June 6, 2026

Mahdev Reddy अन्ना Satta एप के गुर्गे चला रह है लोकल आईडी, बाट रहे है युवाओं को हजारों में…

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  • थानों की पेट्रोलिंग एवं ACCCU के सिंघम जवानों का दावा हुआ फेल
  • एसएसपी अग्रवाल का दावा महादेव एप में पूरे ईमानदारी से दुर्ग पुलिस कर रही है काम

भिलाई।सुशासन की सरकार के सवा दो साल बीत जाने के बाद भी महादेव सट्टा,रेड्डी अन्ना एप जैसे अन्य ऑनलाइन जुआ सट्टा एप के आरोपियों को आज तक राज्य की पुलिस नाही खोज पाई नाही उन्हें पकड़ पाई।जबकि दुर्ग जिले के कई थानों में महादेव एप से जुड़े गुर्गों के खिलाफ अनेकों एफआईआर अलग अलग थानों में दर्ज है पुलिस की जांच एवं धरपकड़ की कार्यवाही संदेह के घेरे में है।पुलिस की सोशल मीडिया एवं आधुनिक तकनीक आरोपियों को पकड़ने के मामले में दम भरने वाली दुर्ग पुलिस का दावा महादेव एप एवं रेड्डी अन्ना एप में क्यों फेल हो जा रहा है।चुकी सारी चीजें अकाउंट एवं बैंक से रिलेटेड है, जिसे पकड़ना पुलिस के लिए बहुत ही आसान है। जैसे उदाहरण के तौर पर दुर्ग पुलिस की सब से जायदा रुचि क्रिप्टो करेंसी,म्यूअल अकाउंट,एवं शेयर मार्केट से जुड़े मामलों में पुलिस के राजपत्रित अधिकारी बेहद रुचि लेकर छोटी मछलियों को पकड़ के जेल की सलाखों के पीछे डाल रहे है लेकिन आज भी बड़ी मछलियां विदेशों एवं राज्यों में रहकर ऑनलाइन जुए सट्टे के काम को धड़ल्ले से अंजाम दे रहे है,लेकिन दुर्ग पुलिस को जैसे सांप सूंघ गया हो इन आरोपियों को पकड़ने में दुर्ग पुलिस की रुचि एवं दावा खोखला साबित हो रहा है।

 

आज भी जिन्होंने अपना अकाउंट लालच में दिया है ऐसे हजारों लोगों के पैसे आज भी कई बैंकों में पैसे होल्ड पड़े है। दुर्ग पुलिस खाता धारक ,बैंक मैनेजर ,बैंक कर्मियों के अलावा पैसा का ट्रांजेक्शन देश से हुआ या विदेश हुआ(लाखों हजारों रुपए ) का इसकी जांच भी क्यों नहीं करती..?

 

जहां एक और भारतीय जनता पार्टी अपना 47वाँ स्थापना दिवस बना रही है और सुशासन की बात करती है ये कैसा सुशासन है छत्तीसगढ़ राज्य की जनता को उनके ही पैसे भले ही वो गलत तरीको से बैंकों में होल्ड हो उस पर दुर्ग पुलिस एवं बैंक के अधिकारी कोई भी निर्णय ले नहीं पा रहे है कई वर्ष बीत जाने के बाद भी.!

 

डबल इंजन की सरकार में जो बैंक है वह सीधे उनकी मॉनिटरिंग दिल्ली से होती है और शिकंजा आरबीआई एवं तमाम फाइनेंशियल एजेंसियों का तमाम बैंक संचालित है, उन पर शिकंजा रहता है।

लेकिन बड़े दुर्भाग्य की बात है कि 2001 से लेकर आज तक इतने वर्ष बीत जाने के बाद भी जुआ सट्टा के करोबार में पुलिस सिर्फ छोटी मछलियों को पकड़ के अपनी पीठ थपथपा रही है लेकिन किसी भी बैंक कर्मी एवं मैनेजर पर कार्यवाही करने से क्यों डरती है दुर्ग पुलिस.?

 

यहां ये बताना लाजमी होगा कि तात्कालिक कांग्रेस की सरकार में महादेव सट्टा एप सुर्खियों में था उसी वजह से भारतीय जनता पार्टी के नेता काफी विरोध प्रकट करते थे। कांग्रेस सरकार में युवा पीढ़ी जुआ सट्टा में बर्बाद हो रही है, लेकिन सायं सरकार के सवा दो साल बीत जाने के बाद भी राज्य एवं दुर्ग पुलिस कार्यप्रणाली पर अब प्रश्न चिन्ह उठने लगे है।

 

इससे भी मजेदार बात ये है कि विदेश एवं अन्य राज्य में रहकर महादेव जैसे ऑनलाइन सट्टा एप के गुर्गे बेखौफ होकर दुर्ग भिलाई में घूम रहे है और धार्मिक आयोजनों एवं अन्य पार्टियों में डांस करते दिख रहे है, उनका ये वीडियो सोशल मीडिया सहित ऑनलाइन मीडिया में जमकर वायरल हो रहा है।

