March 6, 2026

जल्द मलेरिया मुक्त होगा भारत, 92% जिलों में मामूली असर; आईसीएमआर ने जारी की रिपोर्ट…

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देश: यह खुलासा नई दिल्ली स्थित आईसीएमआर–राष्ट्रीय मलेरिया अनुसंधान संस्थान (एनआईएमआर) ने जारी मलेरिया रिपोर्ट में किया है। इसके मुताबिक, 2015 से 2024 के बीच मलेरिया में 80–85 प्रतिशत की गिरावट आई है।

भारत ने 1960 के दशक में मलेरिया को लगभग समाप्त कर दिया लेकिन 1970 के दशक के मध्य तक यह फिर से तेजी से फैल गया। एक बार फिर भारत इस बीमारी से मुक्ति पाने की दहलीज पर पहुंच गया है। मौजूदा समय में देश के 92 फीसदी जिलों में मलेरिया का असर बेहद कम पाया गया क्योंकि बीते 10 साल में इस संक्रमण के मामलों में 85 फीसदी तक की गिरावट आई है।

यह खुलासा नई दिल्ली स्थित आईसीएमआर–राष्ट्रीय मलेरिया अनुसंधान संस्थान (एनआईएमआर) ने जारी मलेरिया रिपोर्ट में किया है। इसके मुताबिक, 2015 से 2024 के बीच मलेरिया में 80–85 प्रतिशत की गिरावट आई है। सबसे बड़ी बात यह कि 2024 में देश के 92% जिलों में मलेरिया का स्तर एक अंक से नीचे है, जिसे नियंत्रण का मजबूत संकेत माना जाता है। आईसीएमआर के विशेषज्ञों का कहना है कि भारत अब प्री-एलीमिनेशन फेज में पहुंच चुका है जिसका मतलब बीमारी का प्रसार बड़े स्तर पर रुकना है। अब अंतिम चरण में सटीक निगरानी और स्थानीय रणनीति से इसे पूरी तरह खत्म किया जा सकता है।

सरकार ने लक्ष्य रखा है कि 2030 तक देश को मलेरिया-मुक्त किया जाए। दरअसल मलेरिया प्लास्मोडियम परजीवियों के कारण होने वाली एक जानलेवा बीमारी है जो संक्रमित मादा एनोफिलीस मच्छरों के काटने से फैलती है। ठहरा हुआ पानी मच्छरों के प्रजनन स्थल के रूप में कार्य करता है जिससे इसका प्रसार होता है। इसके चलते देश के अधिकांश हिस्सों में सबसे अधिक मामले जुलाई से नवंबर तक वर्षा ऋतु के दौरान देखे जाते हैं।

बच्चों में गंभीर मलेरिया से गंभीर एनीमिया, श्वसन संकट या सेरेब्रल मलेरिया जैसी जटिलताएं हो सकती हैं। वयस्कों में, यह कई अंगों की विफलता का कारण बन सकता है। गर्भवती महिलाओं में, मलेरिया मातृ स्वास्थ्य और गर्भावस्था के परिणामों को प्रभावित कर सकता है। आईसीएमआर के महानिदेशक डॉ. राजीव बहल ने कहा कि भारत ने पिछले दशक में मलेरिया को नियंत्रित करने में बड़ी सफलता हासिल की है। अब देश उस मोड़ पर है जहां थोड़े और प्रयास से मलेरिया को हमेशा के लिए खत्म किया जा सकता है।

पूर्वोत्तर और जंगल क्षेत्रों में अब भी मुश्किलें

पूर्वोत्तर, घने जंगलों, सीमा क्षेत्रों और आदिवासी इलाकों में मलेरिया अब भी चुनौती बना हुआ है। दुर्गम भौगोलिक स्थिति, स्वास्थ्य सेवाओं की सीमित पहुंच और कई मामलों में बिना लक्षण के मलेरिया मिलना, जो संक्रमण के नियंत्रण को कठिन बनाता है। रिपोर्ट में यह भी है कि कई क्षेत्रों में दवाओं की नियमित आपूर्ति, रैपिड डायग्नोस्टिक किट की गुणवत्ता, मच्छर नियंत्रण उपकरण व कीटनाशक प्रतिरोध अभी भी उन्मूलन की राह में बाधा बन रहे हैं।

शहरों में नया खतरा, अर्बन मलेरिया बढ़ रहा

रिपोर्ट पहली बार स्पष्ट रूप से चेतावनी देती है कि शहरों में मलेरिया का पैटर्न बदल रहा है। निर्माण स्थलों पर जमा पानी, कंटेनर-ब्रीडिंग व घनी आबादी वाले क्षेत्रों में एनोफेल्स स्टेफेन्सी मच्छर की उपस्थिति से अर्बन मलेरिया तेजी से उभर रहा है। दिल्ली, गुरुग्राम, मुंबई और हैदराबाद जैसे शहर इसके खास उदाहरण हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों व आईसीएमआर का अनुमान है कि मौजूदा रफ्तार जारी रही तो भारत 2030 तक मलेरिया मुक्त की श्रेणी में शामिल हो सकता है।