फिल्म रमाई को टैक्स फ्री कराने के लिए राज्य शासन से करूंगा पहल – रिकेश
- सर्व समाज के लोगों को भी फिल्म रमाई का लुत्फ उठाना चाहिए
- हर महिला के संघर्ष, त्याग, बलिदान को दर्शाती है फिल्म रमाई
दुर्ग: देश के संविधान निर्माता बाबासाहेब अंबेडकर की धर्मपत्नी रमाई हिंदी बॉलीवुड फिल्म दुर्ग के तरुण डेल्टा टॉकीज अग्रसेन चौक के पास धूम मचाए हुए है. यह फिल्म पूर्व में मराठी में रिलीज हुई थी. अभी छत्तीसगढ़ महाराष्ट्र एवं एमपी के बालाघाट में रमाई हिंदी बॉलीवुड फिल्म इन दिनों दर्शकों के लिए, खासकर महिलाओं के लिए पसंदीदा फिल्म बन गई है. हर महिला बॉलीवुड की फिल्म रमाई को देखने के लिए आतुर है. दुर्ग के तरुण डेल्टा में यह फिल्म दूसरे सप्ताह भी धूम मचाए हुए हैं. इस फिल्म को देखने के लिए वैशाली नगर विधानसभा के युवा विधायक रिकेश सेन ने भी टॉकीज पहुंचकर फिल्म का लुत्फ उठाया. इस फिल्म को लेकर एमएलए रिकेश ने कहा कि संविधान निर्माता बाबा साहेब अंबेडकर जिनके द्वारा बनाए गए संविधान को आज भारत का हर नागरिक पालन कर रहा है. उनकी पत्नी रमाबाई पर आधारित यह फिल्म रमाई, जिसमें उनके त्याग, तपस्या और बलिदान को दर्शाया गया है. उसे देखने के लिए हर दर्शकों के अलावा सर्व समाज के लोगों को खासकर महिलाओं को रमाई फिल्म देखने आना चाहिए. फिल्म बनाने वाले डॉक्टर उदय कुमार धाबर्डे एवं उनकी पत्नी प्रेरणा धाबर्डे ने एमएलए रिकेश से अनुरोध किया है कि रमाई फिल्म को राज्य सरकार से टैक्स फ्री कराने की आप पहल करें. चूंकि यह फिल्म छत्तीसगढ़ के बिलासपुर, रायपुर, राजनांदगांव, दुर्ग, भिलाई,डोंगरगढ़ में धूम मचाए हुए हैं. रमाई फिल्म में अपना किरदार निभाने वाले डा. उदय धाबर्डे पति,पत्नी परिवार के इस अनुरोध को एमएलए रिकेश ने सहर्ष स्वीकारते हुए कहा कि वह राज्य सरकार से बात करके इस फिल्म को टैक्स फ्री करने की पूरी पहल करेंगे, साथ ही उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि मौर्या टॉकीज में रमाई फिल्म का प्रदर्शन जल्द कराया जाएगा. ताकि माताएं बहने वहां भी इस फिल्म का आनंद ले सकें. एक सफल पुरुष के पीछे महिला का हाथ होने से सभी तरक्की करते हैं. यह 2 घंटे की फिल्म है. इसकी शूटिंग भिलाई व मुंबई में हुई है और सभी कलाकारों का इसमें अहम रोल है. छत्तीसगढ़वासियों को इस फिल्म को अवश्य देखें और सर्व समाज के लोगों को भी इस फिल्म को देखना चाहिए. फिल्म रमाई में बीएसपी हॉस्पिटल सेक्टर 9 के प्लास्टिक सर्जन डा.उदय कुमार धाबर्डे ने संविधान निर्माता बाबासाहेब अंबेडकर का किरदार निभाया है, वहीं उनकी पत्नी प्रेरणा ने बाबासाहेब अंबेडकर की पत्नी रमाबाई का किरदार बखूबी निभाया है. प्रेरणा ने आगे बतलाया कि उनको फिल्म करने की प्रेरणा, दोनों बच्चों के डॉक्टरी पेशे को अपनाने के बाद सन 2020 में मिसेज़ इंडिया, सन 2021 में मिसेज़ यूनिवर्स का किताब जीतने के बाद छोटे धारावाहिकों में कार्य करते हुए, इस बॉलीवुड फिल्म से उन्होंने अपना डेब्यू किया है. समाज को अच्छा संदेश देने के लिए यूट्यूब में उनके विभिन्न वीडियो उपलब्ध हैं.
