अगले महीने 5 देशों के साथ बैठक, भारत ने इसके पहले रूस से कर दी है ये डिमांड, क्यों टाइट है सीन?
- भारत रूस से व्यापारिक बाधाएं दूर करने का आग्रह कर रहा है। भारत चाहता है कि रूस भारतीय इलेक्ट्रॉनिक्स, इंजीनियरिंग सामान, खाने-पीने के उत्पाद और मछली के निर्यात पर लगी रोक हटाए। इससे भारत रूस के करीब 50-55 अरब डॉलर के रूबल का इस्तेमाल कर सकेगा। ये रूबल तेल आयात के कारण रूस के बैंकों में जमा हो गए हैं।
नई दिल्ली: भारत रूस से व्यापारिक बाधाओं को कम करने के लिए कह रहा है। भारत चाहता है कि रूस भारतीय इलेक्ट्रॉनिक्स, इंजीनियरिंग सामान, खाने-पीने के उत्पाद और मछली के निर्यात पर लगी रोक हटाए। ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि भारत रूस के करीब 50-55 अरब डॉलर के रूबल का इस्तेमाल कर सके। ये रूबल तेल आयात के कारण रूस के बैंकों में जमा हो गए हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय निर्यातकों को रूस के बाजार में सामान बेचने में कई दिक्कतें आ रही हैं। इलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र में रूस की तरफ से सॉफ्टवेयर से जुड़ी कुछ खास जरूरतें हैं। यह एक बड़ी रुकावट बन गई है। इंजीनियरिंग सामान के निर्यात में भी कड़े स्टैंडर्ड के कारण देरी हो रही है। कुछ उत्पादों के लिए स्थानीय भाषा की जरूरतों को पूरा करना भी मुश्किल हो रहा है।
सबसे ऊंचे स्तर पर उठाया गया है मामला
इस मामले पर बातचीत करने वाले एक व्यक्ति ने को बताया, ‘हमारे सामानों को कुछ रूसी मानकों और कुछ यूरेशियन मानकों का पालन करना पड़ता है। इससे निर्यात करना मुश्किल हो जाता है।’
यह मामला सरकार के सबसे ऊंचे स्तर पर उठाया गया है। भारत का रूस के साथ व्यापार घाटा बहुत ज्यादा है। इस वित्तीय वर्ष (2025-26) के पहले सात महीनों में यह घाटा करीब 25 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। यह घाटा मुख्य रूप से रूस से खरीदे जाने वाले कच्चे तेल (क्रूड) के कारण है।
कुछ रूसी तेल कंपनियों पर अमेरिकी प्रतिबंध लगे हुए हैं। इस वजह से भारतीय रिफाइनरियों ने तेल खरीदना कम कर दिया है। हालांकि, रिपोर्ट के अनुसार, कुछ नई कंपनियां तेल की सप्लाई कर रही हैं। इससे यह व्यापार घाटा कम होने की उम्मीद है। प्रतिबंधों के कारण भारतीय तेल कंपनियों ने रूसी कच्चे तेल के लिए रूबल और अन्य मुद्राओं में पेमेंट किया है। इसके चलते बड़ी रकम रूसी बैंकों में फंसी हुई है।
निर्यातकों को रूस में सामान भेजने में परेशानी
लेकिन, भारतीय निर्यातकों को रूस में अपना सामान भेजने में परेशानी हो रही है। दूसरी ओर, रूसी रिटेल चेन भारतीय खाने-पीने के सामान और अन्य उत्पादों को आयात करने में दिलचस्पी दिखा रहे हैं।
एक अधिकारी ने को बताया, ‘हमने रूसी अधिकारियों के साथ कड़े मानकों के मुद्दे को सबसे ऊंचे स्तर पर उठाया है और इसे हल करने की सराहना की जा रही है।’
यह बातचीत अगले महीने होने वाली एक महत्वपूर्ण बैठक से पहले हो रही है। यह बैठक यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन के साथ एक प्रस्तावित व्यापार समझौते पर होगी। इस यूनियन में रूस के अलावा आर्मेनिया, बेलारूस, कजाकिस्तान और किर्गिस्तान जैसे देश शामिल हैं।
भारत चाहता है कि रूस इन व्यापारिक बाधाओं को दूर करे ताकि वह अपने फंसे हुए रूबल का इस्तेमाल कर सके। यह भारत के निर्यातकों के लिए भी एक बड़ा मौका होगा।