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माड़िया चौक की मूल पहचान खतरे में—बस्तर की संस्कृति और पहचान के साथ खिलवाड़ क्यों? : गणेश नाग

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  • आदिवासी युवा छात्र संगठन ब्लॉक जगदलपुर ने नाम परिवर्तन की कड़ी निंदा की

जगदलपुर। आदिवासी युवा छात्र संगठन ब्लॉक जगदलपुर ने प्राचीन माड़िया चौक का नाम बदलकर ‘विकसित भारत चौक’* किए जाने तथा चौक की मूल पहचान से जुड़ी प्रतिमा को हटाए जाने पर कड़ी निंदा की है।

 

आदिवासी युवा छात्र संगठन ब्लॉक जगदलपुर के सचिव *गणेश नाग* ने कहा कि किसी क्षेत्र की पहचान केवल उसके भौगोलिक नाम तक सीमित नहीं होती, बल्कि वहां की *आदिवासी संस्कृति, परंपरा, सभ्यता और ऐतिहासिक विरासत* से जुड़ी होती है। ऐसे में प्राचीन माड़िया चौक की पहचान और वहां स्थापित प्रतिमा को हटाकर उसे ‘विकसित भारत चौक’ के नाम से पहचान देना बस्तर की मूल पहचान और कोया संस्कृति के साथ अन्याय है।

 

गणेश नाग ने कहा कि यह सब बस्तर के मंत्री *केदार कश्यप* की मौजूदगी में हो रहा है। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि *बस्तर की मूल पहचान और सांस्कृतिक विरासत की रक्षा की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?* उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि प्रदेश की भाजपा सरकार बस्तर की मूल पहचान, संस्कृति, सभ्यता और पुरखों के इतिहास से जुड़े प्रतीकों को बदलने की दिशा में कार्य कर रही है।

 

उन्होंने कहा कि बस्तर की पहचान यहां के आदिवासी समाज, उनकी संस्कृति, परंपराओं और पुरखों के इतिहास से बनी है। इन ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक प्रतीकों को हटाकर या उनके नाम बदलकर किसी नई प्रदेशीय पहचान को स्थापित करना उचित नहीं है।

 

गणेश नाग ने स्पष्ट रूप से कहा कि *ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक पहचान से जुड़े माड़िया चौक का नाम और उसकी मूल पहचान बदला जाना स्वीकार नहीं किया जाएगा।* आदिवासी युवा छात्र संगठन इस प्रकार के बदलाव का कड़ा विरोध एवं निंदा करता है।

 

उन्होंने कहा कि “बस्तर की पहचान बचाना हम सबकी जिम्मेदारी है।” बस्तर की संस्कृति, कोया समाज की पहचान और ऐतिहासिक विरासत को संरक्षित रखने के लिए समाज और युवाओं को एकजुट होकर अपनी आवाज उठानी होगी। ये सरकार लगातार प्रदेशीय के हित में कार्य कर रहा है।