June 29, 2026

“पाठशाला के नन्हे श्रावकों में पूजन-अभिषेक से गढ़े जा रहे हैं जैन संस्कार”…

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दुर्ग: रविवार 21 जून 2026 को दुर्ग-भिलाई के समस्त दिगंबर जैन मंदिर में संचालित होने वाली पाठशाला के लगभग 200 बच्चों ने *श्री महावीर दिगंबर जैन मंदिर, स्टेशन रोड,* दुर्ग में मूल नायक 1008 भगवान श्री महावीर स्वामी का अभिषेक, शांति धारा एवं पूजन कर न केवल धर्म-लाभ कमाया, बल्कि यह भी सिद्ध कर दिया कि जिनशासन की पताका आगे भी इन्हीं छोटे हाथों से लहराएगी।

धर्म की रक्षा शस्त्रों से नहीं, संस्कारों से होती है और संस्कारों की पाठशाला वही है जहाँ बच्चा पहली बार भगवान के सामने हाथ जोड़ता है। आज जब तकनीक की चकाचौंध में बच्चे संस्कारों से दूर होते जा रहे हैं, ऐसे समय में दुर्ग-भिलाई की जैन पाठशाला के नन्हे श्रावकों द्वारा की जाने वाली पूजन-अभिषेक की क्रिया जैन धर्म के भविष्य की मजबूत नींव रख रही है।

*संस्कारों का जीवंत प्रशिक्षण*

जैन धर्म कर्म सिद्धांत पर आधारित है। “अहिंसा परमो धर्म” को किताब से पढ़ने से ज्यादा, अभिषेक करते समय कलश संभालते हुए सीखा जाता है। जब बच्चा खुद जल लेकर जिनबिम्ब का अभिषेक करता है, अष्ट द्रव्य चढ़ाता है, शांति धारा में शांति का भाव करता है, तो अपरिग्रह, सत्य, अचौर्य जैसे तत्व उसके जीवन का हिस्सा बन जाते हैं। पाठशाला की ये क्रियाएँ बच्चों को सिखाती हैं कि भगवान को धन नहीं, निर्मल भाव चाहिए। यही भाव आगे चलकर उन्हें क्रोध पर नियंत्रण, संतोष और परोपकार की राह दिखाएगा। माता-पिता घर पर हजार बार समझाएँ, पर मंदिर में खुद की उंगली से लगा एक चंदन का तिलक बच्चे के मन पर अमिट छाप छोड़ जाता है।

*उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला*

जो बच्चा अनुशासन से लाइन में खड़े होकर पूजन की प्रतीक्षा करना सीख जाता है, जो टीम बनाकर आरती-थाल संभालना सीख जाता है, वो जीवन में हर क्षेत्र में सफल होता है। पूजन-अभिषेक बच्चों में एकाग्रता, धैर्य, स्वच्छता और समय की पाबंदी जैसे गुण विकसित करता है। आज का बच्चा जो “णमो अरिहंताणं” के साथ दिन शुरू करना सीखेगा, कल डॉक्टर, इंजीनियर, व्यापारी या शिक्षक बनकर समाज को नई दिशा देगा। मार्कशीट के अंक मिट सकते हैं, पर मंदिर में सीखा हुआ विनय और सेवा भाव जीवनभर साथ रहता है। स्टेशन रोड दिगंबर जैन समाज के सहयोग से संपन्न हुआ ये कार्यक्रम इसी दिशा में बढ़ाया हुआ एक कदम है।

उपरोक्त कार्यक्रम संत शिरोमणि आचार्य भगवन श्री विद्यासागर जी महाराज की परम प्रभावी शिष्या आर्यिकामां 105 शैलमती माताजी एवं आर्यिका मां अदूरमाती माताजी के सानिध्य में संपन्न हुआ जिसका संचालन अनेकांत भैया द्वारा किया गया। कार्यक्रम में श्री जी को विराजमान करने का सौभाग्य श्री अंकित जी बाकलीवाल ने प्राप्त किया जबकि शांति धारा करने का सौभाग्य श्री अजय कुमार जी अनुपम जैन ने प्राप्त किया

संपूर्ण कार्यक्रम की सफलता का श्रेय

समाज के सभी वरिष्ठ गण श्री नेमीचंद जी, श्री हेमंत कुमार जी, श्री कमल कुमार जी, श्री विमलेश जी , श्री राजू जैन,श्री प्रमोद कुमार जी, श्री संतोष कुमार जी,श्री पुष्पेंद्र जी, श्री पदमचंद जी बज, एवं समाज के सभी वर्गों की प्रेरणा एवं उपस्थिति तथा श्री महावीर दिगंबर जैन मंदिर स्टेशन रोड समिति की टीम के सभी सदस्यो श्री अनिल जैन, धर्मेंद्र जैन, चौधरी मनीष जैन, सतीश जैन, भरत जैन, आशीष जैन, वैभव पटोरिया, सौरभ जैन, हिमालय जैन, श्रीमती अंजू जैन एवं श्रीमती प्रज्ञा जैन को जाता है।