July 1, 2026

भिलाई के बसाहट को बचाने बलिदान तक देने तैयार हूं- विधायक देवेन्द्र यादव

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  • बीएसपी प्रबंधन द्वारा अचानक लायसेंस, लीज व रिटेंशसनधारी को पैसा जमाकरने व मकान खाली करने नोटिस भेजने पर नाराज हुए एमएलए
  • भिलाई सत्याग्रह के 6 माह बीत जाने के बाद भी बीएसपी प्रबंधन जिला प्रशासन को नही दे रही रोड मैप

भिलाई ।  भिलाई नगर के युवा विधायक देवेन्द्र यादव ने आज अपने सेक्टर पांच स्थित कार्यालय में पत्रकारवार्ता में बताया कि आज से छ: माह पूर्व सिविक सेंटर में भिलाई की बसाहट को बचाने के लिए मेरे द्वारा सभी भिलाईवासियों को लेकर भिलाई सत्याग्रह आंदोलन किया गया था, जिसमें बीएसपी प्रबंधन नें हमारी बातों को सुना था और हमे आश्वासन दिया था कि जो कुछ भी होगा उसे हम जिला प्रशासन के माध्यम से आपको बतायेंगे लेकिन छ: माह बीत जाने के बाद भी बीएसपी प्रबंधन भिलाई की बसाहट को उजाड़ने के लिए केम्प, खुर्सीपार, रिसाली एवं टाउनशिप के लोगों को नोटिस थमा रहा है कि बकाया राशि जमा करें और घर खाली करें। जिन लोगों को बीएसपी प्रबंधन ने नोटिस दिये है,  ऐसे करीब 100 लोगों ने अपने नोटिस का बंच विधायक देवेन्द्र यादव को सौंपे। बीएसपी प्रबंधन अपना रोड मैप जिला प्रशासन को स्पष्ट करे कि ये बीएसपी प्रबंधन का रहवासियों को नोटिस लायसेंसधारी, रिटेशनधारी एवं लीजधारियों को क्यों थमाया जा रहा है। कांग्रेस की सरकार में हमने लीजधारियों की रजिस्ट्री भी कराई है लेकिन जबसे डबलइंजन की सरकार बनी है, उन्होंने इस रजिस्ट्री पर रोक लगा दी है ताकि जिनका रजिस्ट्री हो जायेगा उनको हम खाली नही करवा पायेंगे। बीएसपी प्रबंधन पूरे टाउनशिप को खाली कराना चाहती है, और  किसी बडे निजी कंपनी को सौंपना चाहती है। उन्होंने आगे कहा कि टाउनशिप की बसाहट को उजड़ने नही दूंगा चाहे बलिदान तक क्यों नही देना पड़े। इसके लिए मेरा संघर्ष भी तेज होगा और इस मामले को लेकर फिर आंदोलन शुरू करेेंगे। कल परसों से मैं प्रतिदिन उन सौ घरों में पहुंचूगा जिन घरो में बीएसपी प्रबंधन ने नोटिस थमाया है। उनसे एक समर्थन पत्र लूंगा कि भिलाई के बसाहट को बचाने में हम सबका साथ थे। उसके बाद फिर गांधीवादी तरीके से आंदोलन शुरू करूंगा और ये आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक  हमारी बातों को मानते हुए भिलाई की बसाहट को उजडने से बचा नही लेता।विधायक देवेन्द्र यादव ने पत्रकारों को आगे बताया कि भाजपा सरकार बीएसपी की जमीन को बड़े लोगों को लाभ दिलाने के लिए बेचना चाहती है। ये लड़ाई किसी एक परिवार या किसी एक व्यक्ति विशेष की नही है, बल्कि 10 हजार लोगों और उन परिवार के लोगों से जुडी हुई समस्या है जिन्होंने भिलाई को अपने खून पसीनों से सींचकर यहां तक ले आये है जिसके कारण आज भिलाई देश का सिरमौर बना है। देश के प्रथम प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरू ने इसकी नीव रखी थी कि यहां की संस्कृति सभ्यता की गूंज पूरे देश में हो और इसको मिनी इंडिया का रूप दिया जाये। इसके लिए काश्मीर से कन्याकुमारी तक के लोगों को यहां लाकर बसाकर मिनी इंडिया बनाकर आज भिलाई को देश का सिरमौर बना दिया।विधायक देवेन्द ने आगे कहा कि मेरी ये लड़ाई जारी रहेगी क्यूंकि मेरे आंदोलन को खत्म हुए करीब 6 माह बीत गये लेकिन बीएसपी प्रबंधन ध्यान नही दे रही है और कितनी कोशिश करने के बाद भी हमारे साथ बैठने को प्रबंधन तैयार नही हो रही है और अपनी मनमानी थोपने का काम कर रही है।इस अवसर पर लीज संघर्ष समिति के अध्यक्ष राजेन्द्र परगनिहा ने बताया कि बीएसपी मनमानी नही कर सकती। कांग्रेस की शासनकाल में सन 2002 में जब भूपेश बघेल राजस्व मंत्री थे उस समय एक बैठक जिला प्रशासन व राज्य शासन एवं बीएसपी प्रबंधन की हुई थी उसमें भी स्पष्ट आदेश था कि बीएसपी किसी को लीज में या किसी प्राईवेट कंपनी को जमीन नही दे सकती है, उसके पूर्व बीएसपी प्रबंधन को अपनी जमीन राज्य शासन को सौपना होगा। भिलाई इस्पात संयंत्र के निर्माण के समय राज्य शासन एवं यहां के किसानों ने बीएसपी को उसके हित व उत्पादन व कर्मचारियों के हित को देखते हुए आलू के भाव बीएसपी प्रबंधन को जमीन दी थी जिसे बीएसपी प्रबंधन उसे मंहगे दामों में प्राईवेट लोगों को देने के लिए ये काम कर रही है।पत्रकारवार्ता में उपस्थित लोगों में भिलाई लीज संघषर््ा समिति के राजेन्द्र परगनिहा, कांग्रेस नेता हरीश सिंह, सुमीत पवार, आदित्य सिंह, अफरोज खान सहित बडी संख्या में लीजधारी, लायसेंसधारी व रिटेशनधारी उपस्थित थे।बॉक्स मेंविधायक देवेन्द्र ने सांसद बघेल और पूर्व मंत्री पाण्डेय की प्रशंसा कीकहा उनके पार्टी में इन दोनो नेताओं की बातों व मांगों को नही दी जा रही है तवज्जोयुवा विधायक देवेन्द्र यादव ने भाजपा के वरिष्ठ नेता सांसद विजय बघेल एवं पूर्व मंत्री प्रेमप्रकाश पाण्डेय की इस मामले में प्रशंसा करते हुए कहा कि ऐसा नही है कि यहां के रहवासियों के मामले मे ये दोनो नेता ध्यान नही दे रहे है, बल्कि वे इस मामले में पूरा ध्यान देते हुए इसके लिए अच्छी पहल भी कर रहे है, लेकिन डबल इंजन की सरकार में बैठे हुए राज्य व केन्द्र सरकार के केबिनेट मंत्री इनकी बातों को तवज्जो नही देते। बल्कि उनकी पाटी की नीति में ये नही है, इसलिए इन दोनो नेताओं को सफलता नही मिल पा रही है। क्योंकि भाजपा पार्टी की नीति है हर चीज को प्राईवेटेशन करने की। जबकि कांग्रेस की नीति है लोगों को बसाने और बचाने तथा सबको साथ लेकर चलने की।

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