कैबिनेट की बैठक में 6 बड़े फैसलों की दी गई मंजूरी, 39 हजार करोड़ रुपये के हुए एलान…
आज के बड़े फैसलों में एविएशन सेक्टर को राहत देने के लिए खास फंड से लेकर कई बड़े हाइवे प्रोजेक्ट के लिए मंजूरी शामिल है. जिनके लिए कुल मिलाकर 39 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का प्रावधान रखा गया है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट की बुधवार को हुई बैठक में 6 बड़े फैसलों को मंजूरी दी गई है. इन सभी एलानों में कुल मिलाकर 39 करोड़ रुपये से ज्यादा का प्रावधान रखा गया है. इसमें सबसे बड़ा फैसला एटीएफ को लेकर है. इस फैसले की मदद से पश्चिम एशिया संकट के एविएशन सेक्टर पर पड़ने वाले असर को कम किया जाएगा. इसके अलावा दिल्ली में पुराने ट्रक और बसों को चलन से बाहर करने और कई बड़े हाइवे प्रोजेक्ट को भी मंजूरी दी गई है.
क्या है एटीएफ पर फैसला
मंत्रिमंडल ने तेल मार्केटिंग कंपनियों को एकमुश्त बजटीय सहायता प्रदान करने को मंजूरी दी है. फैसले के अनुसार यह सहायता 10,000 करोड़ रुपये से अधिक नहीं होगी और इसका उद्देश्य शेड्यूल्ड भारतीय एयरलाइंस को उनके घरेलू एवं अंतरराष्ट्रीय ऑपरेशन के लिए एटीएफ की कीमतों को स्थिर रखने में मदद करना है.
यह बजटीय सहायता पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की अनुदान मांगों के माध्यम से ओएमसी को ब्याज-मुक्त अग्रिम राशि के रूप में दी जाएगी.
पश्चिम एशिया संकट के कारण ईंधन कीमतों में जारी असाधारण उतार-चढ़ाव के बीच एयरलाइंस के लिए एटीएफ की कीमतों को स्थिर बनाए रखने हेतु यह सहायता ओएमसी को उपलब्ध कराई जाएगी.
दिल्ली एनसीआर में पुरानी बसों और ट्रकों पर क्या है फैसला
इसके साथ ही केंद्रीय मंत्रिमंडल ने दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में वायु प्रदूषण कम करने और स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से दो-वर्षीय योजना को मंजूरी दी है. इस योजना का लक्ष्य दिल्ली एनसीआर में पुराने बस और ट्रक को नए मानकों के अनुसार बने वाहनों में बदलने के लिए प्रोत्साहन देना है. जिससे पर्यावरण के अनुकूल वाहनों की संख्या बढ़ाई जा सके और पुराने पड़ चुके ट्रकों और बसों को चलन से बाहर किया जा सके.
इस योजना के लिए रकम मिनिस्ट्री ऑफ हाउसिंग एंड अर्बन अफेयर्स के अंतर्गत राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र योजना बोर्ड (एनसीआरपीबी) द्वारा उपलब्ध कराई जाएगी और इसका क्रियान्वयन सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (एमओआरटीएच) और पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय (एमओपीएनजी) द्वारा किया जाएगा. योजना को दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश की सहभागी राज्य सरकारों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के सहयोग से लागू किया जाएगा।
9,585 करोड़ रुपये के कुल वित्तीय परिव्यय वाली इस योजना में केंद्र सरकार का योगदान 5,041 करोड़ रुपये होगा, जबकि सहभागी राज्यों द्वारा लगभग 1,601 करोड़ रुपये की कर रियायतें प्रदान की जाएंगी.
इस योजना का उद्देश्य दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में पंजीकृत उन ट्रकों और बसों के मालिकों को सपोर्ट देना है, जो बीएस-IV या उससे पहले के उत्सर्जन मानकों का पालन करते हैं, ताकि वे अपने वाहनों को बीएस-VI या उससे अधिक कड़े उत्सर्जन मानकों वाले वाहनों अथवा इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) से बदल सकें.
और कौन से फैसलों का किया गया एलान
इसके अलावा रामेश्व कोनार्क और पारादीप के बीच 8300 करोड़ की लागत से कोस्टल हाईवे, तेलंगाना में करीब 7600 करोड़ रुपये की लागत से हाईवे प्रोजेक्ट और मध्य प्रदेश में 4415 करोड़ रुपये की लागत से NH-347B को अपग्रेड किया जाना शामिल है.