- 3.99 करोड़ के पेवर ब्लॉक निविदा पर जनता मांग रही है जवाब – महेश
- महापौर नीरज पाल से पूछे सीधे 10 सवाल
भिलाई।नगर पालिका निगम भिलाई के बहुचर्चित पेवर ब्लॉक घोटाले में आज भाजपा नेता व डोंगरगढ़ के पूर्व विधायक रामजी भारती, भाजपा जिला अध्यक्ष पुरुषोत्तम देवांगन, नेता प्रतिपक्ष भोजराज सिन्हा,पार्षद महेश वर्मा ,संतोष मौर्या,संजय सिंह,पूर्व सभापति श्याम सुन्दर राव,सुषमा जेठानी,मनीष अग्रवाल,कन्हैया सोनी,के धनराजू,राजकुमार जायसवाल,मुकेश अग्रवाल ने आयोजित प्रेसवार्ता में संयुक्त रूप से पेवर ब्लॉक में हुए घोटाले की जांच रिपोर्ट पर एक ओर स्वागत योग्य बताया है लेकिन अब भी कई महत्वपूर्ण सवाल अनुत्तरित है। जांच हुई है तो जनता के पैसे का एक एक रुपए का हिसाब सामने आना चाहिए।इस तरह के भ्रष्टाचार के मामलों की सही जांच नहीं होगी तो हम कोर्ट का दरवाजा हम खटखटाएंगे।
भाजपा के नेताओं ने महापौर नीरज पाल को दी खुली चुनौती और कहा कि महापौर सिर्फ राजनीतिक लाभ के लिए है जनता के हितों के लिए काम नहीं करते है। 3 करोड़ 99 लाख की जो निविदा हुई है वो गलत है।पिछले डेढ़ सालों से हम पेवर ब्लॉक के करोड़ो के भृष्टाचार की जांच की माग कर रहे है। व्यवस्था परिवर्तन होना चाहिए ।लोगो को शुद्ध पेयजल जनता को मुहैया नहीं करा पा रही है।
22 करोड़ से अधिक के पेवर ब्लॉक टाउनशिप (बीएसपी) एरिया में लगे है।
नगर निगम के परियोजना शाखा का कोई औचित् नहीं है।
ठेका एजेंसी या ठेकेदार कार्य की गुणवत्ता पे गलत कार्य होने पर ही दोषी हो सकता है। MB बुक की मॉनिटरिंग इंजीनियर को करना रहता है।पेवर ब्लॉक गार्डनों में या दलदली जगहों में लगता है ऐसा भाजपा नेताओं का कहना है।चार वर्षों में 50 करोड़ से जायदा के पेवर ब्लॉक लग चुके है।हम जनता की आवाज उठाते रहेंगे।शहर सरकार (महापौर) से पार्षद महेश वर्मा ने 10 सवाल का जवाब माँगा है । यदि महापौर जनता का हित सोचते है तो जवाब दे। 3 करोड़ से अधिक पेवर ब्लॉक का सच समाने आना चाहिए ।
महेश वर्मा के 10 सवाल
सवाल नंबर 1 — पेवर ब्लॉक कार्य की आवश्यकता किसने बताई?
लगभग ₹3.99 करोड़ रुपये के इस पेवर ब्लॉक कार्य की आवश्यकता आखिर किसने बताई? मूल नस्ती में स्पष्ट मांग पत्र क्यों नहीं है, जिससे पता चले कि किसी जनप्रतिनिधि ने इस कार्य की मांग की थी? बिना मांग के इतना बड़ा काम प्रस्तावित कैसे हुआ?
सवाल नंबर 2 — तकनीकी स्वीकृति के बाद सामान्य सभा की प्रक्रिया क्यों?
जब तकनीकी स्वीकृति 4 अगस्त 2023 को मिल चुकी थी, तो सामान्य सभा की प्रक्रिया को लेकर सवाल क्यों उठे? आचार संहिता लगने से लगभग दो महीने पहले तकनीकी स्वीकृति हो चुकी थी, फिर बाद की प्रक्रिया में आचार संहिता का हवाला देकर सामान्य सभा की प्रक्रिया से अलग रास्ता क्यों अपनाया गया?
सवाल नंबर 3 — 10 ठेकेदारों ने भाग लिया तो 6 बाहर क्यों हुए?
निविदा में 10 ठेकेदारों ने भाग लिया, लेकिन 6 ठेकेदारों को बाहर क्यों किया गया? इन 6 ठेकेदारों को किस नियम के तहत बाहर किया गया और क्या सभी को समान अवसर दिया गया था?
