March 6, 2026

बांग्लादेश में हिंदू दीपू चंद्र दास को पीटकर जिंदा जलाने की घटना को लेकर भारत के कई राज्यों में विरोध प्रदर्शन…

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नई दिल्ली/कोलकाता/ सिलीगुड़ी : अशांत बांग्लादेश में अल्पसंख्यक बंगाली हिंदू दीपू चंद्र दास को पीटकर जिंदा जलाने की घटना से पूरी दुनिया स्तब्ध है. इसके खिलाफ भारत के कई राज्यों में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं. दिल्ली, पश्चिम बंगाल के कोलकाता, सिलीगुड़ी, असम, बिहार, तेलंगाना, मध्य प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और देश के कई अन्य राज्यों में हिंदू संगठनों ने विरोध प्रदर्शन किया है. दिल्ली स्थिति बांग्लादेश उच्चायोग की सुरक्षा बढ़ा दी गई है.

कोलकाता में बांग्लादेश डिप्टी हाई कमीशन के बाहर प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड तोड़ दिए. पुलिस को भीड़ को काबू करने में मशक्कत करनी पड़ी. बांग्लादेश में हिंदुओं पर हमले का विरोध करने के लिए सैकड़ों लोग कमीशन के बाहर जमा हो गए. बाद में पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया.

मंगलवार सुबह करीब 11 बजे बांग्लादेश उच्चायोग के बाहर कार्यकर्ताओं ने पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की बात कही. इसके साथ-साथ बांग्लादेश में फंंसे हिंदुओं विशेषतौर पर मेडिकल की पढ़ाई कर रहे छात्रों को सुरक्षा देने का भी मुद्दा उठाया. बांग्लादेश में लगातार हालात बिगड़ते जा रहे हैं. यहां पर हिंदुओं को निशाना बनाया जा रहा है. बांग्लादेश के छात्र नेता उस्मान हादी की सिंगापुर में मौत के बाद हिंदू लड़के दीपू दास की मौत को लेकर लोगों में बहुत आक्रोश देखा जा रहा है.

इससे पहले दीपू दास की मौत का विरोध कर रहे वीएचपी कार्यकर्ताओं ने सोमवार को सिलीगुड़ी के बीचों-बीच सेवक रोड पर बने बांग्लादेश वीजा एप्लीकेशन सेंटर को बंद करा दिया. इस घटना से सिलीगुड़ी शहर में बहुत ज्यादा तनाव पैदा हो गया.

पिछले हफ़्ते बांग्लादेश के भालुका में एक गारमेंट फैक्ट्री के कर्मचारी दीपू चंद्र दास को भीड़ मारा और फिर सड़क पर लटकाकर जिंदा जला दिया गया. इस घटना का वीडियो सामने आने के बाद बांग्लादेश की अंतरिम सरकार और उसके चीफ एडवाइजर मुहम्मद यूनुस के खिलाफ दुनिया भर में गुस्सा भड़क गया. यूनुस की भूमिका पर भी सवाल उठे हैं.

 

हालांकि, जैसे ही पश्चिमी मीडिया ने इस घटना की बुराई करना शुरू किया, बांग्लादेशी पुलिस प्रशासन ने सात लोगों को गिरफ्तार कर लिया लेकिन क्या यह काफी है? यह सवाल बना हुआ है. इस स्थिति में पश्चिम बंगाल के लोगों ने अब बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर लगातार बढ़ती अशांति और अत्याचार के खिलाफ अपनी आवाज उठाई है.

 

सोमवार सुबह दीपू चंद्र दास की बेरहमी से हत्या और बांग्लादेश में रहने वाले अल्पसंख्यक हिंदुओं पर बढ़ते अत्याचार के खिलाफ सिलीगुड़ी में अलग-अलग चरणों में विरोध और प्रदर्शन शुरू हुए. बंगीय हिंदू जागरण मंच ने रविवार रात से विरोध प्रदर्शन शुरू किया. उन्होंने शहर में मशाल जुलूस निकाला और मांग की कि भारत में बांग्लादेशियों के लिए सभी तरह की मेडिकल, पढ़ाई और दूसरी सुविधाएं बंद की जाएं.

