कलेक्टर दर में वृध्दि एवं महंगाई भत्त शुन्य किये जाने के विरोध में नगरीय निकाय प्लेसमेंट कर्मचारी संध पहुचे कलेक्टर कार्यालय ।
छत्तीसगढ शासन द्वारा जारी महंगाई भत्ते को शुल्य किये जाने के विरोध में आज नगरीय निकायो में कार्यरत प्लेसमेंट कर्मचारी वेतन वृध्दि एवं महंगाई भत्ते के बढाने की मांग को लेकर महासंघ के पदाधिकारी आज कलेक्टर महोदय एवं निगम महापौर को ज्ञापन देने पहूचे, जिसमें महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष खेमूलाल निषाद, प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष संजय ऐडे, प्रदेश प्रवक्ता हिमंाशु यदु, एवं नगर निगम जोन के सभी क्षेत्रिय सचिव एवं कर्मचारी उपस्थित रहे ।
महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष खेमूलाल निषाद के अनुसार श्रमिक न्यूनतम वेतन अधिनियम 1948, धारा 3 (ख) के तहत् मजदूरी की न्यूनतम दरो का पुनर्विलोकन हर पॉच वर्ष के अन्तरालो पर किया जाना होता है। किन्तु वर्ष- 2017 में वेतन पुनरीक्षित किये जाने के पश्चात आज तक (लगभग 08 वर्ष) पश्चात भी पुनरिक्षित वेतनमान लागू नही किया गया है। बल्कि छत्तीसगढ़ में पहली बार एैसा हुुआ है कि प्रत्येक छः माह में मिलने वाले परिवर्तनशील महंगाई भत्ता को भी शुन्य कर सरकार श्रमिको का शोषण कर रही है ।
केन्द्र एवं राज्य के कर्मचारियो का वेतन एवं महंगाई भत्ता लगातार बढ़ा रही है किन्तु वही श्रमिको के साथ अन्याय कर रही है। जिसके कारण प्रदेश के समस्त प्लेसमेंट/आउटसोर्सिंग कर्मचारियो में भारी आक्रोश है, और जल्द ही शासन कोई आदेश जारी नही करती तो समस्त कर्मचारी सभी अतिआवश्यक सेवाए, सफाई, पेयजल, बिजली बाधित कर 1 नवंबर 2025 को प्रदेष स्तरीय हडताल पर जाने का मजबूर होंगें ।
साथ ही यह भी आरोप लगाया की छत्तीसगढ़ से ही लगे अन्य राज्य जैसे- मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश, ओडिसा, महाराष्ट्र, झारखण्ड तेलंगाना एवं बिहार जैसे प्रदेश में मजदूरी की न्यूनतम दरे 18000-22000 तक प्रदान किया जा रहा है किन्तु छत्तीसगढ़ आर्थिक रूप से समृध्द होने के पश्चात भी न्यूनतम मजदूरी केवल 11176-13386 रू दिया जा रहा है जो कि बेहद ही निम्न है और कर्मचारियो के जीवन यापन के लिए बहुत ही कर है, इतने में घर परिवार, बच्चो की शिक्षा कर पाना मुस्किल है ।


