23 अक्टूबर से प्रधानमंत्री मोदी बिहार में शुरू करेंगे ताबड़तोड़ जनसभाएं…
- पटना, गया से लेकर दरभंगा तक… प्रधानमंत्री मोदी 4 दिन में करेंगे 12 रैलियां
- बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के मतदान के लिए अब 20 दिन से भी कम समय बचा हुआ है. पार्टियां चुनावी प्रचार में अपनी पूरी ताक़त झोंक दे रही है. प्रधानमंत्री मोदी भी 23 अक्टूबर से बिहार में अपनी रैलियों का आग़ाज़ करेंगे. दरभंगा, मुज़फ़्फ़रपुर, पटना, गया, पूर्वी चम्पारण, समस्तीपुर, छपरा, पश्चिमी चम्पारण और अररिया में रैली को संबोधित करेंगे.
नई दिल्ली,18 अक्टूबर 2025: बिहार विधानसभा चुनाव के नज़दीक आते-आते जैसे-जैसे सियासत का तापमान बढ़ता जा रहा है, वैसे-वैसे हर कोई इस चुनावी समर को लेकर दिलचस्पी से भरा है. और अब इस पिक्चर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एंट्री होने वाली है जो इसे नया आयाम पर पहुंचाएगी. प्रधानमंत्री मोदी अक्टूबर के आखिरी हफ्ते से लेकर नवंबर के शुरुआती दिनों तक पूरे बिहार में कई रैलियों को संबोधित करेंगे. ये रैलियां न सिर्फ वोटरों के मूड पर असर डाल सकती हैं, बल्कि पूरे चुनावी समीकरण को पलट कर रख सकती हैं.
प्रधानमंत्री की पहली रैली 23 अक्टूबर को तय है. इस दिन वे सासाराम, गया और भागलपुर में विशाल जनसभाएं करेंगे. इन इलाकों में बीजेपी और एनडीए की मजबूत पकड़ मानी जाती है, लेकिन विपक्ष भी हर सीट पर दमखम दिखाने में जुटा है. प्रधानमंत्री मोदी की मौजूदगी से कार्यकर्ताओं में जोश बढ़ेगा और मतदाताओं में नई ऊर्जा देखने को मिलेगी.
इसके बाद 28 अक्टूबर को दरभंगा, मुज़फ़्फ़रपुर और पटना में रैलियां होंगी. दरभंगा-मुज़फ़्फ़रपुर मिथिलांचल के दिल माने जाते हैं और पटना तो राजधानी होने के साथ-साथ राजनीति का बड़ा केंद्र भी है. प्रधानमंत्री मोदी की भाषण केवल जनता से जुड़ने का जरिया नहीं, बल्कि पूरे बिहार को यह बताने का सशक्त माध्यम होंगे कि बीजेपी इस बार चुनाव में जीत के लिए कमर कस चुकी है.
1 नवंबर को पूर्वी चम्पारण, समस्तीपुर और छपरा में प्रधानमंत्री मोदी के भाषण होंगे, जहां सामाजिक समीकरण और स्थानीय मुद्दे निर्णायक बनेंगे. विकास, रोजगार, भ्रष्टाचार मुक्त शासन जैसे विषय युवाओं और किसान वर्ग को सीधे प्रभावित कर सकते हैं.
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अंत में 3 नवंबर को पश्चिमी चम्पारण, अररिया और सहरसा में रैलियों का समापन होगा. ये क्षेत्र चुनावी दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण हैं और प्रधानमंत्री मोदी की रैलियां यहां भी भारी संख्या में लोगों को आकर्षित कर सकती हैं.
प्रधानमंत्री मोदी की ये रैलियां सिर्फ राजनीतिक सभा नहीं, बल्कि जनता के साथ संवाद का मंच हैं, जिनका प्रभाव शहर से लेकर गांव तक महसूस किया जा सकेगा. इस बार एनडीए को उम्मीद है कि प्रधानमंत्री की लोकप्रियता चुनावी पासा घुमा देगी और सत्ता को मजबूत करेगी.