ईरान में यहां पर Big Attack का अमेरिका ने बनाया प्लान, अब चीन का बौखलाना तय…
- US-Iran War के बीच डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खर्ग द्वीप पर निशाना ताना है, जो Iran Economy की रीढ़ माना जाता है और अमेरिका के प्लान ने सबसे ज्यादा चीन की चिंता बढ़ाई है.
नई दिल्ली,16 मार्च 2026: अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध (US-Iran War) में इस समय एक आइलैंड सुर्खियों में है, आखिर हो भी क्यों न आखिर ये ट्रंप के निशाने पर जो आया है. फारस की खाड़ी में स्थित Kharg Island भले ही एक छोटा सा द्वीप है, लेकिन ईरान की तेल आधारित अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है. इसकी वजह है कि ये ईरान के अधिकांश कच्चे तेल के निर्यात (Iran Crude Oil Export) को संभालता है और ये ईरान के लिए 78 अरब डॉलर (करीब 7 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा) की रेवेन्यू मशीन भी है. खास बात ये है कि ट्रंप के इस बिग अटैक प्लान से ईरान के अलावा सबसे बड़ी चोट चीन को लगने वाली है, क्योंकि ईरानी तेल का सबसे बड़ा खरीदार ड्रैगन ही है.
छोटा पैकेट, बड़ा धमाल है खर्ग द्वीप
सबसे पहले बताते हैं खर्ग आइलैंड के बारे में, तो यह द्वीप साइज में सिर्फ 20 वर्ग किलोमीटर का है, जिसकी करीब 3 मील और लंबाई तकरीबन 7 मील है. ईरान के बुशेहर प्रांत के कोस्ट से इस द्वीप की दूरी महज 25 किलोमीटर है. आकार में बेहद छोटा खर्ग आइलैंड सिर्फ द्वीप नहीं, बल्कि ईरान की आर्थिक और सैन्य ताकत, वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा का प्रतीक है. रणनीतिक रूप से यह इसलिए भी अहम है, क्योंकि यहां समुद्र की गहराई ज्यादा होने की वजह से दुनिया के सबसे बड़े तेल टैंकर यहां आसानी से आ सकते हैं और सीधे तेल लोड कर सकते हैं.
खर्ग द्वीप को ईरान का सबसे बड़ा तेल टर्मिनल माना जाता है. यहां स्थित टैंक फार्म की क्षमता करीब 2.4 करोड़ बैरल कच्चा तेल जमा करने की है. यहां से पाइपलाइनों के जरिए ईरान के बड़े तेल क्षेत्र गचसारान और अहवाज जुड़ते हैं. इन पाइपलाइन्स से तेल आइलैंड पर आता है और बड़े टैंकरों के जरिए अलग-अलग देशों में पहुंचता है. रिपोर्ट्स की मानें, तो यह द्वीप ईरान के अधिकांश तेल निर्यात का मुख्य केंद्र है.
ईरान के लिए $78 अरब की रेवेन्यू मशीन
Kharg Island को ईरान की आर्थिक जीवन रेखा कहना गलत न होगा. वर्तमान संघर्ष से पहले कुल ईरानी तेल निर्यात का 90 से 95% हिस्सा खर्ग आइलैंड से निर्यात किया जाता था. युद्ध की शुरुआत के बाद से ईरान ने 13.7 मिलियन बैरल तेल का निर्यात यहां से किया है और संघर्ष के बावजूद शिपमेंट खरीदारों तक पहुंच रहे हैं. अमेरिका के वाशिंगटन स्थित फाउंडेशन फॉर डिफेंस ऑफ डेमोक्रेसीज के सीनियर एडवाइजर मियाद मालेकी ने टाइम मैगजीन को बताया है कि खर्ग द्वीप ईरान के लिए सालाना करीब 78 अरब डॉलर एनर्जी रेवेन्यू उत्पन्न करता है. यानी ईरान की तेल निर्यात से होने वाली इनकम का सबसे बड़ा हिस्सा यहां से आता है.
ऐसे ही नहीं ट्रंप की नजर, बताया ‘Crown Jewel’
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने ऐलान किया है कि अमेरिकी सेना ने खर्ग आइलैंड पर बड़ा सैन्य हमला किया है और इसमें द्वीप पर मौजूद लगभग सभी सैन्य ठिकाने नष्ट हो चुके हैं. ट्रंप ने Kharg Island को ईरानी शासन का क्राउन ज्वेल यानी सबसे कीमती संपत्ति करार दिया है. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि अमेरिकी हमले में जानबूझकर वहां तेल सुविधाओं को निशाना नहीं बनाया गया.
ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ सोशल पर की गई एक पोस्ट में साफ किया है कि US Operation में मिलिट्री इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाया गया, जबकि ऊर्जा सुविधाओं को जानबूझकर बख्शा गया. हालांकि, उन्होंने चेतावनी (Trump Warning) भी दी कि अगर क्षेत्र में जहाजों के आवागमन को खतरा होता है और ईरान होर्मुज से जहाजों की आवाजाही में रुकावट डालने की कोशिश करता है, तो मैं तुरंत इस फैसले पर पुनर्विचार करूंगा.
तो नष्ट हो जाएगी ईरानी इकोनॉमी…
न सिर्फ ट्रंप, बल्कि उनके सहयोगी और अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने भी एक Social Media प्लेटफॉर्म ट्विटर (अब X) पर एक पोस्ट में कहा कि खर्ग द्वीप पर हमले से युद्ध की अवधि कम करने में मदद मिलेगी. उन्होंने लिखा कि Kharg Island से अगर ईरान अपने ऑयल इंफ्रास्ट्रक्चर पर कंट्रोल खो देता है, तो उसकी अर्थव्यवस्था पूरी तरह से नष्ट हो जाएगी, क्योंकि ये इसी द्वीप पर केंद्रित है और इस युद्ध का भविष्य तय करने वाली है.
Trump का अटैक प्लान, चिंता में चीन
अमेरिका और इजरायल के ईरान पर हमलों ने पहले ही चीन की एनर्जी सिक्योरिटी से जुड़ी चिंता बढ़ा दी है. वहीं रिपोर्ट की मानें तो खर्ग द्वीप में सैन्य ठिकानों पर अमेरिकी हमलों से चीन में पेट्रोल-डीजल की कीमतों (Petrol Diesel Price In China) में 10% तक का उछाल आया है. ऐसा इसलिए क्योंकि ईरान का सबसे बड़ा तेल खरीदार चीन ही है और खासतौर पर खर्ग द्वीप से Oil Export का बड़ा हिस्सा आखिरकार चीन पहुंचता है. खर्ग से लोड होने वाले तेल के कार्गो Ship-To-Ship Transfer और री-लेवलिंग के जरिए चीन पहुंचते हैं.
ट्रंप के अटैक प्लान से चीन की बौखलाहत का अंदाजा इससे भी लगाया जा सकता है कि ड्रैगन ने संयुक्त राष्ट्र में ईरान पर हमलों को गैर-कानूनी बताते हुए इसे तुरंत रोकने की मांग तक कर दी है. कुल मिलाकर खार्ग द्वीप ईरान के तेल क्षेत्रों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जोड़ता है और वहां आने वाली किसी भी रुकावट से सिर्फ चीन ही नहीं, बल्कि अन्य देशों पर भी असर पड़ सकता है.