रामनगर की रामलीला: दुनिया के सबसे बड़े रंगमंच से आज उठेगा पर्दा, हर डगर होगी राममय; सजेगी क्षीरसागर की झांकी…
विश्व प्रसिद्ध रामनगर की रामलीला का शुभारंभ आज से हो जाएगा। अनंत चतुर्दशी के अवसर पर इस भक्तिमय आयोजन में भारत ही नहीं विदेशों से भी लोग आते हैं। पूरे एक माह तक यहीं प्रवास कर रामलीला प्रेमी रामलीला का सुख लेते हैं।
रंगकर्म के बजाय संपूर्ण धार्मिक अनुष्ठान के विधान सहेजे दुनिया के सबसे बड़े मुक्ताकाशीय मंच रामनगर की विश्वप्रसिद्ध रामलीला का पर्दा शनिवार को अनंत चतुर्दशी पर उठ जाएगा। गोधूलि बेला में रामबाग का तालाब क्षीर सागर का रूप लेगा। श्रीहरि की झांकी सजेगी और रावण जन्म, दिग्विजय, देव स्तुति और आकाशवाणी प्रसंग से 31 दिनी उत्सव का श्रीगणेश होगा। इसके साथ ही रामनगर की हर डगर राममय हो जाएगी
पर्व और उत्सवों का शहर बनारस अनंत चतुर्दशी से सांस्कृतिक समृद्धि की सतरंगी रंगत का आइना नजर आएगा। इसका रंग एक दिन पहले ही देवाधिदेव महादेव की नगरी के उपनगर में शुक्रवार से ही नजर आने लगा। प्रभु की लीला की झांकी का आनंद उठाने, स्वरूपों में देव रूपों की झलक पाने के लिए आसपास की धर्मशालाओं और मठ मंदिरों में तैयारियां शुरू हो गईं। हालांकि, अब पहले की तरह साधु संन्यासी नहीं आते हैं। पूरे एक माह तक यहीं प्रवास कर रामलीला प्रेमी रामलीला का सुख लेंगे।
रामायणी दल ने चौक पक्की पर 175 दोहों का गायन किया पूरा
शुक्रवार को मंचन न किए जाने वाले सभी 175 दोहों का गायन रामायणी दल ने पूरा कर लिया। रामलीला का औपचारिक शुभारंभ भाद्र शुक्ल चतुर्थी के दिन चौक पक्की पर द्वितीय गणेश पूजन से ही हो गया था जब झाल-मजीरे की झनक के साथ गूंजते दोहे-चौपाइयों से श्रद्धालुओं का मन मयूर चमक उठा था। इससे पहले सुबह सवेरे निर्विघ्न लीला आयोजन के मद्देनजर अगस्त्य उदय के अवसर पर दुर्ग के दक्षिण-पूर्वी बुर्जी पर श्वेत ध्वजोत्तोलन किया जाएगा।
200 साल से ज्यादा पुरानी नींव
रामनगर की रामलीला आरंभ को लेकर कई किंवदंतियां हैं लेकिन इसका आरंभ काशी नरेश महाराज उदितनारायण सिंह (1796 से 1835) के समय माना जाता है। इस लिहाज से यह काल 19वीं सदी के पूर्वार्द्ध तक जाता है। इसे महाराज ईश्वरी नारायण सिंह (1835-1898) ने वर्तमान स्वरूप दिया। इसका आधार तो रामचरित मानस ही रखा लेकिन इसके संवादों व लीला स्थलों का अपने गुरु काष्ठ जिह्वा स्वामी से शोधन कराया।
सिर्फ लीला नहीं, संपूर्ण अनुष्ठान
रामनगर की लीला रंगकर्म नहीं संपूर्ण धार्मिक अनुष्ठान है। इसके विधि- विधान सावन कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को प्रथम गणेश पूजन को चयनित पंच स्वरूपों की पूजा अर्चना कर प्रशिक्षण से शुरू होता है।
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