March 6, 2026

Hartalika Teej 2025: जानिए हरतालिका तीज का व्रत 2025 कब रखा जाएगा…

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Hartalika Teej 2025 Date and Shubh Muhurat: हिंदू धर्म में हरतालिका तीज का विशेष महत्व है। पंचांग के अनुसार, यह व्रत हर साल भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया को रखा जाता है। हरतालिका तीज अखंड सौभाग्य की प्राप्ति का प्रतीक है और यह व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस व्रत को रखने से पति की दीर्घायु, अखंड सौभाग्य और वैवाहिक जीवन में सुख-शांति मिलती है। महिलाएं इस दिन निर्जला व्रत रखकर माता पार्वती और भगवान शिव की आराधना करती हैं। वहीं, ज्योतिष की मानें तो इस वर्ष की हरतालिका तीज बेहद खास है क्योंकि इस दिन कई शुभ संयोग बन रहे हैं, जिससे इसका महत्व और भी बढ़ गया है। ऐसे में आइए जानते हैं हरतालिका तीज की तिथि, शुभ मुहूर्त, मंत्र, शुभ योग और धार्मिक महत्व….

हरतालिका तीज 2025 की तिथि

पंचांग के अनुसार, भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष तृतीया तिथि का आरंभ 25 अगस्त 2025 को दोपहर 12:35 बजे से होगा और इसका समापन 26 अगस्त 2025 को दोपहर 01:55 पर होगा। ऐसे में उदया तिथि के अनुसार, इस साल हरतालिका तीज का व्रत 26 अगस्त, मंगलवार को रखा जाएगा।

हरतालिका तीज 2025 पूजा का शुभ मुहूर्त

वैदिक पंचांग के अनुसार, इस वर्ष हरतालिका तीज की पूजा के लिए शुभ मुहूर्त 26 अगस्त को सुबह 5:56 बजे से 8:31 बजे तक रहेगा। पूजा की कुल अवधि 2 घंटे 35 मिनट रहेगी।

हरतालिका तीज 2025 पर बन रहे ये खास संयोग

इस बार हरतालिका तीज पर कई शुभ संयोग बन रहे हैं। इस दिन चंद्रमा और मंगल का कन्या राशि में विशेष योग रहेगा, जिससे महालक्ष्मी राजयोग का निर्माण होगा। इसकेअलावा इस हस्त नक्षत्र में साध्य और शुभ योग बनेंगे। वहीं, सूर्यदेव अपनी स्वराशि सिंह में विराजमान रहेंगे।

हरतालिका तीज व्रत का महत्व

हरतालिका तीज के दिन महिलाएं भगवान शिव, माता पार्वती और श्रीगणेश की पूजा करती हैं। ऐसा माना जाता है कि इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की विधिवत पूजा करने से अखंड सौभाग्य और पति की लंबी आयु का वरदान प्राप्त होता है। वहीं, माता पार्वती को सोलह श्रृंगार अर्पित करने से देवी अत्यंत प्रसन्न होती हैं और साधक के वैवाहिक जीवन में सुख-समृद्धि आता है।

 

हरतालिका तीज पर करें पार्वती जी के इन मंत्रों का जाप

ओम पार्वत्यै नमः

 

ओम उमाये नमः

 

या देवी सर्वभूतेषु मां गौरी रूपेण संस्थिता।

 

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:

 

सिंदूरं शोभनं रक्तं सौभाग्यं सुखवर्धनम्। शुभदं कामदं चैव सिंदूरं प्रतिगृह्यताम्।।

 

गण गौरी शंकरार्धांगि यथा त्वं शंकर प्रिया। मां कुरु कल्याणी कांत कांता सुदुर्लभाम्।।