बंगीय साहित्य संस्था के तत्वावधान में आयोजित बांग्ला लेखिका स्मृति दत्त की बांग्ला पुस्तक का हिंदी अनुवाद ‘त्रिधारा’ का विमोचन…
भिलाई : भिलाई निवास के इंडियन कॉफ़ी हाउस में बीते दिनों बंगीय साहित्य संस्था की उप सभापति एवं बांग्ला की सुप्रसिद्ध वयोवृद्ध लेखिका स्मृति दत्त की बांग्ला में प्रकाशित पुस्तक ‘त्रिधारा’ का हिंदी अनुवाद कृति का विमोचन किया गया. बांग्ला से हिंदी ‘त्रिधारा’ का अनुवाद सरला शर्मा और मोऊ रॉय ने किया. मुखपृष्ठ चित्रांकन आर्टिस्ट गौतम शील व प्रसोन्नजीत चौधुरी का बनाया हुआ है. विमोचन कार्यक्रम के मुख्य अतिथि बंगीय साहित्य संस्था की सभापति कवयित्री बानी चक्रवर्ती थीं. विशिष्ट अतिथि लेखिका व ‘त्रिधारा’ की अनुवादक सरला शर्मा थीं. विमोचन में विशेष रूप से ‘मध्यबलय’ के संपादक दुलाल समाद्दार एवं ‘आरंभ’ के अध्यक्ष प्रदीप भट्टाचार्य उपस्थित रहे. कार्यक्रम का संचालन संस्था के महासचिव शुभेंदु बागची व आभार व्यक्त स्मृति दत्त की सुपुत्री नृत्य कलाकार अपर्णा रॉय ने किया.
‘त्रिधारा’ विमोचन के पश्चात स्मृति दत्त ने पुस्तक पर अपनी बात रखी और कुछ रचनाओं का पाठ किया. इन्होंने कहा कि मेरी बांग्ला ग्रंथ ‘त्रिधारा’ के अंतर्गत तीन स्वतंत्र कृतियाँ ‘आण्विक’, ‘कबियाल’ और ‘स्मरणिका’ को एक ही आवरण में हिंदी अनुवाद संग्रह एसएस पब्लिकेशन ने प्रकाशित किया है. इस संग्रह का हिंदी अनुवाद सरला शर्मा व मोऊ रॉय ने किया. आवरण चित्र गौतम शील [भिलाई] व प्रसोन्नजीत चौधुरी [कोलकाता] ने बनाया. यह मेरी दसवीं कृति है. ‘त्रिधारा’ तीन खंडों में है. प्रथम खंड ‘आण्विक’ में 17 लघुकथा/कहानी है, यह खंड मैंने कनाडा के बिप्लब मजूमदार को समर्पित किया है. इस खंड की भूमिका दुलाल समाद्दार ने लिखा. द्वितीय खंड ‘कबियाल’ में 25 कविताएं हैं, यह खंड मैंने बांग्लादेश के प्राण प्रिय कवि अहमद बेलाल को समर्पित किया है.
इस खंड की भूमिका प्रकाशचंद्र मण्डल ने लिखा. तृतीय खंड में ‘स्मरणिका’ में 19 संस्मरण को संकलित किया है. यह खंड मेरे अति प्रिय मित्रों आरती चंद, समरेंद्र विश्वास, दुलाल समाद्दार, शुभेंदु बागची, प्रकाशचंद्र मण्डल, प्रदीप भट्टाचार्य, पल्लव चटर्जी, स्व. दीपक सरकार, मीता दास, मनोरंजन दास, दीपाली दासगुप्त, प्रतिमा नाग और मोऊ रॉय को समर्पित है. इस खंड की भूमिका सरला शर्मा ने लिखी है. मूल पुस्तक ‘त्रिधारा’ को मैंने स्व. कल्लोल भट्टाचार्य को समर्पित किया है. मेरी पूर्व प्रकाशित बंगाली संग्रह ‘नाना दिनेर नाना रंग’/’एकेर भीतर तीन’/’जा देखी जा सुनी’/’जुगलबंदी’/’हृदयेर दुकूले’/’लेनिन साहेबर साथे देखा’/ ‘केमिस्ट्री प्रेक्टिकल ओ टीवी शो’ और ‘त्रिधारा’ मेरे जीवनकाल में प्रकाश का मुख देख लिया, मेरी मनोकामना पूरी हो गई. इस अवसर पर स्मृति दत्त ने अनुवादक सरला शर्मा, मोऊ रॉय और गौतम शील को शॉल, श्रीफल एवं मोमेंटो देकर सम्मानित किया.
विमोचन समारोह में साक्षी रहे- सरला शर्मा, बानी चक्रवर्ती, शुभेंदु बागची, दुलाल समाद्दार, प्रदीप भट्टाचार्य, ब्रजेश मल्लिक, तपन रॉय, आलोक कुमार चंदा, गौतम शील, जीवन चंद्र हालदार, सुबीर रॉय, तापस किरण रॉय, संध्या रॉय, विपुल सेन, सुजॉशा सेन, बीरेंद्रनाथ सरकार, रतन सरकार, विष्णु ढाली, जॉली चक्रवर्ती, मीता दास, मनोरंजन दास, अर्पणा वर्मा, अपर्णा रॉय, अमित रॉय, डॉ. बीना सिंह रागी, प्रभात मंडल और स्मृति दत्त के परिवार के सदस्य.
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सादर निवेदन है कि वयोवृद्ध बांग्ला लेखिका स्मृति दत्त द्वारा आयोजित इस हिंदी संस्करण की पुस्तक के विमोचन को आपके लोकप्रिय अखबार में प्रकाशित कर इस साहित्यिक आयोजन को प्रकाशित कर अनुग्रहित करें.
*- प्रदीप भट्टाचार्य, मीडिया प्रभारी- ‘बंगीय साहित्य संस्था’*
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