FSNL बचाओ संघर्ष समिति के संयोजक मंडल के सदस्य गजेन्द्र सिंह, राजु लाल श्रेष्ठ, एवं अरुण सिंह सिसोदिया ने संयुक्त रूप से पत्रकार वार्ता में जानकारी दी..
FSNL बचाओ संघर्ष समिति के संयोजक मंडल के सदस्य गजेन्द्र सिंह, राजु लाल श्रेष्ठ, एवं अरुण सिंह सिसोदिया ने संयुक्त रूप से पत्रकार वार्ता में जानकारी दी है। FSNL पूर्व में भारत सरकार का उपक्रम था। जो विनिवेश निति के अन्तर्गत भारत सरकार द्वारा षड़यंत्र के तहत निजीकरण करते हुए जापानी कंपनी कोनोइके ट्रांसपोर्ट कंपनी को 320 करोड़ में दे दिया जबकि FSNL का मार्केट वैल्यू 1000 करोड़ से भी अधिक था | विगत दिनों से स्क्रैप माफियो द्वारा FSNL को कमजोर करने तथा समाप्त करने के लिए षड़यंत्र रचा जा रहा था। जैसे ही FSNL निजी कम्पनी के हाथ में चली गई तब से यह प्रयास जारी था। FSNL को मिलने वाली समस्त ठेकाए पूर्व में एक पार्टी के सिद्धांत पर आधारित था। जिसे ओपन टेंडर में परिवर्तित किया गया था। भिलाई इस्पात सयंत्र में कुछ तथाकथित अधिकारी भी यही चाहते थे ओपन टैंडर के कारण गत दिनों अनुमानित 750 करोड़ का टेंडर चार भागो में जान बुझ कर बाटा गया।ताकि लखोटिया जैसे गुमनाम,बदनाम, ब्लैक लिस्टेड व्यक्ति टेंडर डाल सके। और टेंडर का रेट गिराकर FSNL को टेंडर से बाहर कर दे । इस तरह से बीएसपी प्रबंधन एव स्क्रैप माफियो का षड़यंत्र कामयाब हुआ।अधिकांश टेंडर लखोटिया एव अन्य
को मिलते हैं । FSNL 1979 से 1983 तक सेल का साझेदारी कंपनी थी। तथा इस्पात मंत्रालय को MSTC में शेयर ट्रांसफर किये गए जो की 60% व 40% था | उसके पश्चात 100% MSTC को सेल को ट्रांसफर किया गया | FSNL पिछले 40 वर्षो से इस्पात उद्योग में स्लैग एवं स्क्रैप प्रोसेसिंग मैग्नेटिक सेपरेटर का निष्पादन करता हैं। जिससे इस्पात मंत्रालय के हजारो करोड़ का शुद्ध लाभ होता हैं।कारखाना अधिनियम 1948 के अंतर्गत बीएसपी सयंत्र प्रमुख नियोक्ता की भूमिका में हैं तथा नियोक्ता के रूप में FSNL ने श्रम विभाग से लेबर लाइसेंस प्राप्त किया हैं। इसलिए प्रमुख नियोक्ता बीएसपी तथा नियोक्ता FSNL की सयुक्त जिम्मेदारी बनती हैं, कि संस्थान में कार्यरत सभी नियमित तथा ठेका श्रमिको की नौकरीसेवाए सुनिषित करे। एवं उनके वेतनमान एव सेवा शर्तों में कोई परिवर्तन न किया जाये।संयुक्त प्रेस वार्ता में आगे बताया कहा गया ,की जो टेंडर जनवरी में हुए हैं।उक्त टैंडर में कारखाने में कार्यरत नियमित एव ठेका श्रमिको के नौकरी तथा सेवा शर्तों के संबंध में कोई उल्लेख नहीं हैं। जबकि उक्त कार्य स्थाई प्रकृति का हैं।इसलिए कार्य में नियोजित ठेका श्रमिको को ठेका संविदा उन्मूलन अधिनियम 1970 केन्द्रीय नियम 71 की धारा 10 के अनुसार विभागीय कारण किया जाना चाहिए। कोई भी ठेकदार बदलने की स्थिती में उन्हें स्थाई उसी स्थान पर उनके पुराने वरिष्टता सुनिश्चित करते हुए उसी स्थान पर उन्हें नियमित सेवारत किया जाना चाहिए |
हमारी मांग है नये टेंडर से श्रमिको की सेवा निरंतर रहे तथा उनके वेतनमान तथा उनके सेवा शर्तों पर कोई विपरीत प्रभाव न पड़े। ठेका क्रमांक 872 व स्थायी 373 हैं | ठेकेदार बदलने के कारण किसी भी ठेका श्रमिक, स्थायी श्रमिक की छटनी न किया जाए। न कही स्थानांतरण किया जाये। सभी ठेका श्रमिको को नए वेज-कोड के आधार पर नियुक्त पत्र दिया जाये | केंद्र सरकार द्वारा घोषित न्यूनतम वेतन की भुगतान सुनिश्चित किया जाये | सभी श्रमिको को वेतन पर्ची, कानून छुट्टी जैसे EL,CL राष्ट्रीय अवकाश दिया जाये।