UPI से पेमेंट न लेने और कैश मांगने पर भी आ सकता है जीएसटी नोटिस, अधिकारियों ने कहा- नियम मानने ही होंगे…
- यूपीआई के जरिए पेमेंट लेने और जीएसटी का नोटिस मिलने के बाद दुकानदार परेशान हैं। वे अब कैश में पेमेंट ले रहे हैं। लेकिन इससे भी नोटिस आ सकता है।
नई दिल्ली: यूपीआई से पेमेंट लेने काफी दुकानदारों को महंगा पड़ रहा है। बेंगलुरु के बाद अब दिल्ली के भी काफी दुकानदार ग्राहकों से यूपीआई से पेमेंट नहीं ले रहे हैं। इसका कारण जीएसटी विभाग की ओर से नोटिस मिलना है। कई दुकानदारों को लाखों-करोड़ों रुपये के जीएसटी नोटिस मिले हैं। इस डर से दुकानदार अब ग्राहकों से कैश ले रहे हैं। लेकिन यह कैश लेना भी महंगा पड़ सकता है।
कैश पर भी जीएसट
दरअसल, 12 जुलाई को कर्नाटक राज्य जीएसटी विभाग ने कहा कि उन्होंने UPI और अन्य माध्यमों से पेमेंट लेने वाले व्यापारियों को जीएसटी नोटिस भेजे हैं। विभाग ने पाया कि उनका टर्नओवर जीएसटी रजिस्ट्रेशन लिमिट को पार कर गया है। इससे डरकर, कई व्यापारियों ने यूपीआई के जरिए पेमेंट लेना बंद कर दिया और केवल कैश स्वीकार करना शुरू कर दिया।
कैश पर भी जीएसटी नियम लागू
17 जुलाई को जीएसटी विभाग ने एक और बयान जारी किया। उन्होंने कहा कि जीएसटी तो हर तरह के पेमेंट पर लगेगा, चाहे वो किसी भी तरीके से आए। यूपीआई तो सिर्फ पेमेंट लेने का एक तरीका है। इसका मतलब ये है कि अगर कोई व्यापारी सिर्फ कैश ले रहा है, तो भी उसे जीएसटी के नियम मानने होंगे। अगर उसका कारोबार तय सीमा से ज्यादा है, तो उसे जीएसटी में रजिस्ट्रेशन कराना होगा। नहीं तो उसे नोटिस मिल सकता है।
जीएसटी कब है जरूरी?
वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम, 2017 की धारा 22 के अनुसार प्रत्येक व्यक्ति जो कारोबार करता है और कैश, UPI, POS मशीन, बैंक भुगतान या किसी अन्य माध्यम से पेमेंट लेता है तो उसे जीएसटी रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी है।
यह नियम उन लोगों पर लागू होता है जो केवल वस्तुओं में लेनदेन (सामान बेचना) करते हैं और जिनका सालाना टर्नओवर 40 लाख रुपये से अधिक है। सर्विस में लेनदेन करने वाले व्यक्तियों के लिए यह सीमा 20 लाख रुपये है। कोई भी व्यक्ति जिसका सालाना टर्नओवर 1.5 करोड़ रुपये से कम है, जीएसटी रजिस्ट्रेशन प्राप्त करने के बाद कंपोजिशन टैक्स स्कीम का विकल्प चुन सकता है और SGST 0.5% और CGST 0.5% का पेमेंट कर सकता है।