June 5, 2026

धर्म की आज़ादी पर हमला बर्दाश्त नहीं- “छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक, 2026” के खिलाफ मूल निवासी संघ का बड़ा ऐलान…

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भिलाई। मूल निवासी संघ ने शनिवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर “छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक, 2026” के खिलाफ खुलकर मोर्चा खोल दिया। संघ ने इस विधेयक को सीधे सीधे संविधान और मौलिक अधिकारों पर हमला बताते हुए राज्यपाल से इसे तत्काल खारिज करने की मांग की।

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान संघ के सदस्यों ने कहा कि यह विधेयक संविधान के अनुच्छेद 25 को कमजोर करने की साजिश है। धर्म मानने, अपनाने और प्रचार करने के अधिकार को अपराध की तरह पेश किया जा रहा है। संविधान की आत्मा के खिलाफ कानून संविधान की उद्देशिका में दी गई धार्मिक स्वतंत्रता को यह विधेयक कुचलने का प्रयास करता है। “प्रलोभन” की आड़ में समाज सेवा पर वार दान, शिक्षा, इलाज, मदद सबको “प्रलोभन” बताकर अपराध बनाने की तैयारी। अनाथालय, स्कूल, अस्पताल भी शक के घेरे में आ जाएंगे।

अस्पष्ट कानून = मनमानी कार्रवाई “बल”, “कपट”, “असम्यक प्रभाव” जैसे शब्द इतने अस्पष्ट हैं कि कोई भी फंस सकता है। झूठे केस, उत्पीड़न और डर का माहौल बनेगा। अल्पसंख्यकों को निशाना बनाने का आरोप संघ ने कहा- यह कानून खास समुदायों को टारगेट करने का हथियार बन सकता है। अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन UDHR और ICCPR जैसे वैश्विक मानवाधिकार मानकों की खुलेआम अनदेखी।

 

सुप्रीम कोर्ट में मामला लंबित जब पूरा मामला पहले से सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है, तो नया कानून लाना न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने जैसा है। 2006 का उदाहरण सरकार भूली पहले भी ऐसा संशोधन विधेयक रोका जा चुका है। फिर वही गलती दोहराई जा रही है। मूल निवासी संघ ने कहा – अगर इस विधेयक को अनुमति दी गई तो प्रदेशभर में उग्र आंदोलन होगा। सड़कों से लेकर अदालत तक लड़ाई लड़ी जाएगी। “धर्म की आज़ादी कोई सौदेबाज़ी नहीं है इसे छीनने की कोशिश हुई तो जवाब भी उतना ही कड़ा होगा।

 

मूल निवासी संघ

 

जय साहू जिला अध्यक्ष मूल निवासी संघ

अमरजीत पटेल प्रदेश अध्यक्ष मूल निवासी संघ

साझी जॉन महासचिव मूल निवासी संघ

एम जोनाथन अध्यक्ष यूसीसी जिला दुर्ग

सुभाष पाल महासचिव यूसीसी जिला दुर्ग