नगरी में सिंचाई विभाग के जमीनों के दुरुस्तीकरण का कार्य जोरों पर…
- अब तक 8 खसरों को विभाग के नाम किया गया, बाकी का काम 2 से 3 माह में पूर्ण हो जाएगा
- नहर किनारे बन रहे विवादित भवनों के निर्माण पर लगी रोक, डायवर्सन और एनओसी पर भी आपत्ति
नगरी।नगरी चुरियारा माइनर में तीन दशक से अधिक समय से लंबित नहर निर्माण से संबंधित भूमि दुरुस्तीकरण प्रक्रिया का कार्य जिलाधीश धमतरीं अविनाश मिश्रा के सवेदनशील पहल एवं एसडीएम नगरी प्रीति दुर्गम के कुशल निर्देशन, नगरी क्षेत्र के समाजसेवकों तथा पत्रकारों के जुझारूपन के चलते तेज गति से जारी है । सिंचाई विभाग ने नगरी क्षेत्र में अधिग्रहित की गई जमीनों को अपने नाम दर्ज कराने की कार्रवाई तेज कर दी है। विभागीय सूत्रों के अनुसार अब तक 8 खसरों की भूमि का नामांतरण पूरा कर लिया गया है, जबकि शेष भूमि का कार्य अगले दो से तीन महीनों में पूर्ण कर लिया जाएगा।
1991-92 में नहर निर्माण के लिए किसानों की जमीन अधिग्रहित की गई थी, परंतु विभाग के नाम दर्ज न होने से कई वर्षों तक यह भूमि विवादों में उलझी रही। अब प्रशासन द्वारा विशेष पहल करते हुए इस कार्य को प्राथमिकता में शामिल किया गया है।
प्रशासन की ओर से जारी निर्देशों के तहत नहर किनारे हो रहे सभी विवादित निर्माण कार्यों पर तत्काल रोक लगा दी गई है। तहसील प्रशासन और नगरी नगर पंचायत की संयुक्त टीम ने क्षेत्र का निरीक्षण कर कई स्थलों पर अवैध निर्माण, खरीदी-बिक्री और डायवर्सन पर रोक लगाने की कार्रवाई की है। अधिकारियों का कहना है कि सिंचाई विभाग की परियोजनाओं से जुड़ी भूमि अब पूरी तरह सुरक्षित रखी जाएगी, ताकि भविष्य में जलसंवर्धन और सिंचाई कार्यों में किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न न हो।
स्थानीय प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जब तक भूमि का नामांतरण प्रक्रिया पूर्ण नहीं हो जाती, तब तक संबंधित क्षेत्रों में किसी भी प्रकार की रजिस्ट्री, निर्माण या डायवर्सन की अनुमति नहीं दी जाएगी।
“विवादित और आपत्ति लगी भूमि का नहीं होगा डायवर्सन” — एसडीएम प्रीति दुर्गम
एसडीएम नगरी प्रीति दुर्गम ने भूमि विवाद और डायवर्सन संबंधी विषयों पर स्पष्ट कहा कि — “नगरी क्षेत्र की विवादित एवं आपत्ति लगी भूमि पर किसी भी स्थिति में डायवर्सन की अनुमति नहीं दी जाएगी। सभी मामलों की गहन जांच के बाद ही निर्णय लिया जाएगा।” उन्होंने आगे कहा कि भूमि अधिग्रहण के मामलों में समाजसेवियों एवं पत्रकारों ने जिस जिम्मेदारी और सहयोग की भावना से प्रशासन का साथ दिया है, वह प्रशंसनीय है।
“रिकॉर्ड दुरुस्तीकरण का कार्य लगातार जारी है” — तहसीलदार दुर्गेश तंवर
प्रभारी तहसीलदार नगरी श्री दुर्गेश तंवर ने जानकारी दी कि — “अब तक कुल 8 खसरा नंबरों का रिकॉर्ड दुरुस्त कर दिया गया है, जबकि शेष खसरों के रिकॉर्ड का दुरुस्तीकरण कार्य लगातार प्रगति पर है। इसके लिए पटवारी सहित अन्य राजस्व अमले को आवश्यक निर्देश जारी किए जा चुके हैं। आने वाले 2 से 3 माह में कार्य को पूर्ण कर लिया जाएगा।
“पटवारी रिपोर्ट और अन्य शासकीय अनुमति के आधार पर होगी कार्रवाई” — सीएमओ यशवंत वर्मा
नगर पंचायत नगरी के मुख्य नगरपालिका अधिकारी (सीएमओ) यशवंत वर्मा ने बताया कि — “नगर पंचायत द्वारा दो नोटिस जारी किए जाने के बाद विनय नारंग ने निर्माण हेतु एनओसी की मांग की थी। इस पर पटवारी हल्का नम्बर 23 से पत्र लिखकर भूमि सम्बन्ध में रिपोर्ट मांगी गई है, और रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद अन्य शासकीय विभागों से भी एनओसी प्रस्तुत करने के लिए आवेदक नारंग को कहा जाएगा। सम्बंधित सभी विभागीय एनओसी और पटवारी रिपोर्ट के आधार पर ही उचित निर्णय लिया जाएगा।”
“विवादित जमीनों पर नहीं दी जाएगी एनओसी” — बलजीत छाबड़ा
नगर पंचायत अध्यक्ष नगरी श्री बलजीत छाबड़ा ने विवादित भूमि पर निर्माण कार्य को लेकर स्पष्ट रुख जताते हुए कहा कि —
“नगर पंचायत क्षेत्र के भीतर किसी भी विवादित भूमि पर एनओसी जारी नहीं की जाएगी। धमतरी मार्ग पर विनय नारंग द्वारा किए जा रहे निर्माण कार्य को रोक दिया गया है और मामले की पूरी जांच जारी है।”
“प्रशासन का मिल रहा अभूतपूर्व सहयोग” — गोलू ध्रुव (जितेंद्र मंडावी)
नगरी क्षेत्र के युवा आदिवासी नेता जितेंद्र उर्फ गोलू मंडावी ने इस विषय पर चर्चा करते हुए कहा कि —नगरी क्षेत्र की जनता के हित में एक लंबे समय से लंबित यह मुद्दा अब समाधान की दिशा में बढ़ रहा है। जबसे मैंने इस मामले को प्रशासन के संज्ञान में लाया है, तबसे लेकर अब तक जिलाधीश धमतरी, राजस्व विभाग, सिंचाई विभाग और नगर पंचायत नगरी के अधिकारी एवं कर्मचारियों ने जिस तत्परता और समन्वय के साथ कार्य किया है, वह वास्तव में अभूतपूर्व और सराहनीय है। गोलू मंडावी ने बताया कि उनके द्वारा विवादित भूमि पर हो रहे निर्माण कार्यों, डायवर्सन और एनओसी जारी करने पर रोक लगाने हेतु एसडीएम, नगर पंचायत नगरी और संबंधित सभी विभागों में औपचारिक आपत्ति आवेदन भी प्रस्तुत किए जा चुके हैं।
उन्होंने विश्वास जताया कि प्रशासन के निरंतर सहयोग से आने वाले दो से तीन माह में यह ऐतिहासिक भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया पूर्ण हो जाएगी।




