सुकमा राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण बिलासपुर एवं अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण दन्तेवाड़ा विजय कुमार होता के निर्देश पर दिनांक 14.12.2024 को व्यवहार न्यायालय प्रांगण सुकमा में नेशनल लोक अदालत का आयोजन किया गया।
अनवर हुसैन सुकमा
लोक अदालत में पूर्व से लंबित 02 दाण्डिक प्रकरण को आपसी सुलह के आधार पर निराकृत किया गया। उक्त दोनों प्रकरणों का संक्षिप्त विवरण इस प्रकार है कि दिनांक 21.04.2018 को प्रार्थी भीमाराम कवासी तथा परिवार के अन्य सदस्य द्वारा ग्राम जीरमपाल में आम का त्यौहार मना रहे थे। उसी दौरान आरोपी नागुल नागेश अपने साथियों के साथ प्रार्थी को माँ-बहन की अश्लील गालियां देते हुए उसके साथ मारपीट करने लगे। बीच-बचाव करने आये अन्य लोगों को भी अभियुक्त नागुल नागेश एवं उनके साथियों ने मारपीट की घटना को कारित किया। इसी तरह प्रार्थी पोड़ियामी हिड़मा के रिपोर्ट आरोपी भीमा कवासी एवं अन्य के विरूद्ध भी सामानांतर अपराध आरक्षी केन्द्र गादीरास में दर्ज किया गया था, जो विचारण हेतु दिनाँक 27.01.2021 मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, सुकमा के अदालत में पेश किया गया। दोनों ही प्रकरण में पुलिस द्वारा धारा 147, 148, 149, 294, 323, 341, 506 भाग दो भारतीय दंड संहिता 1860 का अपराध पंजीबद्ध किया गया था। दोनों ही पक्षों के खिलाफ न्यायालय द्वारा आरोप विरचित कर प्रकरण में साक्षियों के कथन लेखबद्ध किये गये। उक्त दोनों प्रकरण में कुल 14 आरोपी अभियोजित किये गये थे। पीठासीन अधिकारी गितेश कुमार कौशिक के द्वारा दोनों पक्ष के मध्य सुलह का प्रस्ताव रखा गया। जिस पर दोनों पक्ष के अभियुक्तगण ने पीठासीन अधिकारी को अवगत कराया कि पूर्व में लगभग 20 वर्षों से दोनों पक्षों के मध्य मन-मुटाव एवं विवाद की स्थिति निर्मित है। इसके पूर्व भी उनके मध्य कई आपराधिक प्रकरण पंजीबद्ध हो चुके है और कुछ प्रकरणों में उन्हें जेल भी जाना पड़ा था। पीठासीन अधिकारी के समझाईश पर दोनों पक्षो में गाँव में बैठक का आयोजन कर राजीनामा का प्रस्ताव रखा गया। जिस पर दोनों पक्ष राजीनामा हेतु तैयार हो गये और राजीनामा की कार्यवाही सम्पन्न करने हेतु दोनों पक्ष आज नेशनल लोक अदालत के समक्ष उपस्थित हुए। पीठासीन अधिकारी द्वारा दोनों पक्षों को राजीनामा का बयान लेखबद्ध कर भविष्य में पुनः विवाद न करने की समझाईश देते हुए राजीनामा के आधार पर दोनों पक्षों के आरोपियों को दोषमुक्त घोषित किया गया। इसी तरह छिन्दगढ़ के निवासी नवल किशोर नेगी एवं उसके सहोदर भाई आसमन नेगी के मध्य पैतृक भूमि को लेकर विवाद की स्थिति निर्मित होने से इस न्यायालय के समक्ष व्यवहार वाद प्रस्तुत किया गया था। पीठासीन अधिकारी के समझाईश पर दोनों भाई वर्षों पुरानी दुश्मनी को भुलाते हुए राजीनामा हेतु सहर्ष तैयार हो गये और राजीनामा के आधार पर दोनों को ही अपने-अपने हक की पैतृक सम्पत्ति प्राप्त हो गयी, और दोनों सग्गे भाईयों के मध्य वर्षों से चल रहा विवाद आज नेशनल लोक अदालत में हमेशा-हमेशा के लिए समाप्त हो गया।
दोनों पक्षों ने पीठासीन अधिकारी के सामने खुशी जाहिर करते हुए सभी मन-मुटाव समाप्त करते हुए एक-दूसरे को गले लगाते हुए हाथ मिलाते हुए खुशी-खुशी अपने घरों की ओर रवाना हुए। इस तरह राजीनामा के आधार पर न कोई जीता न कोई हारा, के आधार पर 20 वर्षों से दोनों पक्षों के मध्य विवाद पूरी तरह समाप्त हुआ। नेशनल लोक अदालत में समरी प्रकरण-969, प्री-लिटिगेशन-18, चेक अनादरण-02, व्यवहार वाद-01, भारतीय दण्ड संहिता एवं भारतीय न्याय संहिता 24 कुल 1014 मामलों का निराकरण किया गया। इस दौरान उत्कर्ष भारती अभियोजन अधिकारी सहित खण्डपीठ के सदस्य के रूप में कैलाश जैन, राजेन्द्र मड़कम अधिवक्ता तथा मुन्नाराम नायक अधिवक्ता एवं न्यायालय के समस्त कर्मचारी उपस्थित रहे।