रूस का ऐलान- ‘भारत के साथ जारी रहेगा हाइड्रोकार्बन व्यापार’, खाड़ी देशों के साथ भी FTA का ब्लूप्रिंट भी तैयार…
नई दिल्ली: रूस ने भारत के साथ चल रही ऊर्जा संबंधी अटकलों पर पूरी तरह से विराम लगा दिया है. रूसी विदेश मंत्रालय ने इसे लेकर बयान जारी किया है. रूस ने भारत के साथ हाइड्रोकार्बन पर सहयोग जारी करने की बात कही है.
रूस ने भारत के साथ अपनी ऊर्जा संबंधों को लेकर चल रही अटकलों पर पूरी तरह विराम लगा दिया है. रूस के विदेश मंत्रालय ने बुधवार को बयान जारी करते हुए कहा है कि भारत के साथ हाइड्रकार्बन यानी कच्चे तेल और गैस के व्यापार में करीबी सहयोग जारी रखने के लिए पूरी तरह से तैयार है. गौरतलब है कि भारत और अमेरिका ट्रेड डील के बीच अमेरिका की तरफ से दावा किया जा रहा था कि भारत रूस से तेल नहीं खरीदेगा. इसके बाद अमेरिका ने भारत पर लगने वाले 25 फीसदी के दंडात्मक टैरिफ को वापस ले लिया है.
दोनों देश के फायदेमंद होगी हाइड्रोकार्बन की खरीद
रूस के विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया पर लिखा- “हम लोगों को पूरा भरोसा है कि भारत रूस द्वारा हाइड्रोकार्बन की खरीद दोनों ही देशों के लिए बेहद फायदेमंद है.”
अमेरिका का दबाव
रूसी विदेश मंत्रालय ने लिखा- यह ग्लोबल एनर्जी मार्केट में स्थिरता बनाए रखने में भी मदद करता है. हम अपने भारतीय सहयोगियों के साथ तालमेल और सहयोग जारी रखने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं.”
गौरतलब है कि इससे पहले क्रेमलिन ने भारत अमेरिका ट्रेड डील पर बयान जारी कर कहा था कि उन्हें भारत द्वारा रूस से तेल न खरीदने के बारे में कोई जानकारी नहीं है.
रूस का बयान ऐसे वक्त में आया है जब वाशिंगटन पिछले काफी वक्त से भारत पर दबाव बना रहा है कि रूस से तेल की खरीद को बंद कर दें. अमेरिका रूस के निर्यात को सीमित करना चाहता है ताकि यूक्रेन युद्ध के लिए रूस की आर्थिक क्षमता को कमजोर कर सके.
GCCs के साथ FTA का ब्लूप्रिंट
यूरोपियन यूनियन और अमेरिका के बाद भारत एक और बड़े FTA पर चर्चा जल्द शुरू करेगा. गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (GCC) के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के लिए टर्म्स ऑफ रेफरेंस (ToR) पर हस्ताक्षर करेगा.
GCC में शामिल हैं ये देश
GCC देशों में बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) शामिल हैं.
टर्म्स ऑफ रेफरेंस साइन करते हुए पीयूष गोयल ने कहा है कि खाड़ी देशों के साथ एक और नया FTA है.
ये दुनिया के दो सबसे पुराने ट्रेडिंग पार्टनर्स के बीच एक नई डील होगी.
पहले की तुलना में तेज, मजबूत और नया व्यापारिक रिश्ता होगा.
इससे निवेश का माहौल बनेगा, और दोनों पक्षों के लिए नए व्यावसायिक ऊच्च स्तर बनेंगे.
टर्म्स ऑफ रिफरेंस एक ब्लूप्रिंट होता है. यह एफटीए पर बातचीत शुरू करने से पहले एक तरह की गाइडलाइन्स होती है.
भारत और खाड़ी देशों (GCCs) के बीच वर्तमान में 170 बिलियन डॉलर का व्यापार होता है.
पीयूष गोयल ने जारी किया था बयान
आपको बता दें कि बुधवार को वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर लोकसभा को बताया था कि, “भारतीय पक्ष अपने संवेदनशील क्षेत्रों खासकर कृषि और दुग्ध क्षेत्रों के हितों की रक्षा सुनिश्चित करने में सफल रहा है. अमेरिकी पक्ष के भी कुछ ऐसे क्षेत्र थे जो उनके दृष्टिकोण से संवेदनशील थे. 1 साल तक चली कई दौर के विचार विमर्श के बाद व्यापार समझौते के कई क्षेत्रों को अंतिम रूप देने में सफल रहे. खाद और कृषि क्षेत्र में भारत की संवेदनशीलता का पूर्ण ध्यान रखा गया है.”