- *बहुमत नहीं, मजदूर हित सर्वोपरि होना चाहिए*
- *प्रदर्शन के पश्चात औद्योगिक सम्बन्ध विभाग के माध्यम से डायरेक्टर इंचार्ज के नाम पर ज्ञापन सौंपा गया*
हिंदुस्तान स्टील एम्प्लाइज यूनियन (सीटू) के नेतृत्व में 25 सितंबर 2026 को बोरिया गेट में आयोजित प्रदर्शन में कर्मचारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि एनजेसीएस की बैठकों को केवल “बहुमत का खेल” बनाकर मजदूरों के हितों की बलि देना अब स्वीकार नहीं किया जाएगा। वर्षों से चली आ रही सर्वसम्मति और संवाद की परंपरा को दरकिनार कर ऐसे निर्णय लिए गए जिनका खामियाजा आज स्टील कर्मी भुगत रहे हैं।
*39 माह का एरियर और अधूरा वेतन समझौता*
1 जनवरी 2017 से देय वेतन समझौते को लेकर कर्मचारियों ने लंबा संघर्ष किया, हड़तालें कीं और आंदोलन किए। इसके बावजूद हुए एमओयू में 39 माह के बेसिक एवं महंगाई भत्ता के एरियर्स का समाधान नहीं हुआ। एचआरए, अतिरिक्त इंक्रीमेंट, S-11 के बाद S-12 ग्रेड तथा अन्य महत्वपूर्ण मुद्दे आज भी लंबित हैं। यदि मेमोरेंडम का अंडरस्टैंडिंग के बाद भी कर्मचारियों के मूल प्रश्न अनुत्तरित हैं, तो यह स्पष्ट संकेत है कि वेतन समझौता अभी पूर्ण नहीं हुआ है और उस पर पुनः सार्थक चर्चा आवश्यक है।
*मजदूर विरोधी बोनस फार्मूला तत्काल रद्द हो*
23 मार्च 2023 को लागू बोनस फार्मूले को लेकर शुरू से ही गंभीर आपत्तियां उठाई गई थीं। सीटू और एटक ने इस फार्मूले पर हस्ताक्षर नहीं किए थे। अब वे संगठन भी, जिन्होंने इस पर हस्ताक्षर किए थे, इसके दुष्परिणाम समझने के बाद विरोध दर्ज करा रहे हैं। इसके बावजूद प्रबंधन द्वारा उसी फार्मूले को बनाए रखने का प्रयास कर्मचारियों में असंतोष पैदा कर रहा है। अक्टूबर में दिए जाने वाले बोनस पर तत्काल यूनियनों के साथ चर्चा कर सम्मानजनक राशि सुनिश्चित की जानी चाहिए तथा मजदूर विरोधी फार्मूले को वापस लेकर नए सिरे से सहमति आधारित व्यवस्था बनाई जानी चाहिए।
*10 वर्ष का वेतन समझौता और एमजीबी का प्रश्न*
सीटू लगातार 5 वर्ष की वेतन समझौता अवधि का पक्षधर रहा है। लेकिन 10 वर्ष की अवधि, कम एमजीबी, रात्रि पाली भत्ता तथा अन्य मुद्दों पर बार-बार बहुमत के आधार पर निर्णय थोपे गए। परिणाम यह हुआ कि कर्मचारियों की वास्तविक आर्थिक अपेक्षाओं और समझौते के बीच बड़ा अंतर पैदा हो गया। यदि किसी निर्णय से व्यापक असंतोष उत्पन्न हो रहा है, तो उसकी समीक्षा लोकतांत्रिक और औद्योगिक दोनों दृष्टियों से आवश्यक है।
*स्थायी और ठेका कर्मियों के साथ समान न्याय*
प्रदर्शन में यह मांग भी प्रमुखता से उठाई गई कि सेल एवं आरआईएनएल के ठेका कर्मचारियों को सम्मानजनक वेतन, रोजगार सुरक्षा और कम से कम 20 प्रतिशत वार्षिक बोनस सुनिश्चित किया जाए। “ठेकेदार बदल सकता है, लेकिन ठेका कर्मचारी नहीं” के सिद्धांत को व्यवहार में लागू किया जाए। साथ ही नियमित कार्यों के बढ़ते आउटसोर्सिंग, ठेका कर्मियों की संख्या में कटौती तथा रोजगार असुरक्षा पर रोक लगाई जाए।
*संवाद से समाधान निकाले प्रबंधन*
प्रदर्शनकारियों ने प्रबंधन से मांग की कि 39 माह का एरियर, बोनस फार्मूला, अतिरिक्त इंक्रीमेंट, एचआरए, S-12 ग्रेड सहित अन्य लंबित मुद्दों पर तत्काल द्विपक्षीय वार्ता शुरू की जाए। कर्मचारियों की आवाज को बहुमत की औपचारिकता के पीछे दबाने के बजाय वास्तविक समाधान खोजा जाए। मजदूरों का धैर्य उनकी कमजोरी नहीं है। सम्मानजनक वेतन, न्यायपूर्ण बोनस और सुरक्षित रोजगार उनका अधिकार है, और इन अधिकारों की प्राप्ति के लिए संघर्ष आगे भी जारी रहेगा।







