June 12, 2026

फ्रांस और स्लोवाकिया के दौरे पर जाएंगे PM मोदी, कई समझौतों पर लग सकती है मुहर…

Prime Minister Narendra Modi greets as he departs after concluding his state visit

Jerusalem [Israel], Feb 26 (ANI): Prime Minister Narendra Modi greets as he departs after concluding his state visit, in Jerusalem on Thursday. (DPR PMO/ANI Photo)

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री मोदी फ्रांस और स्लोवाकिया दौरे पर जाएंगे और G7 समिट में शामिल होंगे. इस यात्रा का फोकस AI, रक्षा, निवेश और टेक्नोलॉजी सहयोग रहेगा.

प्रधानमंत्री मोदी 15-16 जून को स्लोवाकिया के दौरे पर जाएंगे. किसी भारतीय प्रधानमंत्री का उस देश का यह पहला दौरा होगा. पीएम मोदी की इस यात्रा के दौरान कई समझौतों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए जाएंगे. यह यात्रा रक्षा, पेशेवरों के प्रवास, AI और टेक्नोलॉजी के क्षेत्रों में भारत-स्लोवाकिया की साझेदारी को मजबूत करेगी.

प्रधानमंत्री मोदी की इस यात्रा का मुख्य फोकस टेक्नोलॉजी पर होगा.

‘भारत इनोवेट्स’ (Bharat Innovates) में 120 से ज्यादा भारतीय स्टार्टअप्स अपने इनोवेशन और रिसर्च की उपलब्धियों को प्रदर्शित करेंगे. ‘भारत इनोवेट’ प्रदर्शनी में 300 से अधिक ग्लोबल इन्वेस्टर्स के भी आने की संभावना है.

PM नरेंद्र मोदी की फ्रांस और स्लोवाकिया यात्रा पर विदेश मंत्रालय की ब्रीफिंग में कई अहम जानकारियां दी गईं. MEA के सचिव सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने बताया कि PM मोदी फ्रांस और स्लोवाकिया की यात्रा करेंगे. राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के निमंत्रण पर, PM मोदी 52वें G7 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे. यह PM मोदी की लगातार 7वीं और भारत के किसी PM की लगातार 32वीं भागीदारी होगी.

उन्होंने आगे बताया कि यह पीएम मोदी के लिए ग्लोबल लीडर्स के साथ भारत और दुनिया के लिए अहम मुद्दों पर चर्चा करने का मौका होगा. फ्रांस ने भारत, मिस्र, दक्षिण कोरिया, केन्या और ब्राजील को पार्टनर देशों के तौर पर आमंत्रित किया है.

क्या होगा मुख्य एजेंडा?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के बीच होने वाली हाई-लेवल बातचीत में डिफेंस, सिविल न्यूक्लियर एनर्जी, इनोवेशन और अहम टेक्नोलॉजी के क्षेत्रों में आपसी सहयोग को बढ़ावा देना मुख्य एजेंडा होगा.

प्रधानमंत्री G7 समिट के दौरान कई ग्लोबल लीडर्स के साथ द्विपक्षीय बैठकें करेंगे. पता चला है कि नई दिल्ली और वॉशिंगटन, पीएम मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच बैठक की संभावना पर विचार कर रहे हैं. हालांकि, इस बारे में अभी कोई स्पष्ट जानकारी नहीं है.

प्रधानमंत्री की फ्रांस यात्रा से पहले, राजनयिक सूत्रों ने बताया कि कई फ्रांसीसी कंपनियां सिविल न्यूक्लियर एनर्जी सेक्टर में मौकों की तलाश करने में गहरी दिलचस्पी ले रही हैं. ऐसा भारत द्वारा SHANTI (भारत के बदलाव के लिए न्यूक्लियर एनर्जी का टिकाऊ इस्तेमाल और विकास) कानून लागू किए जाने के बाद इस क्षेत्र में मौजूद बड़ी संभावनाओं को देखते हुए किया जा रहा है.

