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श्रद्धा-भक्ति से मनाया गया पोरा पर्व दूधाधारी मठ में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच नंदी बैलों की पूजा, प्रदेशवासियों के मंगल की कामना…

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जांजगीर-चाम्पा। राजधानी स्थित श्री दूधाधारी मठ में छत्तीसगढ़ की लोकपरंपरा और कृषि संस्कृति से जुड़े पोरा पर्व को श्रद्धा एवं भक्ति भाव के साथ मनाया गया। इस अवसर पर मठ परिसर में धार्मिक अनुष्ठानों के साथ मिट्टी से निर्मित नंदी बैलों की विधिवत पूजा-अर्चना की गई।

सुबह 10:30 बजे श्री बालाजी मंदिर एवं श्रीराम पंचायतन में विशेष पूजा-अर्चना महामंडलेश्वर राजेश्री महंत रामसुंदर दास जी महाराज के सानिध्य में संपन्न हुई। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच मिट्टी से बने नंदी बैलों का पूजन किया गया तथा उपस्थित श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया।

इस अवसर पर राजेश्री महंत रामसुंदर दास जी महाराज ने कहा कि छत्तीसगढ़ मूलतः कृषि प्रधान प्रदेश है और पोरा पर्व हमारी कृषि संस्कृति, गौवंश के प्रति कृतज्ञता तथा लोक आस्था का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि इस पर्व में नंदी बैलों की पूजा के साथ कृषि कार्य एवं गृह उपयोग में आने वाली वस्तुओं, जैसे कलश, जांता आदि की भी श्रद्धापूर्वक पूजा की जाती है। यह पर्व मनुष्य और कृषि जीवन के बीच सदियों से चले आ रहे आत्मीय संबंधों को अभिव्यक्त करता है।

उन्होंने पोरा पर्व की शुभकामनाएं देते हुए प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि एवं मंगलमय जीवन की कामना की।

कार्यक्रम में नागा जी महाराज, विजय पाली, राम अवतार दास जी, रामदेव दास जी, राममनोहर दास जी, रामशिरोमणि दास जी सहित मठ-मंदिर के अनेक पुजारीगण उपस्थित रहे। इसके अलावा जय शुक्ला, अतुल त्रिपाठी, रतन साहू, देवनाथ साहू, कौशल साहू, मीडिया प्रभारी निर्मल दास वैष्णव सहित अनेक प्रतिष्ठित नागरिकों ने सहभागिता की।