 

दुर्ग पुलिस की लोकल थानों की पेट्रोलिंग एवं ACCCU में तैनात सिंघम की तरह काम करने वाले जबाज सिपाहियों का जज्बा जुआ सट्टा (महादेव एप) मुख्य सरगनाओं को पकड़ने के अलावा बेखौफ घूम रहे इन गुर्गो को पकड़ने में फेल हो रहा है। यहां पर दुर्ग पुलिस का इंटेलीजेंस क्यों फेल है।

 

दुर्ग एसएसपी विजय अग्रवाल ने हाल ही में एक प्रमुख समाचार पत्र पर महादेव एप से जुड़े मामले में स्पष्ट तौर पर अपना बयान दिया है कि महादेव एप मामले में दुर्ग पुलिस पूरी ईमानदारी के साथ काम कर रही है।वास्तव में एसएसपी विजय अग्रवाल की दुर्ग पुलिसिंग बेहद कसावट वाली पुलिसिंग है उसकी चर्चा पूरे राज्य में हो भी रही है और गुंडे बदमाशों ने भी देखा जा रहा है।लेकिन थानों का स्टाफ एवं ACCCU के लोग अपने ही अधिकारी एवं पुलिस के वरिष्ठ अफसरों की छवि को कैसे बेदाग़ कर रहे है ये इसका जीता जागता प्रमाण है।

 

एक सिपाही जिसकी सैलरी 45 हजार है और आज के समय में दुर्ग एसएसपी विजय अग्रवाल छोटी सी भी वीडियो या शिकायत पर कड़ी सजा दे रहे है लेकिन बेखौफ खास कर ACCCU के सिंघम अवतार वाले जवान लक्जरी कार एवं महंगे मोबाइल (सैमसंग अल्ट्रा,आईफोन,फोल्ड फोन) जैसे महंगे उपकरण यूज कर रहे है साथ में हाथ और गले में मोटी चैन रखकर बड़े अधिकारियों के सामने शेखी झाड़ रहे है। उन्हें अपने किसी भी गलती का कोई भी डर भय नहीं है। पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों को चाहिए कि पेट्रोलिंग में चलने वाले एवं ACCCU के चलने वाले सिंघम जैसे जवानों के मोबाइल का CDR गोपनीय तरीके से जांच कराए कि इनका किन दो नंबरी लोगों से संबंध है जो इनका बड़ा फायनेंसर है..?

 

नया वित्तीय वर्ष चालू हो गया है हर साल पुलिस मुख्यालय एवं पुलिस विभाग हर वर्ष मार्च में आप के पास क्या संपति है विवरण फार्म भरवाती है तो क्या उसमें इनकी संपत्ति की जांच दुर्ग पुलिस में बैठे वरिष्ठ अधिकारी क्यों नहीं करते.?

 

लोकल आईडी का खेल शुरू

 

अब तो ये हालात है कि जुआ सट्टा के गुर्गे लोकल आईडी Betbhai.com जैसे (Online ID) लोकल स्तर पर हजारों रुपए लेकर धड़ल्ले से बाट रहे है। दुर्ग पुलिस को इसकी कोई भनक नहीं है मुखबिर तंत्र फेल है या छोटे गुर्गे ही लोगों को जान मुझ कर ACCCU के सिंघम जवान पकड़ रहे। बड़े गुर्गों को पकड़ने में दुर्ग पुलिस पीछे क्यों है क्या कोई राजनीतिक दबाव है क्या ..?

 

सायं सरकार में अफसर बेलगाम

 

सुशासन की सरकार में पुलिस महकमे के असफर इतने बेलगाम हो गए है कि वे सीधे मीडिया के लोगो को धमकाते हुए कहते फिर रहे है कि दुर्ग पुलिस की कार्यवाही से यदि आप संतुष्ट नहीं है तो आप को जो लिखना है छापना है दुर्ग पुलिस को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है ऐसे बेलगाम अफसर सुशासन की सायं सरकार में धज्जियां उड़ा रहे है इनकी आवश्यकता मैदानी इलाकों में नहीं इनकी पोस्टिंग पुलिस मुख्यालय में बैठे बड़े अफसरों को या तो बटालियन में या चंद्रखुरी ट्रेनिंग सेंटर में या फिर नहीं तो पुलिस मुख्यालय में बाबू गिरी करा के सेवा लेनी चाहिएं।

 

दुर्ग जिला HM विजय शर्मा के प्रभार वाला जिला है वहा पर दुर्ग पुलिस के अफसर बेलगाम स्वर में जनता मीडिया को कुछ भी नहीं समझ रही है।

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