डबल इंजन की सरकार में बैठे नौकरशाहों को टाउनशिप की सीवरेज एवं पेयजल पाइपलाइन बदलने का प्रस्ताव शासन को देना चाहिए…
- ये प्रस्ताव फाइलों तक ही सीमित ना रहे पायलट प्रोजेक्ट के रूप में इसे लें , जनप्रतिनिधि गोवा और पहलवानी के दंगल में व्यस्त और मस्त
भिलाई: डबल इंजन की सुशासन की सरकार में आम जनता सिर्फ और सिर्फ राजनीति की भेंट चढ़ती नजर आ रही है. चाहे पक्ष हो या विपक्ष उनके नेताओं को सिर्फ और सिर्फ डोम शेड, पेवर ब्लॉक एवं नाली निर्माण वह भी जिस जगह उपयोगिता नहीं है वहां पर निर्माण. ऐसे विकास कार्यों में जनप्रतिनिधियों की रुचि देखने लायक है. अभी हाल ही में बीएसपी टाउनशिप एरिया के सेक्टर 7 के सड़क 37 से 40 तक रहने वाले रहवासी परिवारों के बच्चे पीलिया की बीमारी से ग्रस्त व त्रस्त हैं और अस्पतालों में भर्ती है. डबल इंजन की सरकार के जनप्रतिनिधि पहलवानों के दंगल में मस्त व व्यस्त हैं और जनता पीलिया की बीमारी से त्रस्त है. यही जनता आने वाले चुनावी समर में होने वाले चुनाव के दंगल में इन्हें पटकनी देगी. चूंकि जनता डबल इंजन की सरकार के भारत सरकार के उपक्रम बीएसपी व एचएससीएल, के क्वार्टर में रहने को विवश है. वर्षों पुरानी पीने के पानी की पाइपलाइन सीवरेज के रास्ते से गुजर रही है, वह काफी सड़ चुकी है. किस जगह और कहां से साड़ी है किस जगह पर साड़ी है इसका जवाब देह नौकरशाह के पास कोई भी जवाब नहीं है. नगर निगम भिलाई के स्वास्थ्य प्रभारी व पार्षद लक्ष्मीपति राजू अपने स्वास्थ्य अमले के साथ पीलिया ग्रस्त क्षेत्र का दौरा किये, पानी का सैंपल लिए एवं जेसीबी बुलाकर साफ सफाई करवाई. लेकिन डबल इंजन की सरकार के बीएसपी के अफसर एवं भाजपा के कोई भी जनप्रतिनिधि ना तो पीलिया ग्रस्त क्षेत्र के लोगों से मिलने आए और ना ही उनकी समस्याओं के समाधान के लिए दौरा किया. बड़े ही दुर्भाग्य की बात है की डबल इंजन की सरकार का दम भरने वाली साय सरकार की नजर में जनता की मौत की कोई कीमत नहीं नजर आती है. अब तक पीलिया डायरिया या अन्य बीमारियां पटरी पार के क्षेत्र में देखते और सुनते थे लेकिन इस बार सेक्टर सात जो कि कांग्रेस पार्षद उमेश साहू का वार्ड है. पार्षद उमेश स्वास्थ्य विभाग प्रभारी लक्ष्मीपति राजू के कट्टर समर्थक हैं, दोनों ही पार्षदों ने अपने स्तर पर जनता की समस्या को देखा और सुना और उसका समाधान करने का प्रयास कर रहे हैं. लेकिन साय सरकार में बैठे नौकरशाह, जिला प्रशासन एवं बीएसपी के लोग अभी तक देखने और झांकने नहीं पहुंचे हैं. जो कि बड़े दुर्भाग्य की बात है. यहां पर यह भी बताना लाजिमी होगा कि इन आवासों के पास में एक बड़ा नाला भी बहता है, जिसकी कई वर्षों से साफ सफाई भी नहीं हुई है. इसकी सफाई जेसीबी से नहीं बल्कि चैन माउंटेन मशीन से होनी है. जिसका एक नाले की सफाई का खर्च ₹50000 आएगा, लेकिन डबल इंजन की सरकार में बैठे नौकरशाह जनप्रतिनिधियों के विकास कार्यों के प्रस्तावों पर अपनी हरी झंडी उन्हीं कार्यों को दिखाने में अधिक दिलचस्पी दिखाते हैं जिसमें ठेकेदार, जनप्रतिनिधि और अफसर की जेब गर्म हो. मूलभूत सुविधाएं एवं जन उपयोगी सुविधाओं से किसी भी जनप्रतिनिधि को कोई भी सरोकार नजर नहीं आता है. पीलिया की घटना सेक्टर 7 की ताजा उदाहरण आपके सामने है. कोई गोवा घूम रहा है तो कोई पहलवानी के दंगल में व्यस्त और मस्त है. डबल इंजन की सरकार के नौकरशाहों को चाहिए कि एक लाखों करोड़ों का बजट टाउनशिप के रहवासियों के लिए बनाएं और राज्य सरकार तथा केंद्र सरकार को भेजें और इसे पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लें ताकि यहां के पेयजल और सिवरेज लाइन को अलग-अलग करके नई पाइपलाइन बिछाई जाए. ताकि यहां की जनता को पीलिया डायरिया आज बीमारियों से निजात मिल सके.