April 4, 2025

आपके जैसे नीचे बैठकर कुर्सी में सभा का कार्यक्रम देखता था मंच पर बैठने का सौभाग्य देने वाले आप हों

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समाज की जड़ों को सींच सींच कर इतना मजबूत कर दिए आने वाली पीढ़ी के लिए हरा भरा कर दिया विजय बघेल

छत्तीसगढ़ मनवा कुर्मी क्षत्रिय समाज धरसीवां राज 8 वा राज अधिवेशन समारोह स्व श्री छबी राम वर्मा ,स्व श्री मती भगवती वर्मा स्मृति में ,सांकरा निको में कार्यक्रम आयोजित किया गया मुख्य अतिथि विजय बघेल सांसद दुर्ग लोकसभा प्रदेश अध्यक्ष छ ग मनवा कुर्मी क्षत्रिय समाज, , केन्द्रीय अध्यक्ष कोनक राम कश्यप धर्मेंद्र वर्मा राज्य मंत्री, अवधेश वर्मा, ,मनराखन लाल वर्मा, राजेश वर्मा, यशवंत वर्मा,आयोजक नीलमणि नीलमणि प्रागनिया समाज के उत्कृष्ट कार्य करने वाले छात्र छात्राओं को पुरस्कृत किया गया सांसद विजय बघेल जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि प्रदेश का बंटवारा नहीं हुआ था तब से मैं आता रहा हूं राजनीति क्षेत्र में हो या सामाजिक क्षेत्र में छोटे से स्तर से मुझे समाज का काम करते हुए ये जानने समझने मिला बात करने का सलीका मिला कैसे समाज से इतना लाभ मिलता है कोई कहते हैं कि समाज से क्या मिलता है कई लोग ऐसे भी रहते हैं कि समाज को दुत्कारते है कुछ भी बोलते हैं समाज को पीटु गुलाम समझते लेकिन समाज का जो भाव प्रेम है जो अच्छा करते वे अच्छा पाते और जो बुरा करते वे बुरा पाते सबको अपनें अपने कर्मो का लेखा-जोखा यही मिलता है और यही पर पाता है अपनी ग़लती को न देख दुसरो पर गलती निकालते हैं ये प्रथा बन गई है कई लोगों का ऐसा भाव बन गया है लेकिन आप अगर समाज देखे हमारा समाज सौ साल पहले बनाया गया जब सौ साल पहले राष्ट्रीय समाज बन गया ये कल्पना से बाहर है समाज को कैसे जोड़ें समाज की जड़ों को सींच सींच कर इतना मजबूत कर दिए आने वाली पीढ़ी के लिए हरा भरा कर दिए समय बदलता है जिम्मेदारी बदलती है लेकिन उद्देश्य एक ही रहता है हमारे पुरखों ने नींव बनाकर दिए है वो कैसे मजबूत हो समाज के भाव को सैयोजीत कर के हर वर्ग के लिए छोटे से छोटे बड़े से बड़े वर्ग के लिए सम्मान करते हुए समाज आगे बढ़े ये भाव हमारे अन्दर रहता है आज इस रूप में खड़ा करें है मैं आपके जैसे नीचे बैठकर कर कुर्सी में सभा का कार्यक्रम देखता था ये सौभाग्य देने वाले आप हों जो आपके द्वारा आपके चुने हुए ये मंच पर बैठने का सौभाग्य मुझे आप ने दिए आप के मान सम्मान का हमारा कर्तव्य है हमारे पुरखों का आदर्श धार्मिक सेवा जनसेवा का सब का अलग-अलग मान को नतमस्तक हो कर सम्मान है इनकी सेवा के हम नतमस्तक हो कर समाज के शुरुआत करते हमें ये आशिर्वाद दे