आम आदमी पार्टी के नेता जसप्रीत सिंह ने शिक्षा मंत्री को लिखा पत्र; निजी स्कूलों और शिक्षा विभाग की मिलीभगत की जांच की मांग…
भिलाई/रायपुर:दुर्ग जिले में निजी स्कूलों द्वारा शिक्षा के नाम पर की जा रही ‘अवैध वसूली’ और ‘सिंडिकेट’ के खिलाफ आम आदमी पार्टी के नेता जसप्रीत सिंह ने मोर्चा खोल दिया है। कलेक्टर को शिकायत सौंपने के बाद, अब उन्होंने सीधे माननीय शिक्षा मंत्री, छत्तीसगढ़ शासन को पत्र लिखकर इस पूरे नेक्सस की जांच करने और अभिभावकों को राहत दिलाने की मांग की है।
अभिभावकों की जेब पर डकैती: जसप्रीत सिंह
जसप्रीत सिंह ने अपने पत्र में उल्लेख किया कि भिलाई और दुर्ग के नामी स्कूल (डीपीएस, शंकरा सेक्टर-10, माइलस्टोन, निर्मला रानी खुर्सीपार, डीएवी, केपीएस नेहरू नगर आदि) एक सोची-समझी रणनीति के तहत अभिभावकों को आर्थिक रूप से प्रताड़ित कर रहे हैं। उन्होंने मुख्य रूप से निम्नलिखित मुद्दों को उठाया है:
पुस्तकों का एकाधिकार: स्कूल प्रबंधन और चुनिंदा बुक डिपो के बीच साठगांठ है, जिससे अभिभावकों को महंगे दामों पर एक ही दुकान से किट खरीदने के लिए मजबूर किया जाता है।
प्रकाशकों का खेल: हर साल जानबूझकर पब्लिशर बदल दिए जाते हैं ताकि पुरानी किताबों का उपयोग न हो सके और नया कमीशन सेट हो सके।
NCERT की अनदेखी: कम कीमत वाली सरकारी किताबों के बजाय भारी कमीशन वाली निजी पब्लिकेशन की किताबें थोपी जा रही हैं।
मनमाना बस किराया: परिवहन शुल्क में कोई पारदर्शिता नहीं है और अलग-अलग स्कूलों के किराए में जमीन-आसमान का अंतर है।
शिक्षा विभाग के अधिकारियों की भूमिका पर सवाल
जसप्रीत सिंह ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) कार्यालय की मौन स्वीकृति के बिना यह भ्रष्टाचार संभव नहीं है। उन्होंने शिक्षा मंत्री से मांग की है कि दुर्ग जिला शिक्षा अधिकारी की भूमिका की भी जांच की जाए कि कहीं वे इन स्कूलों के साथ मिले हुए तो नहीं हैं।
जांच समिति में शामिल होने की इच्छा
पत्र के अंत में जसप्रीत सिंह ने मांग की है कि:
स्कूलों को अपना सिलेबस 3 महीने पहले सार्वजनिक करने का आदेश दिया जाए।
कक्षा 1 से 8 तक एनसीईआरटी (NCERT) की किताबें अनिवार्य की जाएं।
भ्रष्ट स्कूलों और अधिकारियों पर दंडात्मक कार्रवाई हो।
जसप्रीत सिंह ने शिक्षा प्रणाली में सुधार के लिए बनाई जाने वाली किसी भी जांच समिति में स्वयं को शामिल करने का प्रस्ताव भी रखा है, ताकि जमीनी स्तर की अनियमितताओं को उजागर किया जा सके और शिक्षा को व्यापार बनने से रोका जा सके।