“प्रकृति उत्सव” : कौशल विकास, उद्यमिता और प्रकृति संरक्षण का भव्य संगम…
- भिलाई महिला महाविद्यालय में छात्राओं ने रचा सफलता का नया अध्याय, दो दिनों में 22000 रुपये की उल्लेखनीय बिक्री
भिलाई। दिनांक 4 एवं 5 मई 2026 को भिलाई महिला महाविद्यालय में बी.ओ.एस.ई.सी.– फ्लोरीकल्चर एंड गार्डनिंग पाठ्यक्रम के अंतर्गत “प्रकृति उत्सव” का अत्यंत भव्य एवं आकर्षक आयोजन किया गया। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य नई शिक्षा नीति (एन.ई.पी.) के मूल भाव — कौशल विकास, आत्मनिर्भरता, उद्यमिता एवं व्यवहारिक शिक्षा — को छात्राओं के माध्यम से साकार करना था।
कार्यक्रम के प्रथम दिवस 4 मई को उत्सव का शुभारंभ गरिमामय उद्घाटन समारोह के साथ हुआ। भारतीय संस्कृति की “अतिथि देवो भवः” परंपरा का निर्वहन करते हुए सभी अतिथियों का स्वागत पौधों भेंट कर किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. एन.के. जैन, महाप्रबंधक, उद्यानिकी, टी.एस.डी. उपस्थित रहे। विशिष्ट अतिथि के रूप में श्री आर.के. शर्मा जी, अनुभाग अधिकारी, उद्यानिकी, एवं श्री ललित यादव जी, कनिष्ठ अभियंता, उद्यानिकी की गरिमामयी उपस्थिति ने कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई।
महाविद्यालय की प्राचार्या श्रीमती प्रतिभा छाया क्लॉडियस ने अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में छात्राओं को प्रकृति के महत्व, पर्यावरण संरक्षण तथा मानव द्वारा प्रकृति के अंधाधुंध दोहन से उत्पन्न समस्याओं के प्रति जागरूक किया। उन्होंने कहा कि आज के समय में प्रकृति संरक्षण केवल आवश्यकता नहीं बल्कि प्रत्येक व्यक्ति का नैतिक दायित्व है।
उप-प्राचार्या डॉ. आशा रानी दास ने छात्राओं की रचनात्मकता, आत्मविश्वास एवं मेहनत की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन छात्राओं को आत्मनिर्भर बनने की दिशा में प्रेरित करते हैं।
वनस्पति विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. प्रतीक्षा पाण्डेय ने अतिथियों का परिचय प्रस्तुत करते हुए कार्यक्रम के मूल उद्देश्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि “प्रकृति उत्सव” केवल एक प्रदर्शनी या विक्रय मेला नहीं, बल्कि छात्राओं के व्यक्तित्व विकास, उद्यमिता कौशल, रचनात्मक सोच एवं व्यवहारिक शिक्षा का जीवंत मंच है। उन्होंने छात्राओं को प्रकृति से जुड़ने, पर्यावरण संरक्षण को जीवनशैली का हिस्सा बनाने तथा आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में अपनी सहभागिता सुनिश्चित करने के लिए प्रेरित किया। डॉ. प्रतीक्षा पाण्डेय ने यह भी बताया कि नई शिक्षा नीति का उद्देश्य केवल सैद्धांतिक ज्ञान देना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को कौशल आधारित शिक्षा के माध्यम से जीवनोपयोगी दक्षताओं से जोड़ना है और “प्रकृति उत्सव” उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है। उन्होंने छात्राओं की महीनों की मेहनत, अनुशासन, टीमवर्क और सृजनात्मकता की विशेष प्रशंसा करते हुए कहा कि यह आयोजन छात्राओं के उज्ज्वल भविष्य की एक सशक्त शुरुआत है।
मुख्य अतिथि डॉ. एन.के. जैन ने “जू एजुकेशन एवं पर्यावरण के माध्यम से वन्यजीव संरक्षण” विषय पर अत्यंत ज्ञानवर्धक व्याख्यान दिया। उन्होंने प्रकृति संरक्षण, जैव विविधता एवं पर्यावरण संतुलन के महत्व को सरल एवं प्रभावशाली ढंग से समझाते हुए छात्राओं को प्रकृति के प्रति संवेदनशील बनने का संदेश दिया।
विशिष्ट अतिथि श्री आर.के. शर्मा जी ने छात्राओं के प्रयासों की प्रशंसा करते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन विद्यार्थियों में नेतृत्व क्षमता एवं उद्यमिता का विकास करते हैं। वहीं श्री ललित यादव जी ने छात्राओं के नवाचार, प्रस्तुतीकरण एवं पर्यावरण के प्रति जागरूकता की सराहना की।
