March 7, 2026

हरिद्वार में गंगा नदी उफान पर, खतरे के निशान के करीब पहुंचा जलस्तर, अर्लट जारी…

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पर्वतीय क्षेत्रों में लगातार हो रही बारिश के चलते हरिद्वार में गंगा नदी का जलस्तर बढ़ गया है. शुक्रवार सुबह गंगा का जलस्तर चेतावनी निशान तक पहुंच गया. इस देखते हुए उत्तर प्रदेश के गंगा तटवर्ती जनपदों को अलर्ट जारी कर दिया गया है. हरिद्वार के प्रशासन ने गंगा किनारे रहने वाले लोगों को सावधान रहने को कहा है. साथ ही किसी भी आपदा की स्थिति से निपटने के लिए एनडीआरएफ तथा एसडीआरएफ को सतर्क कर दिया गया है. सभी बाढ़ चौकिया को भी सूचित कर दिया गया है.

पहाड़ों पर लगातार वर्षा हो रही है। यही वजह है कि बिजनौर बैराज से लगातार पानी छोड़ने का क्रम जारी है। मंगलवार को फिर तिगरी गंगा के जलस्तर में 10 सेमी की बढ़ोतरी हुई है। सोमवार को गंगा का जलस्तर 199.70 मीटर पर था जो, अब 199.80 मीटर पर आ गया है। बिजनौर बैराज से 66 हजार क्यूसेक पानी डिस्चार्ज किया गया है। उधर, गंगा का जलस्तर बढ़ने से अंतिम संस्कार करने में भी परेशानी हो रही है।

दरअसल, गंगा का जलस्तर बढ़ने से न सिर्फ तिगरी में परेशानियां बढ़ रही हैं बल्कि गंगा किनारे पर बसे गांव मंदिर वाली भुड्डी, शीशो वाली, दारानगर, अलीनगर, चकनवाला ऐतवाली, सुल्तानपुर, ओसिता जगदेपुर, कांकाठेर, तिगरी, रसूलपुर भंवर, रसूलपुर एहतमाली, देवीपुर उर्फ मोहसनपुर, पपसरी खादर, मुकरामपुर, शाहजहांपुर छात, रमपुर खादर, चांदरा फॉर्म, रानी बसतौरा, बिसाबली, कुई वाली, देव वाली, पट्टी खादर, झुंडपुरा व हसनपुर तहसील के गांव सिरसा गुर्जर की मढैया, सतैडा की मढैया, गंगानगर, पौरारा, दियावली आदि गांव के लोग भी परेशान हैं।

बिजनौर बैराज से पानी छोड़ने का क्रम जारी

दारानगर के सामने पैंटून पुल हटने पर नाव से जिंदगी चल रही हैं। ओसिता जगदेपुर के जंगली क्षेत्र पूरी तरह से जलमग्न है। बाढ़ खंड विभाग के जेई सुभाष कुमार ने बताया कि बिजनौर बैराज से लगातार पानी इसलिए छोड़ा जा रहा है। क्योंकि पहाड़ों पर वर्षा हो रही है।

चारा लेने के लिए बाढ़ के पानी से गुजर रहे लोग

बाढ़ का पानी गंगा खादर क्षेत्र के तटबंध से सटे जंगल में भर रहा है। जंगल क्षेत्र में मौजूद ग्रामों के आसपास पानी तैर रहा है। हालांकि इन ग्रामों के ग्रामीण ट्रैक्टर के सहारे आवागमन कर रहे हैं। प्रशासन जल स्तर पर पैनी नजर रखे हुए हैं।

पहाड़ी क्षेत्रों पर हो रही वर्षा के चलते इन दिनों गंगा नदी उफान पर है। हरिद्वार व बिजनौर बैराज से लगातार गंगा नदी में पानी छोड़ा जा रहा है। जिस कारण बाढ़ का पानी गंगा से सटे जंगल में घुस आया था। वन क्षेत्र में बसे गांव रसूलपुर भांवर व नाववाला आदि ग्रामों के नजदीक पानी पहुंच गया था। जिस कारण लोगों को आवागमन में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। इन ग्रामों में लोग ट्रैक्टर के सहारे आवागमन कर रहे हैं। उधर, पशुओं के लिए चार लेने के लिए बाढ़ के पानी के बीच होकर गुजरना पड़ रहा है।

 

10 सेमी की बढ़ोतरी, पहाड़ों पर हो रही वर्षा

रविवार को पानी कम हुआ था। ग्रामीणों का कहना है कि मंगलवार को जंगल में करीब आधा फीट पानी में वृद्धि दर्ज हुई है। बाढ़ चौकी भी जल स्तर पर पैनी निगाह रखे हुए हैं। तहसीलदार मूसाराम थारू ने बताया कि अभी पानी की स्थिति सामान्य है। प्रशासन बाढ़ की स्थिति पर पैनी नजर रखे हुए हैं। सभी बढ़ चौकियों को हमने अलर्ट पर रहने को कहा है। जंगल क्षेत्र के ग्रामों में रहने वाले लोगों से संपर्क किया जा रहा है।

हसनपुर क्षेत्र गंगा में बाढ़ से चारा लाने की दुश्वारियां

हसनपुर तहसील क्षेत्र में गंगा में बाढ़ आने की वजह से गंगा किनारे खेती करने वाले किसानों को जंगल से चारा लाने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। क्योंकि, गंगा के किनारे पर स्थित कुछ खेतों में बाढ़ का पानी पहुंच गया है। हालांकि, बाढ़ प्रभावित गांवों में अभी बाढ़ से कोई खतरा नहीं है। तहसील प्रशासन और बाढ़ प्रभावित गांवों में रहने वाले लोगों की नजर हर समय गंगा के जलस्तर पर रहती है। क्षेत्र में सतैडा की मढ़ैया, सिरसा गुर्जर की मढ़ैया, गंगानगर, मलकपुर की मढ़ैया तथा पौरारा की मढ़ैया बाढ़ प्रभावित गांव हैं।

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