June 29, 2026

बरसात में उजड़े गरीबों के आशियाने, पुनर्वास से पहले बुलडोजर पर उठे सवाल…

IMG-20260629-WA0006
  • पहले छत छिनी, बाद में पुनर्वास की बात अमानवीय–डॉ शिवकुमार डहरिया

आरंग-: रायपुर तहसील क्षेत्र के तहत मंदिरहसौद के समीपस्थ नकटी गांव में 29 जून को, मानसून और बरसात के बीच विधायक कॉलोनी निर्माण के लिए वर्षों से बसे ग्रामीणों के मकानों पर चलाए जा रहे बुलडोजर अभियान को लेकर राजनीतिक विवाद गहरा गया है। पूर्व मंत्री एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता डॉ. शिवकुमार डहरिया ने इस कार्रवाई को गरीब, दलित और सतनामी व ओ बी सी समाज के खिलाफ अन्यायपूर्ण एवं अमानवीय बताया है।डॉ. डहरिया ने कहा कि बरसात के मौसम में लोगों के सिर से छत छीन लेना किसी भी संवेदनशील सरकार के लिए उचित नहीं माना जा सकता। जब मानसून शुरू हो चुका है और परिवारों को सबसे अधिक सुरक्षित आश्रय की आवश्यकता होती है, ऐसे समय में बिना समुचित पुनर्वास के मकानों पर बुलडोजर चलाना मानवीय संवेदनाओं के विपरीत है। उन्होंने कहा कि महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग अब खुले आसमान के नीचे जीवन बिताने को मजबूर हो रहे हैं।उन्होंने प्रशासन के दावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि भूमि वास्तव में सरकारी थी और उस पर अवैध कब्जा था, तो सालों तक प्रशासन और सरकार मौन क्यों रहे? यदि बस्ती अवैध थी, तो प्रधानमंत्री आवास योजना और इंदिरा आवास योजना के तहत मकानों की स्वीकृति किस आधार पर दी गई? बिजली, पानी, सड़क, राशन कार्ड, मतदाता पहचान पत्र और अन्य सरकारी सुविधाएं वहां कैसे उपलब्ध कराई गईं?डॉ. डहरिया ने कहा कि चुनाव के समय इन्हीं लोगों के वोट वैध थे, लेकिन आज उनके घर अवैध कैसे हो गए? यदि शासन-प्रशासन वर्षों तक इस बस्ती को मान्यता देता रहा, तो अचानक गरीबों को अतिक्रमणकारी घोषित कर बेदखल करना न्यायसंगत नहीं कहा जा सकता।उन्होंने आरोप लगाया कि विधायक कॉलोनी बनाने के नाम पर गरीबों के आशियाने उजाड़े जा रहे हैं। किसी भी लोकतांत्रिक सरकार का पहला दायित्व प्रभावित परिवारों के लिए पहले सम्मानजनक पुनर्वास सुनिश्चित करना होता है, लेकिन यहां पहले बुलडोजर चलाया गया और बाद में पुनर्वास की बात कही जा रही है।डॉ. डहरिया ने कहा कि यदि प्रशासन वास्तव में पुनर्वास के प्रति गंभीर था, तो पहले प्रत्येक परिवार को वैकल्पिक आवास उपलब्ध कराया जाता, उसके बाद ही बेदखली की कार्रवाई होती। उन्होंने सरकार से यह भी स्पष्ट करने की मांग की कि यदि नकटी गांव अवैध था, तो प्रधानमंत्री आवास की किस्तें किस आधार पर जारी हुईं, बिजली के खंभे क्यों लगाए गए और सरकारी रिकॉर्ड में लोगों के नाम कैसे दर्ज हुए।उन्होंने मांग की कि नकटी गांव में चल रही बेदखली की कार्रवाई तत्काल रोकी जाए, सभी प्रभावित परिवारों का सम्मानजनक पुनर्वास सुनिश्चित किया जाए तथा पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए। डॉ. डहरिया ने कहा कि बरसात के मौसम में गरीबों के सिर से छत छीनकर जनप्रतिनिधियों के लिए कॉलोनी बनाना सामाजिक न्याय, मानवीय संवेदनाओं और लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।