बाबा साहेब डॉ भीमराव अंबेडकर की विश्व व्यापी छवि के पीछे उनकी पत्नी रमाबाई अंबेडकर जिन्हें हम सब श्रद्धा और प्यार से रमाई कहते हैं उनका बहुत बड़ा योगदान था। रमाई हिंदी फिल्म में हर स्त्री की त्याग संघर्ष बलिदान की कहानी दिखाने की कोशिश की है जो परदे के पीछे रहकर अपने पति, परिवार समाज और देश के लिए करती है। इस फिल्म की प्रोड्यूसर कृष्णा चौहान है तथा इस फिल्म को प्रेरणा यूनिवर्सल फिल्म ने प्रस्तुत किया है। अधिकांश कलाकार छत्तीसगढ़ के हैं। फिल्म में शाहू महाराज बड़ौदा नरेश की भूमिका मुंबई के प्रसिद्ध कलाकार रजा मुराद जी ने निभाई है जिनके शानदार अभिनय और बुलंद आवाज के सभी दीवाने हैं। बाबा साहेब के बड़े भाई की भूमिका में हमारे भिलाई के ही नत्था उर्फ ओमकार दास मानिकपुरी ने अपने अभिनय के जलवे दिखाए हैं। फिल्म का संगीत बहुत ही कर्णप्रिय है और इसे मधुर संगीत की धुनों से सजाया है मुंबई के संगीतकार दिनेश अर्जुना जी ने । फिल्म में बॉलीवुड सिंगर वैशाली माड़े (पिंगा ग पोरी पिंगा, फिल्म बाजीराव मस्तानी) तथा सुहासिनी बेलोन्डे (बालीवुड फिल्म करीब चोरी चोरी नजरे मिली), दिनेश अर्जुना और डॉक्टर नेहा ने अपने मधुर आवाज से इस फिल्म में जान डाल दी है। फिल्म का पोस्ट प्रोडक्शन वर्क Qlab अंधेरी में हुआ है। सबसे बड़ी बात फिल्म में बाबासाहेब अंबेडकर की भूमिका में भिलाई इस्पात संयंत्र के जवाहरलाल नेहरू हॉस्पिटल के मुख्य चिकित्सा अधिकारी तथा प्रसिद्ध बर्न सर्जन, सेवाभावी चिकित्सक डॉ उदय कुमार ने बाबा साहेब की भूमिका को बड़े पर्दे पर बखूबी निभाया है।इस फिल्म के मुख्य किरदार रमाबाई अंबेडकर माता रमाई की भूमिका पूर्व मिसेज यूनिवर्स का खिताब 2023 में यूरोप से जीत कर आई भिलाई की गौरव प्रेरणा धाबर्डे जी ने निभाया है। इस किरदार में अपने इमोशन और सादगी भरे अभिनय से दर्शकों की आंखों में आंसू लाने में कामयाब रही है। फिल्म बहुत ही शिक्षाप्रद, सामाजिक और प्रेरणादायक है। यह हर घर, समाज, देश- विदेश की सामान्य नारी की कहानी है, उसके संघर्ष की कहानी है, उसके साहस की निशानी है जिसे वह हमेशा दूसरों के लिए करती है। रमाई अपने चार बच्चों को पैसे और इलाज के अभाव में खो देती है और जब अच्छी आर्थिक स्थिति होती है और रमाई के पास सोने के गहने होते हैं तो उसे भी वह बच्चों के आश्रम में बच्चों के भूखा देखकर बच्चों के लिए खाने की व्यवस्था के लिए दे देती है। फिल्म के मधुर और भावपूर्ण गीतों को बॉलीवुड के गीतकार डॉ श्रीकृष्णा राउत और गौतम शेन्दे जी ने लिखा है। सबसे महत्वपूर्ण इस फिल्म के लेखक डायरेक्टर कबीरदा है जिन्होंने इस फिल्म के जरिए छत्तीसगढ़ के नवोदित कलाकारों को मौका दिया और उनसे अच्छा अभिनय कराया।
