आयुष्मान योजना के स्वास्थ्य कर्मियों को तीन माह से नहीं मिला वेतन, आर्थिक संकट से जूझते हुए लेबर कोर्ट की शरण में पहुंचे कर्मचारी…
मुंगेली— आयुष्मान भारत – प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत मुंगेली जिले के सरकारी और सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में कार्यरत स्वास्थ्य कर्मी इन दिनों गहरे आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। फरवरी 2025 से लेकर अप्रैल 2025 तक का वेतन न मिलने से नाराज इन कर्मियों ने अब लेबर कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। कर्मचारियों का आरोप है कि योजना संचालन के लिए नियुक्त टीपीए संस्था एफएचपीएल (FHPL) द्वारा वेतन भुगतान में लापरवाही बरती जा रही है, जिससे परिवार चलाना भी मुश्किल हो गया है।
इस समस्या को लेकर जिले के समस्त आयुष्मान ऑपरेटरों ने कलेक्टर कुन्दन कुमार को ज्ञापन सौंपा, जिसमें अपनी पीड़ा और वेतन न मिलने की व्यथा विस्तार से बताई। उन्होंने बताया कि बीते तीन माह से वेतन नहीं मिला है, जबकि उनकी सेवा अवधि 30 अप्रैल 2025 तक स्वीकृत है। इस लापरवाही के कारण कर्मचारी बच्चों की पढ़ाई, घर के खर्च, राशन जैसी बुनियादी आवश्यकताओं को पूरा करने में असमर्थ हैं।
ज्ञापन में यह भी बताया गया कि वेतन को लेकर कई बार FHPL एजेंसी और उच्च अधिकारियों से संपर्क किया गया, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन ही मिला। हालात यह हैं कि अब इन कर्मियों को अपनी बात न्यायालय तक ले जानी पड़ी है। कर्मचारियों ने प्रशासन को चेताया है कि यदि तत्काल वेतन भुगतान नहीं किया गया, तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
स्वास्थ्य कर्मी हर्ष पटेल, अश्विनी निर्मलकर,हरिश कौशिक, हरिचंद पटेल, महेंद्र कौशिक, निकिता जायसवाल,त्रिवेंद्र राजपूत, उग्रसेन खाण्डे, आशीष शर्मा और क्लेम आडिटर ऋषभ तिवारी ने बताया कि सभी कर्मचारी पूरी निष्ठा और ईमानदारी से सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद तीन माह से वेतन न मिलना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने जिला प्रशासन से अपील की है कि FHPL को निर्देशित कर जल्द से जल्द बकाया वेतन का भुगतान कराया जाए।
स्थिति को लेकर कर्मचारियों में खासा आक्रोश है। उनका कहना है कि जब सरकार की योजनाओं में लगे कर्मचारियों को ही समय पर वेतन नहीं मिलेगा, तो योजना की साख और विश्वसनीयता पर सवाल उठना लाज़िमी है। उन्होंने प्रशासन से संवेदनशीलता और तत्परता दिखाते हुए तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है, ताकि वे आर्थिक और मानसिक तनाव से राहत पा सकें।