NAAC समन्वयक डॉ. रूपम अजीत यादव ने कहा कि इस प्रकार के व्यवहारिक एवं कौशल आधारित आयोजन नई शिक्षा नीति के उद्देश्यों को वास्तविक रूप में साकार करते हैं। आई.क्यू.ए.सी. प्रभारी डॉ. भावना पाण्डेय ने छात्राओं की अथक मेहनत, समर्पण एवं अनुशासन की प्रशंसा की।
“प्रकृति उत्सव” में छात्राओं द्वारा 16 आकर्षक एवं सृजनात्मक स्टॉल लगाए गए, जिनमें विभिन्न प्रकार के पौधे, जैविक खाद, लिक्विड फर्टिलाइज़र, हस्तनिर्मित गमले, गार्डन डेकोरेशन सामग्री, पुष्पों से निर्मित धूप एवं अन्य पर्यावरण हितैषी उत्पादों का प्रदर्शन एवं विक्रय किया गया। प्रत्येक स्टॉल का प्रकृति से जुड़ा विशिष्ट नाम उसकी अलग पहचान बना रहा। लगभग एक माह से अधिक समय तक चली तैयारियों के बाद यह उत्सव अत्यंत भव्य एवं सफल रूप में संपन्न हुआ।
इस दो दिवसीय आयोजन का सफल संचालन एवं संपूर्ण संयोजन डॉ. दीप्ति चौहान द्वारा किया गया। उन्होंने छात्राओं के साथ निरंतर रहकर उनमें नई ऊर्जा, आत्मविश्वास एवं उद्यमिता की भावना का संचार किया। छात्राओं को उत्पाद निर्माण, प्रस्तुतीकरण, ग्राहक व्यवहार, विक्रय कौशल एवं लघु उद्यम संचालन जैसी महत्वपूर्ण व्यवहारिक जानकारियाँ भी प्रदान की गईं।
उत्सव के दौरान छात्राओं ने कुल 22,000 रुपये की उल्लेखनीय बिक्री कर अपनी प्रतिभा, परिश्रम एवं व्यवसायिक दक्षता का उत्कृष्ट परिचय दिया। छात्राओं का उत्साह, आत्मविश्वास एवं समर्पण पूरे आयोजन का मुख्य आकर्षण रहा।
समापन समारोह में डॉ. रूपम अजीत यादव, डॉ. प्रतिक्षा पाण्डेय एवं डॉ. भारती वर्मा द्वारा विभिन्न श्रेणियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली छात्राओं को सम्मानित किया गया।
“ब्लूम ऑफ द गार्डन” सम्मान सर्वाधिक बिक्री करने वाले स्टॉल क्रमांक 5 एवं 15 को प्रदान किया गया, जिनकी बिक्री 3000 रुपये से अधिक रही। इस उपलब्धि में अर्पिता, हिमांशी, गगन, मोनालिशा एवं युक्ता शामिल रहीं।
“सनफ्लावर ऑफ द डे” का खिताब सकारात्मक ऊर्जा एवं उत्साह के साथ कार्य करने वाली कीर्ति, लक्ष्मी, ट्विंकल एवं ज्योति को प्रदान किया गया। “फ्रीसिया ऑफ द डे” सम्मान श्रेष्ठ समन्वय के लिए सुनिधि, साक्षी, कनक एवं मेघा को मिला। “फाइनेस्ट ऑफ द फ्लोरा” का पुरस्कार सर्वाधिक आकर्षक स्टॉल हेतु पूजा, रोमिता, शुभद्रा एवं यशश्री को प्रदान किया गया।
हस्तनिर्मित सुंदर गमलों के लिए निक्की एवं प्रांजलि को “ब्लूम ऑफ हैंड बाजार” सम्मान दिया गया। वहीं अभिनव विपणन रणनीतियों के लिए राशि, अक्षता, पूजा, तेषुलता, पलक, मिताली, मीनाली, सुमन, सरिता एवं आंचल को “आइरिस ऑफ द गार्डन” सम्मान प्राप्त हुआ।
विविध उत्पादों की प्रस्तुति हेतु स्टॉल क्रमांक 9 एवं 4 को “द रेयर जेम ऑफ द गार्डन” से सम्मानित किया गया, जिसमें आर्या, महक, पूनम, हर्षिता, निकिता, नंदिनी, स्नेहा, दिव्या एवं पायल शामिल रहीं। अपने उत्पादों एवं बिक्री के प्रति विशेष समर्पण दिखाने वाले स्टॉल क्रमांक 1, 2, 13 एवं 14 को “सोल ऑफ द गार्डन” सम्मान प्रदान किया गया, जिनमें भाविका, परमेश्वरी, तृषा, तृप्ति, ईशा, कुमकुम, फाल्गुनी, जैस्मिन, पल्लवी, नुपुर, टिकेश्वरी एवं खुशी शामिल थीं।
सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन हेतु युक्ता, मोनालिशा एवं गगन को “गोल्डन ट्रॉवेल” सम्मान प्रदान किया गया। वहीं पूरे उत्सव में अपनी सकारात्मक ऊर्जा, नेतृत्व क्षमता एवं विशिष्ट पहचान बनाने वाली अक्षता को “वॉइस ऑफ द गार्डन” की उपाधि से सम्मानित किया गया।
इस आयोजन के माध्यम से छात्राओं ने स्वरोजगार, उद्यमिता, विपणन, टीमवर्क एवं प्रकृति संरक्षण जैसे विविध आयामों को व्यवहारिक रूप से सीखा। इस प्रकार भिलाई महिला महाविद्यालय में आयोजित बी.ओ.एस.ई.सी.– फ्लोरीकल्चर एंड गार्डनिंग पाठ्यक्रम ने नई शिक्षा नीति के उद्देश्यों को सार्थक दिशा प्रदान की।
अंत में डॉ. दीप्ति चौहान द्वारा धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया गया।