सवाल नंबर 4 — बीड क्षमता प्रमाण पत्र की शर्त किसके लिए थी?
बीड क्षमता प्रमाण पत्र का नियम किसके लिए था? यदि यह प्रमाण पत्र अनिवार्य था और कुछ ठेकेदारों के पास उपलब्ध नहीं था, तो उनकी निविदा क्यों खोली गई? क्या नियमों में ठेकेदार के हिसाब से बदलाव किए गए?
सवाल नंबर 5 — 50 प्रतिशत समान कार्य के अनुभव की शर्त क्यों?
लगभग 50 प्रतिशत समान कार्य के अनुभव की शर्त क्यों रखी गई? यदि अनुभव प्रमाण पत्र अनिवार्य था तो इस शर्त की पूर्ति किए बिना निविदा आगे कैसे बढ़ी? क्या नियम निविदा में लिखने के लिए थे या लागू करने के लिए?
सवाल नंबर 6 — 4 अगस्त 2023 को टेंडर लगाने की अनुमति किसने दी?
4 अगस्त 2023 को टेंडर लगाने की अनुमति किसने दी? मूल नस्ती के पृष्ठ क्रमांक 2 में इसका उल्लेख है। यदि महापौर परिषद की कोई भूमिका नहीं थी, तो नस्ती में महापौर परिषद की अनुमति का उल्लेख क्यों है?
सवाल नंबर 7 — कार्यादेश की अनुमति किसने दी?
3 अक्टूबर 2023 को कार्यादेश की अनुमति किसने दी? मूल नस्ती के पृष्ठ क्रमांक 8 में महापौर परिषद द्वारा कार्यादेश की अनुमति दिए जाने का उल्लेख है। यदि फाइल महापौर परिषद के सामने आई और अनुमति दी गई, तो आज इसकी जिम्मेदारी से दूरी क्यों?
सवाल नंबर 8 — इतनी जल्दबाजी क्यों?
निविदा की शुरुआत से ही कई प्रक्रियात्मक सवाल सामने आ रहे थे। इसके बावजूद नियमों की दोबारा जांच क्यों नहीं कराई गई? लगभग ₹4 करोड़ के काम में पारदर्शिता से ज्यादा जरूरी क्या था कि कार्यादेश जारी करने में इतनी जल्दबाजी की गई?
सवाल नंबर 9 — क्या सभी ठेकेदारों के लिए नियम समान थे?
क्या नगर निगम में नियम सभी के लिए समान हैं या ठेकेदार देखकर नियम बदलते हैं? एक ठेकेदार से बीड क्षमता प्रमाण पत्र मांगा जाए, दूसरे मामले में अनुभव की शर्त रखी जाए और कहीं दूसरी शर्तों पर सवाल खड़े हों—तो पारदर्शी निविदा प्रक्रिया कहां है?
सवाल नंबर 10 — स्वतंत्र तकनीकी जांच क्यों नहीं?
महापौर जी, यदि आपको पूरा विश्वास है कि यह निविदा 100 प्रतिशत नियमसम्मत है, तो इसकी स्वतंत्र तकनीकी जांच क्यों नहीं करा देते? मांग पत्र से लेकर निविदा, तकनीकी स्वीकृति, वित्तीय प्रक्रिया, पात्रता शर्तें, निविदाकारों की छंटनी, बीड क्षमता प्रमाण पत्र, अनुभव प्रमाण पत्र, महापौर परिषद की अनुमति और कार्यादेश तक पूरी प्रक्रिया की जांच कराई जाए।
“फाइल पुरानी हो सकती है, सवाल आज भी जिंदा हैं”
महेश वर्मा ने कहा कि यह राजनीति का सवाल नहीं, जनता के पैसे का सवाल है। उन्होंने कहा कि अधिकारी बदल सकते हैं, लेकिन दस्तावेज नहीं बदलते। जिम्मेदारी किसी भी समय की हो, जनता के पैसे का हिसाब देना ही पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि वे किसी व्यक्ति के खिलाफ नहीं, बल्कि व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही के लिए सवाल उठा रहे हैं। उनकी मांग है कि पूरी निविदा प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच कराकर रिपोर्ट जनता के सामने रखी जाए।
महेश वर्मा का कहना है—“जनता जवाब चाहती है, दस्तावेज सवाल पूछ रहे हैं। अब जवाब से बचने का समय नहीं है।”



