….तो रुक जाएगी निर्भया में दोषी की फांसी

नई दिल्ली: निर्भया के दोषी पवन ने सुप्रीम कोर्ट में दया याचिका खारिज होने के खिलाफ याचिका दायर की है। इस केस में उसने कुछ ऐसी दलीलें दी हैं जो किसी भी दोषी की फांसी से पहले उसे रोकने की बहुत बड़ी वजह होती है। उसने अपने बारे में अदालत में कुछ ऐसा बताया है कि अगर अदालत ने वो बातें मान लीं तो विनय की फांसी टलना लगभग तय है। जानिए क्या हैं वो दलीलें….

निर्भया के चारों दोषियों की फांसी के लिए डेथ वारंट जारी नहीं किया जा सका। इस मामले में सुनवाई सोमवार तक के लिए स्थगित कर दी गई है। इस मामले में दोषी पवन गुप्ता के वकील को नियुक्त करते हुए इस मामले की तैयारी के लिए कुछ वक्त दिया है। इस मामले में पवन एकमात्र दोषी है, जिसने अब तक क्यूरेटिव पिटीशन दायर नहीं की है। इस मामले की सुनवाई में हो रही देरी पर अदालत ने दिल्ली विधिक सेवा प्राधिकरण(डीएलएसए)को पवन गुप्ता को वकील मुहैया करवाने के लिए अधिवक्ताओं की सूची सौंपी थी। लेकिन गुप्ता ने सूची में तय वकीलों की सेवाएं लेने से इंकार कर दिया था।

उधर, विनय शर्मा की याचिका पर करीब दो घंटे तक चली सुनवाई के बाद अदालत ने कहा कि शुक्रवार दोपहर बाद दो बजे इस मामले में आदेश सुनाया जाएगा। विनय ने अपनी याचिका में कहा है कि जेल में ‘कथित यातनाओं और दुर्व्यवहार की वजह से वह मानसिक रूप से अस्वस्थ हो गया है। केंद्र और दिल्ली सरकार की ओर से सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने अधिवक्ता एके सिंह की दलीलों का विरोध करते हुए सभी संबंधित रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद कहा कि विनय की दया याचिका खारिज करने में सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया गया है।

मेहता ने विनय शर्मा की 12 फरवरी की मेडिकल रिपोर्ट भी पीठ के समक्ष पेश की, जिसके मुताबिक विनय पूरी तरह स्वस्थ है। एके सिंह का आरोप था कि दिल्ली के उपराज्यपाल और गृह मंत्री ने उसकी दया याचिका खारिज करने की सिफारिश पर दस्तखत नहीं किए थे। पीठ ने दया याचिका खारिज करने की सिफारिश का अवलोकन करने के सिंह के अनुरोध को ठुकरा दिया।

पीठ ने रिकार्ड का अवलोकन करने के बाद कहा कि उन्होंने दया याचिका खारिज करने की सिफारिश पर दस्तखत किए हैं। राष्ट्र्रपति की ओर से दया यायिका खारिज किए जाने के बाद विनय की ओर से मंगलवार को शीर्ष अदालत में याचिका दायर की थी। इसमें भी आरोप लगाया गया है कि जेल में उसके मौलिक अधिकारों का हनन करने सहित उसे गैरकानूनी तरीके से अलग रखा गया। याचिका में कहा गया है कि जेल में मानसिक रूप से अस्वस्थता होना मृत्यु दंड को उम्र कैद में तब्दील करने का एक आधार है।

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