महादेव एवं रेड्डी अन्ना का संचालन दुर्ग जिले से क्या बंद हो चुका..है..?
- संगठित ऑनलाइन अपराध जुआ सट्टा के मामले पकड़ने जाने पर थानेदार एवं पेट्रोलिंग पर कार्यवाही क्यों नहीं ..?
- सरकार एवं लोकल पुलिस का इंटेलीजेंस फेलवर
दुर्ग।दुर्ग जिले में इन दिनों महादेव आईडी रेड्डी अन्ना,एवं तमाम प्रकार के एप वाले सट्टे चालू है या बंद है.!इसे कह पाना छोटी बात होगी लेकिन संगठित सट्टे का कारोबार इन दिनों दुर्ग जिले में बड़े पैमाने पर अपना पैर पसार चुका है।
दुर्ग भिलाई के तमाम थानों में हाल फिलहाल ही जुआ सट्टा के इस कारोबार में बढ़ोत्तरी देखने को मिल रही है।
पुलिस अब तो संगठित ऑनलाइन सट्टा गिरोह के छोटे मछलियों को ही पकड़ पा रही है बड़ी मछलियों पर हाथ डालने में पुलिस की कोई भी रुचि दिखाई नहीं दे रही है।
मजेदार बात ये है अब तो दो माह के लिए आईपीएल शुरू हो चुका है।आईपीएल क्रिकेट के बुकी अब दाव लगाना शुरू कर दिए है। बड़ा सवाल ये है कि सुशासन की सरकार में डिप्टी सीएम,HM एवं प्रभारी मंत्री दुर्ग जिला विजय शर्मा के प्रभार वाले जिले दुर्ग में ऑनलाइन सट्टा हो या जुआं सट्टा प्रत्येक थाना क्षेत्र में बड़े पैमाने में चल रहा है।
सायं सरकार के द्वारा मंत्रालय में वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए कानून व्यवस्था को लेकर मीटिंग में आईजी एवं पुलिस अधीक्षकों को ये निर्देश था कि जुआ सट्टा शराब कबाड़ और अब तो अफीम जैसे मामलों में पुलिस शक्ति बरते थानेदारो को कार्यवाही का निर्देश दिया था,लेकिन दुर्ग जिले में लगातार अभी कुछ दिनों से जुआ सट्टा पर कार्यवाही हो रही है,लेकिन जिस थाना क्षेत्र में जुआं पकड़ा जा रहा है उस थाना प्रभारी पर पुलिस के बड़े अधिकारी थानेदार पर कार्यवाही नहीं कर पा रहे है क्या कोई राजनीतिक दबाव या प्रभाव है क्या ..?
यदि सटोरिए संगठित गिरोह बना कर इस जुआ सट्टे के करोबार को अंजाम दे रहे है। और उससे पर्याप्त आय से संपति को बना रहे है ये सब पुलिस में बैठे आला अफसर और थानेदार को क्यों नहीं दिख रहा सिर्फ छोटी मछलियां ही पकड़ कर पुलिस के अफसर ये कहकर अपना पल्ला झाड़ रहे है कि अभी हम जांच कर रहे है अभी हम टीम बाहर भेज रहे है कहकर अपना पल्ला झाड़ रहे है ।वही दुर्ग पुलिस ये भी दावा करती है कि हम आधुनिक तकनीक एवं सोशल मीडिया का सहारा लेकर जुआ सट्टा के आरोपियों को पकड़ने का दम भरती है ।
लेकिन आज के समय पर महादेव एप से जुड़े तमाम कारोबारी अलग अलग थाना क्षेत्रों रहने वाले सटोरिए बेखौफ होकर दुर्ग भिलाई में घूम रहे है पूर्व में लुकआउट नोटिस जारी किया था जिनके ऊपर कई थानों में मामला दर्ज है वो आज दुर्ग में बेखौफ होकर घूम रहे है क्या इन्हें राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है ..? या पुलिस के हाथ पांव इन्हें पकड़ने में फुल रहे है.?
कई ऐसे महादेव एप से जुड़े सटोरिए भी है जिनकी मामले की जांच केंद्रीय एजेंसी भी कर रही है और ये सटोरिए केंद्रीय एजेंसी के राजधानी कार्यालय में पूछताछ के लिए आना जाना करते रहे है।
चुकी अभी युद्ध के हालात चल रहे है तो आना जाना भी अभी प्रतिबंधित है इस वजह से भी ये महादेव एप के सटोरिए वापस विदेश नहीं जा पा रहे है ।।
तात्कालिक SP रहे डॉ अभिषेक पल्लव के समय महादेव एप के कई सटोरिए को पकड़ कर ला कर प्रेस ब्रीफिंक भी कराई जाती थी और इनके पासपोर्ट एवं बैंक अकाउंट के संबंध में भी पूछताछ की जाती थी,लेकिन डॉ पल्लव के हटने के बाद दुर्ग पुलिस सुस्त पड़ गई और महादेव से जुड़े किसी भी सटोरिए पर हाथ डालने से अब बचती नजर आ रही है।
तात्कालिक कई पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने महादेव एप से जुड़े तमाम सरगनाओं को छह माह में पकड़ के लाने का वादा किया था।लेकिन वो वादा भी फेल हो गया।
सुशासन की सरकार के ढाई साल बीत जाने के बाद भी आखिर कार महादेव एप जैसे जुड़े एप का चलन प्रचलन क्या बंद हो गया है या अभी भी चालू है .?
सूत्रों की जानकारी के मुताबिक कैंप क्षेत्र का एक बड़ा बुकी आज भिलाई से विदेश में रहकर एक बड़े सट्टा एप का पूरा संचालन देख रहा है लेकिन दुर्ग पुलिस को कानों कान खबर नहीं लगी।आज वो विदेश में बैठ कर भिलाई के युवाओं को इस बड़े रैकेट में शामिल कर रहा है।अब देखना ये है कि दुर्ग पुलिस इस बुकी को पकड़ पाएगी क्या .?
सफ़ेमा जैसे कानून सिर्फ छोटे अपराधियों पर ही लगेंगे क्या ? जबकि शहर में ऐसे तमाम अवैध कारोबारी है जिन्होने दो नंबर के पैसों को एक नंबर बनाया कुछ आज भी इस काम में सम्मिलित है और कुछ सफेदपोश बनकर आज भी इस शहर में खुल्ले आम घूम रहे है ।सरकार एवं लोकल पुलिस का इंटेलीजेंस कहा है?
ये बताना भी लाजमी है कि दुर्ग जिले के राजपत्रित अधिकारी एवं ACCCU (क्राइम ब्रांच)के लोगो को भी इनके बारे में पूरी जानकारी है उसके बाउजूद भी ईमानदार एसएसपी,आईजी लेवल के अधिकारियों की छवि को विभाग के लोग ही घूमिल करने में ही जुटे हुए है।