भारत की योजना 2047 तक अपनी न्यूक्लियर पावर क्षमता को मौजूदा 8.78 GW से बढ़ाकर 100 GW करने की है. सूत्रों ने बताया कि फ्रांस ‘मेक-इन-इंडिया’ के तहत मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट (MRFA) प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने पर विचार कर रहा है और इन जेट्स में भारतीय हथियार प्रणालियों को शामिल करने में कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए.

MRFA प्रोजेक्ट के तहत, फ्रांस की प्रमुख डिफेंस कंपनी डसॉल्ट एविएशन 18 राफेल विमान ‘फ्लाई-अवे’ स्थिति में सप्लाई करेगी और बाकी विमान भारत में करीब 50 प्रतिशत स्वदेशी कलपुर्जों के साथ बनाए जाएंगे.

सूत्रों के मुताबिक, पीएम मोदी की यात्रा के दौरान भारत और फ्रांस के बीच 12 नई द्विपक्षीय पहल शुरू किए जाने की संभावना है. प्रधानमंत्री सबसे पहले 14 जून को राष्ट्रपति मैक्रों के साथ द्विपक्षीय बैठक के लिए फ्रांस के बंदरगाह शहर नीस जाएंगे.

दोनों नेता मिलकर ‘भारत इनोवेट्स’ का उद्घाटन करेंगे. यह तीन दिन का कार्यक्रम ‘भारत-फ्रांस इनोवेशन वर्ष’ के तहत आयोजित किया जा रहा है, जिसमें उच्च शिक्षा संस्थानों और केंद्र सरकार से फंड पाने वाले तकनीकी संस्थानों के भारतीय टेक्नोलॉजी वेंचर्स को दिखाया जाएगा.

नीस के बाद, मोदी 14 से 16 जून तक स्लोवाकिया की राजकीय यात्रा पर जाएंगे. प्रधानमंत्री 16-17 जून को G7 समिट के आउटरीच सेशन में शामिल होने के लिए फ्रांस लौटेंगे.

यात्रा के आखिरी चरण में पीएम मोदी 18 जून को पेरिस जाएंगे. वहां वे द्विपक्षीय बातचीत करेंगे और यूरोप के सबसे बड़े टेक्नोलॉजी और स्टार्टअप इवेंट ‘विवटेक समिट’ में शामिल होंगे.

विदेश मंत्रालय में सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने एक मीडिया ब्रीफिंग में कहा कि G7 समिट में मोदी का फोकस ‘ग्लोबल साउथ’ की प्राथमिकताओं, चिंताओं और विकास से जुड़ी उम्मीदों को सामने लाने पर होगा.

उन्होंने कहा, “बातचीत में मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों और विकास के लिए एकजुटता को फिर से मजबूत करने और साझा व संतुलित विकास को बढ़ावा देने पर ध्यान दिया जाएगा. जी7 समिट में भारत की नियमित भागीदारी भारत की बढ़ती भूमिका को दर्शाती है.”

उम्मीद है कि G7 समिट में शामिल होने वाले नेताओं के साथ पीएम मोदी की द्विपक्षीय बातचीत में पश्चिम एशिया के संघर्ष के आर्थिक असर पर चर्चा होगी.

‘ग्रुप ऑफ 7’ (G7) दुनिया की सात सबसे विकसित अर्थव्यवस्थाओं को एक साथ लाता है. कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, यूनाइटेड किंगडम, संयुक्त राज्य अमेरिका और यूरोपीय संघ इस समूह के सदस्य हैं.

द्विपक्षीय बातचीत के हिस्से के तौर पर, जॉर्ज ने कहा कि पीएम मोदी राष्ट्रपति मैक्रों के साथ व्यापक चर्चा करेंगे, जिसमें हमारी साझेदारी के सभी क्षेत्रों को शामिल किया जाएगा.