सोनम वांगचुक के अनशन की अमेरिका में गूंज, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को मिला सपोर्ट…
- दिल्ली में अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक के समर्थन में अब अमेरिका में भी प्रदर्शन हुआ. वॉशिंगटन में भारतीय दूतावास के बाहर प्रदर्शनकारियों ने परीक्षा पेपर लीक पर कार्रवाई और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग उठाई.
- सोनम वांगचुक को अमेरिका में एक्टिविस्ट ने सपोर्ट किया है.
नई दिल्ली,18 जुलाई 2026: दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक के समर्थन में अब अमेरिका में भी आवाज उठने लगी है. वॉशिंगटन डीसी में शुक्रवार को दो अमेरिकी नागरिक संगठनों ने प्रदर्शन कर भारत सरकार से कथित NEET परीक्षा पेपर लीक पर तत्काल कार्रवाई करने और प्रदर्शनकारियों से बातचीत शुरू करने की मांग की.
‘हिंदूज़ फॉर ह्यूमन राइट्स’ और ‘द आज़ादी प्रोजेक्ट’ के कार्यकर्ता भारतीय दूतावास के पास महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने जमा हुए. प्रदर्शनकारियों ने सोनम वांगचुक के समर्थन में तख्तियां उठाईं और एजुकेशन सिस्टम में सुधार, जवाबदेही तय करने और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की.
प्रदर्शन से पहले ‘हिंदूज़ फॉर ह्यूमन राइट्स’ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक ओपन लेटर भी लिखा. संगठन ने कहा कि सरकार को प्रदर्शनकारियों से तुरंत बातचीत करनी चाहिए, परीक्षा व्यवस्था में सामने आई खामियों पर ठोस जवाब देना चाहिए और जवाबदेही तय करने के लिए समय पर प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए.
प्रदर्शनकारियों की मांगों पर सरकार करे संवाद
संगठन की कार्यकारी निदेशक सुनीता विश्वनाथ ने कहा कि सरकार को अब और इंतजार नहीं करना चाहिए. उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारियों की मांगों पर गंभीरता से विचार करते हुए तुरंत संवाद शुरू किया जाए, ताकि किसी की जान पर संकट न आए.
संगठन ने सोनम वांगचुक और भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों से भी अपील की कि वे अपनी सेहत को प्राथमिकता दें. बयान में कहा गया कि उनकी आवाज भारत ही नहीं बल्कि दुनिया के कई हिस्सों तक पहुंच चुकी है और अपनी मांगों को साबित करने के लिए उन्हें अपनी जान जोखिम में डालने की जरूरत नहीं होनी चाहिए.
28 जून से भूख हड़ताल पर थे सोनम वांगचुक
गौरतलब है कि सोनम वांगचुक 28 जून से दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे थे. उनका आंदोलन कथित NEET परीक्षा पेपर लीक, शिक्षा व्यवस्था में सुधार और जवाबदेही की मांग को लेकर शुरू हुआ था. शनिवार को उनकी बिगड़ती सेहत के चलते दिल्ली पुलिस उन्हें सफदरजंग अस्पताल ले गई. अब वॉशिंगटन में हुए इस प्रदर्शन ने इस आंदोलन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बना दिया है.