पेट्रोल पंप कर्मियों से पगार के नाम पर धोखा, मूल वेतन पर संचालक डाल रहे डाका

(भानु प्रताप साहू)
बलौदाबाजार। पेट्रोल पंपों पर काम कर रहे हैं कर्मचारियों का जिलेभर में कई जगहों पर वेतन को लेकर शोषण हो रहा है। केंद्र सरकार की ओर से पेट्रोल पंपों पर लगे कर्मचारियों का न्यूनतम वेतन 12000 रु हर माह निर्धारित किया गया है लेकिन कर्मचारियों को वो पैसे नहीं मिल रहे हैं कर्मचारियों को इस समय कई पेट्रोल पंपों पर 5000 रु से 6000 रु तक ही वेतन मिलता है इसके एवज में कर्मचारियों से 12 घंटे तक काम लिया जा रहा है। केंद्र सरकार के मुताबिक पेट्रोल कंपनियों के वेतन के मुताबिक कर्मचारियों को 12000 रु हर माह दिया जाना है इसके लिए केंद्र सरकार ने फरमान जारी किए हैं। जिलेभर के पेट्रोल पंपों पर काम कर रहे कर्मचारियों ने कहा है कि पैसों को लेकर शोषण हो रहा है समाज सेवी व भाजपा नेता सत्यनारायण पटेल ने जिले के विभिन्न पेट्रोल पंपों पर चल रही इस भर्रेशाही पर मूल कर्मचारियों की जगह भाई-भतीजे व अन्य के नाम का उल्लेख कर कर्मचारियों के साथ की जा रही धोखाधड़ी को बंद करने की मांग जिला प्रशासन से करते हुए कहा है कि यदि व्यवस्था नहीं सुधरी तो उनके हक की लड़ाई के लिए धरने व आंदोलन से परहेज नहीं होगी। श्री पटेल ने कहा कि पेट्रोल पम्प पर कार्यरत कर्मचारियों को वेतन के तौर पर मासिक 5000 रु से 6000 रु दिए जाते हैं जो कि न्यूनतम वेतन से बहुत कम है साथ में इन्हें 10 से 12 घंटे प्रतिदिन काम करना पड़ता है। महीने में छुट्टी के तौर पर केवल 2 से 4 दिनों की छुट्टी होती है इससे अधिक छुट्टी लेने पर पैसे कटते हैं जबकि ऐसा संभव है कि महीने में किसी भी व्यक्ति को 2 दिनों से अधिक की छुट्टी की जरूरत होती है इस सच के साथ जब न्यूनतम वेतन की तरफ नजर फिरते हैं जहां केवल प्रतिदिन 8 घंटे काम करने होते हैं और मासिक चार छुट्टी मिलती है तो यह सच और दर्दनाक दिखता है।
शोषण के साथ डर
पेट्रोल पंप पर काम कर रहे श्रमिकों ने बताया कि पेट्रोल पंप पर उनका शोषण किया जाता है कैसे वहां एक श्रमिक के वेतन में उनसे 2 श्रमिक के बराबर कार्य कराया जाता है। पीएफ के पैसे भी काट लिए जाते हैं पर यह पैसे जाते कहां हैं इसके बारे में श्रमिकों को कोई जानकारी नहीं दी जाती है। श्रमिकों ने नाम न छापने की शर्त रखी श्रमिकों का डर था कि इस बेरोजगारी की हालत में उनके द्वारा कहे गए बातों की वजह से अगर नौकरी छीन ली जाए तो उनकी हालत बद से बदतर हो जाएगी इस शोषण के साथ-साथ मजदूर में डर का माहौल भी जिंदा रहता है।
कोरम हो रहा पूरा
जिलेभर में न्यूनतम वेतन की स्थिति लगातार बद से बदतर हो गई है जिलेभर के पेट्रोल पंप पर न्यूनतम वेतन लागू नहीं हो रहा है परंतु वेतन में कागजों पर बढ़ोतरी हुई पर वास्तविकता में कभी लागू नहीं हुआ पेट्रोल पंपों में अजीब तरह की धांधलीया चल रही है। वेतन को बैंकिंग सिस्टम से जोड़ दिया गया है लेकिन वेतन देने के बाद नियोक्ता वेतन से कुछ राशि मजदूर या श्रमिक से लौटा आने के लिए कहता है और श्रमिक अपनी नौकरी बचाने के चक्कर में विरोध नहीं करता है। नियोक्ताओं द्वारा ऐसी धांधलिया इसलिए की जाती है ताकि सरकारी फाइलों में तो न्यूनतम वेतन की कानूनी जरूरत को पूरा किया जा सके।
यह भी कहते कायदे
विज्ञप्ति के अनुसार पेट्रोल पंप डीलरों को यह भी निर्देश दिया गया है कि वह सभी कर्मचारियों को प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना और प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना के तहत 12 रु के वार्षिक प्रीमियम पर बीमित व्यक्ति को दुर्घटना अथवा दुर्घटना में मृत्यु होने पर 200000 रुपये का बीमा उपलब्ध कराया जाता है प्रधानमंत्री जीवन ज्योति योजना के तहत 330 रु के वार्षिक प्रीमियम पर बीमित व्यक्ति की किसी भी वजह से मृत्यु होने पर परिवार के सदस्य को 200000 रुपये बीमा राशि दी जाती है लेकिन संभाग में पेट्रोल पंप संचालको पर कोई भी नियम लागू नहीं हो रहा है।
इनका कहना है
आपके माध्यम से जानकारी मिल रहा है, जिलेभर के पेट्रोल पंपों की जांच की जाएगी, अगर नियमानुसार पेट्रोल पंप कर्मियों को संचालक द्वारा वेतन खाते में देकर आधा वेतन लेना पाया गया तो कार्रवाई की जाएगी।
तेजस चंद्राकर
श्रम अधिकारी, बलौदाबाजार

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