विश्व हिंदू परिषद इस मुद्दे पर सड़कों पर उतर आई. विश्व हिंदू परिषद के सदस्यों ने सबसे पहले बाघाजतिन पार्क ग्राउंड से विरोध मार्च निकाला. जुलूस कचहरी रोड से होते हुए हाशमी चौक पहुंचा. वहां संगठन के सदस्यों ने सड़क जाम कर दिया. पुलिस के जाम हटाने के बाद विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने कथित तौर पर बिधान रोड से मार्च निकाला और सेवक रोड पर बांग्लादेश वीजा एप्लीकेशन सेंटर को घेर लिया और प्रदर्शन किया.

 

विरोध के दौरान प्रदर्शनकारियों ने वीजा सेंटर के साइनबोर्ड तोड़ दिए और फ्लेक्स बैनर फाड़ दिए. उन्होंने बांग्लादेश वीजा सेंटर के गेट को बाहर से बंद भी कर दिया. बाद में पुलिस बल मौके पर पहुंचे और स्थिति को काबू में किया. प्रदर्शनकारियों ने बांग्लादेशियों के लिए सभी तरह के वीजा तुरंत बंद किए जाने की मांग की. वहीं चेतावनी दी कि ऐसा नहीं किए जाने पर विश्व हिंदू परिषद (VHP) भविष्य में और भी बड़े विरोध प्रदर्शन करेगा.

इस मामले पर विश्व हिंदू परिषद की दार्जिलिंग जिला यूनिट के प्रेसिडेंट लक्ष्मण बंसल ने कहा, ‘बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार लगातार बढ़ रहा है. एक बेबस हिंदू को भीड़ ने बेरहमी से जिंदा जला दिया. केंद्र सरकार को अब बांग्लादेश के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए.’

 

इस बीच कोलकाता में विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी ने दीपू चंद्र दास की हत्या के विरोध में बांग्लादेश हाई कमीशन तक मार्च निकाला. वह सौ से अधिक साधुओं और संतों के साथ पार्क सर्कस बेक बागान चौराहे पर बांग्लादेश डिप्टी हाई कमीशन बिल्डिंग की ओर बढ़े. लेकिन, जब पुलिस ने उनका रास्ता रोका, तो सुवेंदु, शंकर घोष और कई दूसरे बीजेपी नेता और साधु सड़क पर बैठ गए. दीपू चंद्र दास की हत्या के विरोध में मुहम्मद यूनुस के खिलाफ नारे लगाए गए. हालात को कंट्रोल करने के लिए पुलिस फोर्स तैनात की गई.

बांग्लादेश में हाल ही में हुई अल्पसंख्यकों की हत्याओं और जुल्म के खिलाफ और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा की मांग को लेकर पूरे दिन बांग्लादेश हाई कमीशन के बाहर विरोध प्रदर्शन हुए. इस वजह से हाई कमीशन को लगभग अपने दरवाजे बंद करने पड़े. नेशनल कांग्रेस और एथीस्ट फोरम समेत कई राजनीतिक और संगठनों ने बांग्लादेश हाई कमीशन पर विरोध प्रदर्शन किया.

 

राज्य कांग्रेस अध्यक्ष शुभंकर सरकार के निर्देश पर कोलकाता की चार जिला कांग्रेस कमेटियों के अध्यक्षों की देखरेख में बांग्लादेश हाई कमीशन ऑफिस पर विरोध प्रदर्शन किया गया. कांग्रेस नेताओं, कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने बेगबागान चौराहे से मार्च निकाला और बांग्लादेश हाई कमीशन के सामने विरोध प्रदर्शन किया.

बेगबागान इलाके में अफरा-तफरी की स्थिति बन गई जब प्रदर्शनकारियों ने पुलिस बैरिकेड तोड़कर हाई कमीशन में घुसने की कोशिश की तो पुलिस के साथ बहस हो गई. बाद में स्थिति को काबू में कर लिया गया. अलग-अलग जन संगठनों के प्रतिनिधियों ने कमीशन को अपनी मांगें सौंपी.