कविता के माध्यम से प्रखर राष्ट्र चिंतक पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ जी को विकास जायसवाल का राष्ट्रवादी सम्मान…
दुर्ग, छत्तीसगढ़ : भारत विकास परिषद् द्वारा आयोजित एक गरिमामयी कार्यक्रम में प्रखर राष्ट्रवादी चिंतक और वक्ता श्री पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ जी का आगमन दुर्ग नगर में हुआ। दुर्ग के एक निजी होटल में उनका प्रवास रहा, जहाँ देशप्रेम, वैचारिक स्पष्टता और हिन्दू संस्कृति पर उनके ओजस्वी विचारों को सुनने बड़ी संख्या में नागरिक एवं सामाजिक कार्यकर्ता एकत्र हुए।
इसी अवसर
पर भिलाई शहर के युवा समाजसेवी और राष्ट्रनिष्ठ साहित्यप्रेमी विकास जायसवाल ने पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ जी के ऊपर अपनी रचित राष्ट्रवादी कविता को सुंदर फ्रेम में भेंट कर एक विशेष सम्मान अर्पित की। यह कविता पुष्पेंद्र जी के राष्ट्रवाद, निर्भीक वक्तव्य शैली और वैचारिक साहस को समर्पित थी।
“नहीं वो नेता, न किसी दल का अंग,
वो स्वयं में है एक और हम सब उनके संग।
हिन्दू की हुंकार, भारत की पुकार,
पुष्पेंद्रजी की वाणी है धर्म का विचार!”
विकास जायसवाल ने कविता की कुछ पंक्तियाँ सस्वर पढ़कर सुनाईं, जिनमें राष्ट्रप्रेम, विचारशीलता और जनजागरण का स्वर मुखर था। उनकी प्रस्तुति से भावविभोर हुए श्री पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ जी ने स्वयं कविता की भूरी-भूरी प्रशंसा की।
कार्यक्रम समिति और उपस्थित समाजजनों ने भी विकास जायसवाल की इस रचना को भारतमाता के प्रति समर्पण की सजीव अभिव्यक्ति बताया।
इस अवसर पर विकास जायसवाल के साथ पिंटू जाल, अभिजीत पारख, रूपल गुप्ता, निरंकार सिंह, चमन वर्मा सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।