बेमेतरा: अपने जिंदा होने का सबूत लिए सालों से भटक रहे ये बुजुर्ग

खुद को जिंदा साबित करने अधिकारियों के दफ्तरों के चक्कर काटने मजबूर है ये बुजुर्ग.

छत्तीसगढ़ के bemetara  जिले में कई ऐसे लोग घूम रहे है जो अपने जिंदा होने का सबूत लिए फिर रहे है लेकिन अब तक जिम्मेदारों ने कोई कार्रवाई नहीं की है. कागजों में जिम्मेदारों ने इन्हे मार डाला है. ऐसे ही एक गफलत का शिकार एक बुजुर्ग अपने ज़िन्दा होने का सबूत लिए पिछले 4 सालों से न्याय के लिए भटक रहा है. 75 साल के बुजुर्ग को उसके ही भाईयों ने कागजों में मृत बता दिया है. अब खुद को जिंदा साबित करने अधिकारियों के दफ्तरों के चक्कर काट रहा है.

भाईयों ने ही की एक बुजुर्ग के साथ ये करतूत

पहला मामला दाढी थाना क्षेत्र के ग्राम दामापुर का है. यहां एक 68 वर्षीय बुजुर्ग को उसके भाईयों ने जमीन के बंटवारा न देना पड़े इसके लिए जीते जी मार डाला. जमीन में हिस्सा न देना पड़े इसके लिए जमीन की बंटवारा आपस में करा लिया और जीवित लखन राम को मृत बता दिया. इतना ही नहीं बकायदा तहसीलदार ने भी पेपर में उसे मृत बताकर इश्तिहारछपवा दिया. इसके बाद से आवेदक कभी पुलिस तो कभी कलेक्टोरेट के चक्कर लगा रहा है. न पुलिस मदद कर रही न कलेक्टर क्योकि एसे और भी मामले पहले से पेंडिंग है. पीड़ित बुजुर्ग लखन लाल का कहना है कि मेरी गैरहाजरी में मेरे पांचों भाईयों ने मेरी जमीन बेच दी. फर्जी फोटो पर्ची लगाया है. मुझे गलत तरीके से मृत घोषित कर दिया गया. वहीं कलेक्टर महादेव कावरे का कहना है कि इन सारे मामलों में एसपी के साथ बैठक समीक्षा की जाएगी. इस तरह के मामलों में सभी लेवल के अधिकारियों के साथ चर्चा की जाएगी.

तीन कलेक्टर बदले लेकिन समस्या खत्म नहीं हुई

दूसरा मामला भी एक 75 वर्षीय बुजुर्ग का है जो 4 सालों से कलेक्टोरेट के चक्कर लगा रहा है. तीन कलेक्टर बदल गए लेकिन समस्या नहीं. दरअसल पूरा मामला नवागढ़ ब्लॉक के भिलौनी गांव का है. यहां 75 वर्षीय बहलगिर की पत्नी संतन बाई के नाम पर 1 एकड़ 40 डिसमिल ज़मीन है. इसी जमीन से बुजुर्ग दम्पति का गुजारा चलता है. उसी जमीन को हड़पने के लिए गांव में दबंगों ने फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र तैयार कर जमीन को बेच दिया गया है. फर्जीवाड़े की शिकायत करने तहसील कार्यालय पहुंचा तो उसे मौत की जानकारी मिली और अधिकरियों ने उसके हाथ में मृत्यु प्रमाण पत्र दे दिया. इसके बाद ज़िन्दा खड़े दम्पति भी हैरान रह गए. बुजुर्ग पिछले दो साल से ज़िन्दा होने का सबूत लिए कार्यालयों का चक्कर लगा रहे है. लेकिन अब तक न्याय नहीं मिल पाया है. वहीं उस समय के तत्कालीन कलेक्टर कार्तिकेया गोयल भी मान रहे हैं कि बुजुर्ग के साथ धोखा हुआ है और फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र से दस्तावेज तैयार किया गया है. उनका दावा है कि इस मामले में जांच के आदेश दिए गए थे.

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