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सेवानिवृत्ति करीब, फिर भी सेवा प्रकरण लंबित! 10 माह बाद भी जिला परामर्शदात्री समिति के निर्णय बेअसर…

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  • पदोन्नति, समयमान वेतनमान और पेंशन के लिए भटक रहे कर्मचारी; कर्मचारी संघ में आक्रोश, 15 दिवसीय विशेष निराकरण अभियान चलाने की मांग:-छत्तीसगढ़ प्रदेश तृतीय वर्ग शासकीय कर्मचारी संघ 

शासकीय सेवा से सेवानिवृत्ति की दहलीज पर खड़े कर्मचारियों के सेवा संबंधी प्रकरणों का लंबे समय से निराकरण नहीं होने तथा शासन के निर्देश पर आयोजित जिला परामर्शदात्री समिति की बैठक में लिए गए निर्णयों का लगभग 10 माह बाद भी प्रभावी क्रियान्वयन नहीं होने पर छत्तीसगढ़ प्रदेश तृतीय वर्ग शासकीय कर्मचारी संघ, जिला दुर्ग ने गहरी नाराजगी व्यक्त की है। संघ ने जिला प्रशासन का ध्यान आकृष्ट करते हुए कहा है कि कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान के लिए बैठकें आयोजित करना तभी सार्थक होगा, जब उनमें लिए गए निर्णयों का समय-सीमा के भीतर पालन सुनिश्चित किया जाए।

संघ के अनुसार, जिले के अनेक शासकीय कर्मचारी लंबे समय से पदोन्नति, समयमान वेतनमान, सेवापुस्तिका सत्यापन, पेंशन प्रकरणों के निराकरण तथा अन्य सेवा स्वत्वों से संबंधित समस्याओं का सामना कर रहे हैं। विशेष रूप से ऐसे कर्मचारी, जिनकी सेवानिवृत्ति निकट है, अपने सेवा संबंधी प्रकरणों के निराकरण की प्रतीक्षा में हैं। निर्धारित समय पर विभागीय कार्रवाई नहीं होने से कर्मचारियों में असंतोष बढ़ रहा है तथा सेवानिवृत्ति के पश्चात मिलने वाले आर्थिक लाभों में विलंब की आशंका भी बनी हुई है।

10 माह बाद भी निर्णयों का पालन नहीं, कर्मचारियों में बढ़ रहा आक्रोश*

*संघ ने सवाल उठाया है कि जब कर्मचारियों की समस्याओं के निराकरण के उद्देश्य से जिला परामर्शदात्री समिति की बैठक आयोजित की गई थी, तो उसमें उठाए गए मुद्दों तथा लिए गए निर्णयों पर संबंधित विभागों द्वारा अब तक प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं की गई? बैठक के लगभग 10 माह बीत जाने के बाद भी यदि कर्मचारियों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं, तो यह प्रशासनिक कार्यप्रणाली की समीक्षा की आवश्यकता को दर्शाता है।

संघ का कहना है कि परामर्शदात्री समिति कर्मचारियों और प्रशासन के बीच संवाद स्थापित करने तथा सेवा संबंधी समस्याओं का समाधान निकालने का महत्वपूर्ण मंच है। ऐसे मंच पर उठाई गई समस्याओं का निराकरण नहीं होने से कर्मचारियों का विश्वास प्रभावित होता है। अतः समिति के निर्णयों को केवल बैठक की कार्यवाही तक सीमित न रखकर उनका विभागवार क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

पदोन्नति और समयमान वेतनमान के प्रकरण वर्षों से लंबित

संघ ने बताया कि कर्मचारियों के पदोन्नति संबंधी प्रकरणों का समय पर निराकरण नहीं होने से उन्हें सेवा में आगे बढ़ने के अवसरों तथा उससे जुड़े लाभों के लिए प्रतीक्षा करनी पड़ती है। इसी प्रकार, पात्र कर्मचारियों को समयमान वेतनमान का लाभ प्रदान करने में अनावश्यक विलंब होने से उनके वेतन निर्धारण एवं आर्थिक हित प्रभावित हो सकते हैं।

संघ ने मांग की है कि सभी विभागों में लंबित पदोन्नति प्रकरणों की समीक्षा कर पात्र कर्मचारियों के मामलों में नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाए। समयमान वेतनमान के लंबित मामलों की सूची तैयार कर उनकी पात्रता, अभिलेखों की स्थिति तथा निराकरण में आ रही बाधाओं का परीक्षण किया जाए। जिन प्रकरणों में कोई वैधानिक या विभागीय बाधा नहीं है, उनका शीघ्र निराकरण किया जाए तथा जिन मामलों में कमी है, उन्हें दूर करने के लिए संबंधित कर्मचारियों और अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए जाएं।

सेवानिवृत्ति से पहले सेवा पुस्तिका सत्यापन और पेंशन प्रकरणों का निराकरण जरूरी

संघ ने कहा कि सेवानिवृत्ति से संबंधित औपचारिकताओं को अंतिम समय तक लंबित रखना कर्मचारियों के लिए परेशानी का कारण बन सकता है। सेवा पुस्तिका का सत्यापन, सेवा अवधि का मिलान, वेतन निर्धारण संबंधी त्रुटियों का सुधार, नो-डिमांड प्रमाण-पत्र, आवश्यक विभागीय अभिलेखों का संकलन तथा पेंशन प्रकरण तैयार करने की प्रक्रिया समय रहते पूरी की जानी चाहिए।

