कैबिनेट में आज बड़े फैसले! वाराणसी को 25,000 करोड़ की सौगात, यूरिया सेक्टर में भी होंगे बड़े सुधार…
- केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में वाराणसी के लिए 25,000 करोड़ रुपये के मेगा रोड प्रोजेक्ट को मंजूरी मिल सकती है. इसमें 89 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड रोड नेटवर्क और गंगा-वरुणा कॉरिडोर शामिल हैं. इसके अलावा, यूरिया सेक्टर में नई निवेश नीति और सब्सिडी जारी रखने की भी उम्मीद है, जिससे घरेलू उत्पादन बढ़ेगा और किसानों को फायदा होगा.
- कैबिनेट की मीटिंग में अहम फैसले हो सकते हैं.
नई दिल्ली,15 जुलाई 2026: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी के इन्फ्रास्ट्रक्चर को आज एक बहुत बड़ा बूस्ट मिल सकता है. आज केंद्रीय कैबिनेट की अहम मीटिंग होने जा रही है. इस दौरान वाराणसी के लिए लगभग 25,000 करोड़ रुपये के मेगा रोड प्लान को मंजूरी दे सकती है.
इस बड़े इन्फ्रास्ट्रक्चर पुश के तहत वाराणसी को दो नए मेगा एलिवेटेड कॉरिडोर की सौगात मिलने की संभावना है, जो शहर की कनेक्टिविटी को पूरी तरह बदल देंगे. इस बड़े प्रोजेक्ट का मकसद वाराणसी को ट्रैफिक जाम से मुक्ति दिलाना और वहां आने वाले पर्यटकों की आवाजाही को आसान बनाना है.
25,000 करोड़ के प्रोजेक्ट के तहत वाराणसी में 89 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड रोड नेटवर्क बनाने का प्रस्ताव है, इस नेटवर्क के तैयार होने से शहर में ट्रैफिक बेहद कम हो जाएगा और लोगों को घंटों लंबे जाम से राहत मिलेगी.
सूत्रों ने बताया कि केंद्र सरकार इस मेगा प्लान के तहत वाराणसी के लिए गंगा और वरुणा कॉरिडोर परियोजनाओं को भी मंजूरी देने के लिए पूरी तरह तैयार है. इन दोनों नए कॉरिडोर के बनने से वाराणसी की ट्रैफिक व्यवस्था में बड़ा बदलाव आएगा.
सिर्फ 20 मिनट में पूरा होगा 1 घंटे का सफर
इस प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी खासियत इसका ‘गंगा कॉरिडोर’ है. दावा किया जा रहा है कि गंगा कॉरिडोर के शुरू होने के बाद यात्रियों का सफर बेहद आसान और तेज हो जाएगा. इस कॉरिडोर की मदद से जिस दूरी को तय करने में अभी लगभग 60 मिनट का समय लगता है, वो सफर घटकर सिर्फ 20 मिनट का रह जाएगा. इससे स्थानीय लोगों के साथ-साथ देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं का काफी समय बचेगा.
यूरिया सेक्टर में बड़ा बदलाव
कैबिनेट यूरिया सेक्टर के लिए बड़े सुधारों को भी मंजूरी दे सकती है. सरकारी सूत्रों के मुताबिक, कैबिनेट इस सेक्टर के लिए एक नई निवेश नीति को हरी झंडी दे सकती है. इस नई नीति का मकसद देश में यूरिया के घरेलू उत्पादन को बढ़ाना है. इसके साथ ही, कैबिनेट से वित्त वर्ष 2026-27 के लिए यूरिया सब्सिडी को जारी रखने की मंजूरी मिलने की भी पूरी उम्मीद है.
फिलहाल भारत को अपनी सालाना यूरिया जरूरत का लगभग 26 फीसदी हिस्सा विदेशों से इम्पोर्ट करना पड़ता है. नई निवेश नीति के जरिए सरकार देश को यूरिया उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाना चाहती है. सरकार का मानना है कि घरेलू उत्पादन बढ़ने और नई नीतियों के लागू होने से अगले 6 से 8 सालों में सालाना यूरिया सब्सिडी में करीब 9,000 करोड़ रुपये की बड़ी बचत होगी. इन सुधारों से न सिर्फ किसानों को समय पर खाद मिलेगी, बल्कि सरकारी खजाने पर भी बोझ कम होगा.