गार्गी कॉलेज छेड़छाड़ मामला: CBI जांच के लिए दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका, बताया ‘सोची-समझी साजिश’

नई दिल्ली: गार्गी कॉलेज में पिछले सप्ताह एक सांस्कृतिक उत्सव के दौरान छात्राओं से कथित छेड़छाड़ मामले की अदालत की निगरानी में सीबीआई से जांच कराने का अनुरोध करते हुए बृहस्पतिवार (13 फरवरी) को दिल्ली उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की गई। इससे पहले दिन में उच्चतम न्यायालय ने याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया था और याचिकाकर्ता, एक वकील को उच्च न्यायालय जाने के निर्देश दिए थे।

उच्चतम न्यायालय के फैसले के कुछ घंटे बाद वकील ने उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल की। वकील एम एल शर्मा ने अपनी याचिका में अनुरोध किया है कि कॉलेज परिसर की सभी सीसीटीवी फुटेज और वीडियो रिकॉर्डिंग को सुरक्षित रखा जाए। इसके साथ ही उन्होंने इस ‘सुनियोजित’ आपराधिक साजिश के पीछे के व्यक्तियों की गिरफ्तारी की भी मांग की है।

पुलिस ने इस घटना के सिलसिले में बुधवार (12 फरवरी) को 18 से 25 वर्ष के बीच के दस लोगों को गिरफ्तार किया था। गार्गी कॉलेज में छह फरवरी को सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान कुछ व्यक्तियों का एक समूह भीतर घुस आया और उसने लड़कियों के साथ कथित तौर पर छेड़छाड़ की थी। वहां मौजूद लोगों ने दावा किया कि सुरक्षाकर्मी इस घटना को चुपचाप देखते रहे।

शर्मा ने अपनी याचिका में आरोप लगाया कि यह दिल्ली चुनाव की पृष्ठभूमि में एक सुनियोजित राजनीतिक और आपराधिक साजिश थी और घटना के बाद कोई कार्रवाई नहीं की गई। याचिका में दावा किया गया है, ”जय श्री राम’ के जानबूझकर लगाए गए नारों से पता चलता है कि यह एक राजनीतिक, सुनियोजित साजिश है और आरोपियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करने के लिए दिल्ली के मुख्यमंत्री को जिम्मेदार ठहराया।”

पुलिस के अनुसार भारतीय दंड संहिता की धाराओं 452 (हमला करना, या नुकसान पहुंचाने के इरादे से अनधिकृत तरीके से घुसना), धारा 354 (महिला की मर्यादा को क्षति पहुंचाने के लिए उस पर हमला या आपराधिक बल प्रयोग), धारा 509 (किसी महिला की मर्यादा का अनादर करने के आशय से कोई अश्लील शब्द कहना, हावभाव प्रकट करना या कोई कृत्य करना) और धारा 34 (साझा आपराधिक इरादा) के तहत मामला दर्ज किया गया है।

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