जीसएटी को लेकर अनोखी कार्रवाई शुरू, सड़क किनारे सामाने बेचने वाले 13 हजार दुकानदारों को नोटिस…
कर्नाटक राज्य के कमर्शियल टैक्स डिपार्टमेंट ने ने डिजिटल लेनदेन के आधार पर एक अनोखी कार्रवाई शुरू की है. CNBC-TV18 के सूत्रों के अनुसार, विभाग ने लगभग 13,000 छोटे टैक्सपेयर्स को GST न चुकाने के लिए “कारण बताओ नोटिस” जारी किए हैं. इन टैक्सपेयर्स की लिस्ट में सड़क किनारे के रेहड़ी-पटरी पर दुकान लगाने वाले और छोटे बिजनेस करने वाले शामिल हैं.
यह कार्रवाई कारोबारी साल 2022 से 2025 तक के यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) लेनदेन की छह महीने की जांच के बाद की गई है. सूत्रों ने बताया कि विभाग ने PhonePe, Google Pay, Paytm, BHIM जैसे प्रमुख UPI ऐप्स के लेनदेन डेटा की जांच की और इसे GST रजिस्ट्रेशन रिकॉर्ड के साथ मिलाया.
जांच में पता चला कि कई छोटे व्यापारी, जिनके पास काफी UPI पेमेंट्स आ रहे थे, GST के तहत रजिस्टर नहीं थे. जबकि उनकी सालाना आमदनी सर्विसेज के लिए 20 लाख रुपये और सामान के लिए 40 लाख रुपये की सीमा से अधिक थी.
क्या हुआ इस कार्रवाई का असर?
एक सीनियर सरकारी अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर CNBC-TV18 को बताया, “यह कदम बड़ा असर डालेगा. कर्नाटक ने रास्ता दिखाया है, अब अन्य राज्य भी इस मॉडल को अपना सकते हैं. लेकिन इसका निगेटिव पक्ष भी है – इससे छोटे व्यापारी डिजिटल पेमेंट्स छोड़कर कैश की ओर लौट सकते हैं और इससे जिससे टैक्स सिस्टम पर भरोसा कम हो सकता है.”
डिजिटल इंडिया मिशन पर खतरा
एक अन्य सीनियर अधिकारी ने कहा, “यह कार्रवाई डिजिटल इंडिया मिशन को नुकसान पहुंचा सकती है. यह मिशन कैशलेस लेनदेन और अर्थव्यवस्था को औपचारिक बनाने पर जोर देता है.” बेंगलुरु के स्थानीय लोगों का कहना है कि कई सड़क विक्रेता और छोटे उद्यमी, जिन्हें अभी नोटिस नहीं मिले हैं, वे डर के कारण UPI भुगतान लेना बंद कर रहे हैं.
असंगठित क्षेत्र पर असर
अधिकारियों का कहना है कि इस पहल का मकसद अनौपचारिक आर्थिक गतिविधियों को टैक्स के दायरे में लाना है. लेकिन डिजिटल पेमेंट, खासकर असंगठित क्षेत्र में, पर इसका ठंडा प्रभाव पड़ सकता है.
GST की चुनौतियां
2017 में शुरू हुई GST व्यवस्था का उद्देश्य टैक्स सिस्टम को सरल बनाना था, लेकिन आलोचकों का कहना है कि छोटे व्यवसायों को बार-बार फाइलिंग, जटिल प्रक्रियाओं और डिजिटल जानकारी की कमी के कारण परेशानी हो रही है.
बंगलुरु के एक टैक्स सलाहकार ने कहा, “डिजिटलीकरण एक शक्तिशाली अनुपालन उपकरण है, लेकिन इसके साथ सरलीकरण नहीं हुआ तो यह उन छोटे व्यापारियों को दंडित कर सकता है, जिन्हें औपचारिक बनाने की कोशिश की जा रही है.”