ने शहीद सतेंद्र को श्रद्धांजलि दी।

सतेंद्र की अंतिम विदाई में उमड़ा जनसैलाब
जिले के हजारों लोग जांबाज बेटे को अंतिम विदाई देने गांव किवाना पहुंचे। जब तक सूरज चांद रहेगा, सतेंद्र तेरा नाम रहेगा के जयघोष इस दौरान गूंजते रहे। इस दौरान डीएम अखिलेश सिंह, एएसपी राजेश कुमार श्रीवास्तव, एडीएम आनंद कुमार शुक्ला सीओ एके सिंह समेत विभिन्न अधिकारी मौजूद रहे। वहीं सीआरपीएफ के अधिकारियों ने परिजनों को हर संभव मदद का आश्वासन दिया।

आतंकी हमले में शहीद हुए सतेंद्र का पार्थिव शरीर उनके गांव किवाना में शुक्रवार सुबह आठ बजे पहुंचा। शामली के लाल सतेंद्र के शव के इंतजार में सुबह चार बजे से ही मेरठ-करनाल हाईवे स्थित लिसाड़ मोड़ पर आस-पास गांवों के सैकड़ों युवा हाथों में तिरंगा लिए खड़े थे। जैसे ही सुबह आठ बजे सतेंद्र का पार्थिव शरीर गांव पहुंचा तो भारत माता की जय, शहीद सतेंद्र अमर रहे और पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे लगने शुरू हो गए। इस दौरान हर किसी की आंखों में आंसू आ गए।

बताया गया कि करीब तीन किलोमीटर तिरंगा यात्रा के साथ हजारों लोगों की मौजूदगी में सतेंद्र का शव गांव पहुंचा। शहीद के अंतिम दर्शन में पुष्पांजलि के लिए हजारों लोगों की भीड़ उमड़ गई। वहीं प्रदेश के गन्ना राज्य मंत्री सुरेश राणा, सांसद प्रदीप चौधरी, शामली विधायक तेजेंद्र निरवाल और डीएम अखिलेश सिंह सहित जिले भर के जनप्रतिनिधि और विभिन्न राजनीतिक दलों के लोग सतेंद्र की अंतिम यात्रा में शामिल हुए। वहीं अधिकारी व्यवस्था बनाने में जुटे हुए हैं।

खबर आते ही कवाना में मचा कोहराम
दक्षिणी कश्मीर के अनंतनाग जिले में बुधवार को आतंकी हमले में शामली के लाल सतेंद्र कश्यप (32) भी शहीद हो गए। शहादत की खबर जैसे ही कांधला इलाके के उनके गांव किवाना पहुंची तो कोहराम मच गया। पत्नी सोनिया और बहनों का रो-रोकर बुरा हाल था।

गुरुवार सुबह पूरा गांव सतेंद्र के घर के बाहर उमड़ पड़ा। गमजदा लोगों में आतंकियों के खिलाफ गुस्सा था। लोग सतेंद्र अमर रहे और पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे लगा रहे थे। शहीद के पिता मुनीराम का कहना है कि उन्हें अपने बेटे की शहादत पर गर्व है।

उधर, डीएम अखिलेश सिंह, एएसपी, एसडीएम भी गांव पहुंचे थे और शहीद के परिजनों को सांत्वना दी। पिता मुनीराम ने बताया कि बागपत के निरपुड़ा गांव निवासी सतेंद्र के दोस्त सोनू के परिजनों से उन्हें बेटे की शहादत की सूचना मिली। सोनू भी सीआरपीएफ में है और उसकी भी तैनाती कश्मीर में है। उसने बुधवार रात अपने परिजनों को आतंकी हमले की जानकारी दी थी। रात करीब 11 बजे सोनू के पिता ने सतेंद्र की बटालियन में फोन किया तो बताया गया कि सतेंद्र आतंकियों से मुकाबला करते हुए शहीद हो गए।

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