सेवानिवृत्ति के बाद कर्मचारी को नियमित पेंशन के साथ नियमानुसार देय ग्रेच्युटी, अर्जित अवकाश नगदीकरण, समूह बीमा योजना की राशि तथा अन्य सेवानिवृत्ति लाभ प्राप्त करने का इंतजार करना पड़े, यह स्थिति नहीं बननी चाहिए। इन मामलों में किसी प्रकार की कमी या आपत्ति होने पर उसका समय रहते निराकरण किया जाना आवश्यक है।

संघ ने विशेष रूप से मांग की है कि आगामी महीनों में सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों की सूची तैयार कर उनके सेवा अभिलेखों की अग्रिम समीक्षा की जाए, ताकि सेवानिवृत्ति के समय अनावश्यक प्रशासनिक बाधाएं उत्पन्न न हों और नियमानुसार देय स्वत्वों का भुगतान समय पर किया जा सके।*

*15 दिवसीय विशेष निराकरण अभियान चलाने की मांग

छत्तीसगढ़ प्रदेश तृतीय वर्ग शासकीय कर्मचारी संघ, जिला दुर्ग ने जिला प्रशासन से मांग की है कि जिले के समस्त संबंधित विभागों में लंबित कर्मचारी सेवा प्रकरणों के निराकरण के लिए 15 दिवसीय विशेष अभियान चलाया जाए। इस अभियान के अंतर्गत प्रत्येक विभाग को लंबित मामलों की सूची तैयार करने, प्रकरणों की वर्तमान स्थिति स्पष्ट करने तथा नियमानुसार निराकरण के लिए समय-सीमा निर्धारित करने के निर्देश दिए जाएं।

संघ ने प्रमुख रूप से निम्नलिखित मांगें रखी हैं—

जिला परामर्शदात्री समिति की पिछली बैठक में लिए गए निर्णयों की विभागवार समीक्षा की जाए।

लंबित पदोन्नति प्रकरणों का परीक्षण कर पात्र कर्मचारियों को नियमानुसार पदोन्नति का लाभ दिया जाए।

पात्र कर्मचारियों के समयमान वेतनमान संबंधी प्रकरणों का शीघ्र निराकरण किया जाए।

सेवानिवृत्ति के निकट कर्मचारियों की सेवापुस्तिका का सत्यापन तथा सेवा अभिलेखों में आवश्यक सुधार प्राथमिकता से किया जाए।

पेंशन, ग्रेच्युटी, अर्जित अवकाश नगदीकरण, समूह बीमा तथा अन्य देय सेवानिवृत्ति लाभों के प्रकरण समय पर तैयार एवं निराकृत किए जाएं।

लंबित मामलों में विभागीय आपत्तियों और अभिलेखों की कमियों को दूर करने के लिए संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए जाएं।

प्रत्येक विभाग से प्रगति प्रतिवेदन प्राप्त करने के लिए निगरानी व्यवस्था बनाई जाए तथा अभियान की समाप्ति पर निराकरण की समीक्षा की जाए।

अनावश्यक विलंब के लिए उत्तरदायित्व निर्धारित करते हुए नियमानुसार आवश्यक प्रशासनिक कार्रवाई की जाए।

कर्मचारी हितों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं करेगा संघ

संघ के प्रांतीय महामंत्री विजय लहरे, वरिष्ठ प्रांतीय उपाध्यक्ष प्रदीप बाबा चौहान, जिलाध्यक्ष भानु प्रताप यादव एवं जिला सचिव शिवदयाल घृतलहरे ने जिला प्रशासन से आग्रह किया है कि कर्मचारियों की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए संबंधित विभागीय अधिकारियों को स्पष्ट एवं समयबद्ध निर्देश जारी किए जाएं। उन्होंने कहा कि कर्मचारी अपने सेवाकाल के दौरान शासन के दायित्वों का निर्वहन पूरी निष्ठा से करते हैं। ऐसे में उनकी पदोन्नति, वेतन संबंधी लाभ तथा सेवानिवृत्ति के समय मिलने वाले वैधानिक स्वत्वों के निराकरण में अनावश्यक विलंब नहीं होना चाहिए।

पदाधिकारियों ने कहा कि सेवानिवृत्ति के करीब पहुंचे कर्मचारियों के लिए प्रत्येक दिन महत्वपूर्ण होता है। यदि उनके सेवा प्रकरण समय पर पूरे नहीं होते, तो सेवानिवृत्ति के बाद उन्हें पेंशन और अन्य देय लाभ प्राप्त करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए प्रशासन को इन मामलों में सामान्य प्रक्रिया से आगे बढ़कर प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई करनी चाहिए।

संघ ने स्पष्ट किया है कि वह कर्मचारियों की लंबित समस्याओं के समाधान के लिए निरंतर प्रयासरत रहेगा। यदि जिला परामर्शदात्री समिति के निर्णयों का पालन सुनिश्चित नहीं किया गया और लंबित सेवा प्रकरणों के निराकरण की दिशा में ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो संघ कर्मचारियों के हित में चरणबद्ध आंदोलन, धरना-प्रदर्शन सहित अन्य लोकतांत्रिक कदम उठाने के लिए बाध्य होगा।*