- सरस्वती शिशु मंदिर — भारत की प्राचीन गुरुकुल परंपरा का आधुनिक स्वरूप।
राधेश्याम सोनवानी, गरियाबंद /अमलीपदर :– भारत में आज भी सरस्वती शिशु मंदिर विद्यालय गुरुकुल परंपरा के उन आदर्शों को जीवंत रखने का सार्थक प्रयास कर रहे हैं, जहाँ शिक्षा का उद्देश्य केवल पुस्तकीय ज्ञान देना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के चरित्र निर्माण, नैतिक मूल्यों, अनुशासन, सेवा भावना, शारीरिक एवं बौद्धिक विकास के साथ उन्हें संस्कारवान नागरिक बनाना है।
वर्ष 1952 में उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में प्रथम सरस्वती शिशु मंदिर की स्थापना के साथ प्रारंभ हुई यह शैक्षिक यात्रा आज देशभर में संस्कारयुक्त शिक्षा के प्रसार का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुकी है।
बदलते समय के साथ आधुनिक तकनीक को अपनाते हुए भी भारतीय संस्कृति, परंपराओं और जीवन मूल्यों को शिक्षा का अभिन्न अंग बनाए रखना ही इस शिक्षा पद्धति की विशिष्ट पहचान है।
इसी उद्देश्य को आगे बढ़ाते हुए सरस्वती शिक्षा संस्थान छत्तीसगढ़ द्वारा डिजिटल क्रांति एवं आधुनिक शिक्षा की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर प्रदेश के 150 सरस्वती शिशु मंदिर विद्यालयों में स्मार्ट बोर्ड युक्त डिजिटल कक्षाओं की सौगात प्रदान करने की सराहनीय पहल की गई है।
आज दिनांक 12 अक्टूबर 2026 को प्रातः 10:30 बजे आदरणीय डॉ. पूर्णेन्दु सक्सेना जी, माननीय क्षेत्रीय संघचालक, मध्य क्षेत्र एवं डॉ. देवनारायण साहू जी, संगठन मंत्री, विद्या भारती छत्तीसगढ़ सहित वरिष्ठ पदाधिकारियों की गरिमामयी उपस्थिति में वर्चुअल माध्यम से डिजिटल स्मार्ट बोर्ड कक्षों का लोकार्पण संपन्न हुआ।
इस गौरवपूर्ण पहल के अंतर्गत सरस्वती शिशु मंदिर, अमलीपदर को भी डिजिटल स्मार्ट क्लास की सौगात प्राप्त हुई। यह हमारे विद्यालय के विद्यार्थियों के लिए आधुनिक एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
🌿 हमारी शिक्षा पद्धति की विशेषता
यहाँ बच्चों को पुस्तकीय ज्ञान के साथ समाज के प्रति अपने कर्तव्यों का बोध, सभी के प्रति प्रेम एवं सम्मान, सेवा, सहयोग, समरसता और सद्भाव की भावना सिखाई जाती है। साथ ही भारतीय संस्कृति, गौरवशाली परंपराओं एवं जीवन मूल्यों से जोड़कर विद्यार्थियों के बौद्धिक, शारीरिक, मानसिक और नैतिक विकास पर विशेष ध्यान दिया जाता है।
प्राचीन गुरुकुल परंपरा के संस्कार और आधुनिक डिजिटल तकनीक का समन्वय ही उज्ज्वल भविष्य के निर्माण का सशक्त आधार है।
🙏 सरस्वती शिक्षा संस्थान छत्तीसगढ़ एवं विद्या भारती के समस्त वरिष्ठ पदाधिकारियों का इस दूरदर्शी एवं प्रेरणादायी पहल के लिए हार्दिक आभार एवं अभिनंदन।
🚩 शिक्षा से संस्कार, संस्कार से चरित्र और चरित्र से राष्ट्र निर्माण।





