June 5, 2026

मानसून की ‘नम लू’ का अलर्ट, अब 28 दिन पहले मिलेगी जानलेवा गर्मी की चेतावनी…

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  • एक नए शोध के अनुसार, अब मानसून के दौरान आने वाली जानलेवा ‘नम लू’ का पूर्वानुमान 28 दिन पहले लगाया जा सकता है। ‘क्लाइमेट डायनेमिक्स’ जर्नल में प्रकाशित …

 नई दिल्ली। भारत में प्री मानसून और मानसून की वर्षा को अक्सर चिलचिलाती धूप से राहत के तौर पर देखा जाता है, किंतु विज्ञानियों के एक नए शोध ने इस सुखद एहसास के पीछे छिपे गंभीर स्वास्थ्य संकट की ओर इशारा किया है।

”क्लाइमेट डायनेमिक्स” जर्नल में प्रकाशित यूनिवर्सिटी ऑफ रीडिंग, यूनिवर्सिटी आफ लीड्स और भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (आईआइटीएम) पुणे के साझा अध्ययन के अनुसार अब मानसून के दौरान आने वाली जानलेवा ”नम लू” का पूर्वानुमान 28 दिन यानी करीब एक माह पहले लगाया जा सकता है।

प्रशासन और जनता को तैयारी के लिए मिलेगा समय

यह खोज देश की एक अरब से अधिक आबादी को सुरक्षित रखने की दिशा में एक बड़ा कदम है, क्योंकि इसके जरिए प्रशासन और आम जनता को तैयारी के लिए पर्याप्त समय मिलेगा। अध्ययन के दौरान विज्ञानियों ने 1940 से 2023 तक के लगभग 84 वर्षों के वायुमंडलीय आंकड़ों का विश्लेषण किया।

सूखी लू के मुकाबले अधिक खतरनाक

इसमें पाया गया कि उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में मानसून के प्रभाव से गर्मी का खतरा अचानक 125 प्रतिशत तक बढ़ जाता है। शोधकर्ताओं ने उन विशिष्ट मौसम पैटर्न की भी पहचान की है जो हवा में नमी और तापमान के घातक मिश्रण को जन्म देते हैं। इसे विज्ञानी भाषा में ”वेट-बल्ब” तापमान कहा जाता है।

यह सूखी लू के मुकाबले कहीं अधिक खतरनाक है, क्योंकि जब हवा में नमी बहुत ज्यादा होती है, तो शरीर से पसीना नहीं सूखता। पसीना न सूखने के कारण शरीर का आंतरिक तापमान कम नहीं हो पाता, जिससे कुछ ही घंटों में हीटस्ट्रोक या कार्डियोवैस्कुलर सिस्टम फेल होने जैसी जानलेवा स्थितियां पैदा हो सकती हैं।

क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

इस शोध के मुख्य लेखक डॉ. अक्षय देवरास के अनुसार, अक्सर लोग गर्मियों की सूखी लू से तो सावधान रहते हैं, लेकिन मानसून वाली उमस भरी गर्मी को गंभीरता से नहीं लेते। जब मानसून सक्रिय होता है, तो गंगा के मैदानी इलाकों (विशेषकर उत्तर प्रदेश और बिहार) में नमी का स्तर जानलेवा हो जाता है।

वहीं मानसून में ”ब्रेक” आने पर यह खतरा प्रायद्वीपीय भारत और तटीय क्षेत्रों की ओर बढ़ जाता है। एक महीने पहले मिलने वाली यह चेतावनी अस्पतालों में स्टाफ बढ़ाने, बिजली ग्रिड को तैयार करने और निर्माण कार्य व स्कूलों के समय में बदलाव करने के लिए जीवन रक्षक साबित होगी।