वरिष्ठ नागरिकों द्वारा आयोजित ‘याद-ए-रफ़ी’ संगीत संध्या में रफी के हिंदी एवं छत्तीसगढ़ी में गाए मधुर गीतों पर श्रोता झूम उठे …
- मोहम्मद रफ़ी भारतीय संगीत जगत के नक्षत्र थे, उनकी आवाज़ आज भी संगीत प्रेमियों के दिलों में जीवित है : घनश्याम देवांगन
भिलाई। सियान सदन वैशाली नगर में वरिष्ठ नागरिकों ने महान पार्श्व गायक मोहम्मद रफ़ी की पुण्यतिथि के अवसर पर ‘याद-ए-रफ़ी’ संगीत संध्या का गरिमामय एवं शानदार आयोजन किया। रफी के द्वारा हिन्दी के साथ साथ छत्तीसगढ़ी में गाए मधुर गीतों पर श्रोता झूम उठे, वहीं रफी पर केन्द्रित क्विज प्रतियोगिता ने दर्शकों को रोमांच से भर दिया। लोकप्रिय छत्तीसगढ़ी गीत गोंदा फुलगे मोर राजा, तोर पैरी के झनर झनर, सुन-सुन मोर पीरा के संगवारी रे जैसे गीतों ने पुराने दिनों की याद ताजा कर दी।

आरंभ में महासंघ के अध्यक्ष घनश्याम कुमार देवांगन ने मोहम्मद रफ़ी के जीवन, उनकी उपलब्धियों तथा भारतीय एवं छत्तीसगढ़ी फिल्म संगीत के क्षेत्र में उनके अतुलनीय योगदान पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मोहम्मद रफ़ी भारतीय संगीत जगत के नक्षत्र थे, उनकी आवाज़ आज भी संगीत प्रेमियों के दिलों में जीवित है। रफ़ी साहब की आवाज़ में भावनाओं की अद्भुत गहराई और विविधता थी। उन्होंने अपनी मधुर आवाज़ से देश ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के संगीत प्रेमियों के दिलों पर अमिट छाप छोड़ी है। उनके द्वारा छत्तीसगढ़ी में गाए गीत विशेष रूप से स्मरणीय है। उनकी गायकी की विरासत आने वाली पीढ़ियों को भी सदैव प्रेरित करती रहेगी।
इस अवसर पर मोहम्मद रफ़ी के जीवन एवं संगीत यात्रा पर केन्द्रित रोचक क्विज़ प्रतियोगिता आयोजित की गई, जिसमें वरिष्ठ नागरिकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और पुरस्कार जीते। क्विज़ के दौरान रफ़ी साहब के जीवन, गीतों, फिल्मों एवं संगीत यात्रा से जुड़े प्रश्नों ने कार्यक्रम को ज्ञानवर्धक एवं मनोरंजक बना दिया।
इसके पश्चात स्थानीय कलाकारों एवं वरिष्ठ नागरिकों ने मोहम्मद रफ़ी द्वारा गाए लोकप्रिय गीतों की मनमोहक प्रस्तुतियां देकर समां बांध दिया। रफ़ी के सदाबहार गीतों की मधुर धुनों के साथ वरिष्ठ नागरिकों ने पुरानी यादों को ताजा किया और संगीत का भरपूर आनंद लिया। रफ़ी साहब के अमर गीतों को गाकर वातावरण को संगीतमय बनाने वाले गायकों में जोसफ, संतोष शुक्ला, घनश्याम कुमार देवांगन, डी.ए. करमाकर, सुरेश जोशी, दिनेश गुप्ता का नाम उल्लेखनीय है। गायकों ने रफी के हिंदी में गाए गीत बहारों फूल बरसाओ, लिखे जो खत तुझे, तुम मुझे यूं भुला ना पाओगे, क्या हुआ तेरा वादा, चौदहवीं का चांद हो, याहू.. चाहे कोई मुझे जंगली कहे, गुलाबी आंखें जो देखी तेरी, छुप गए सारे नजारे ओय क्या बात हो गई, ये दुनिया ये महफ़िल मेरे काम की नहीं आदि सदाबहार गीतों की प्रस्तुति दी।
कार्यक्रम का शुभारंभ सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ, आरती एवं प्रसाद वितरण से हुआ। इसके पश्चात जुलाई माह में जन्मदिन वाले 10 वरिष्ठ नागरिकों कन्हैयालाल खाबानी, रामभाऊ श्रीखंडे, कुमार साहू, राम बोरकर, रमेशचंद्र बटघरे, रामायण मिश्रा, सुरेश जोशी, जीडी सिंह, पवन कुमार जैन एवं सुनील कटाले का सम्मान कर सामूहिक रूप से जन्मोत्सव मनाया गया। इस अवसर पर सभी वरिष्ठजनों ने एक-दूसरे को शुभकामनाएं एवं मंगलकामनाएं देकर खुशियां बांटी।
इस अवसर पर वरिष्ठ नागरिक गण आर.एस. प्रसाद, दिनेश गुप्ता, दिनेश मिश्रा, सुरेशचंद्र जैन, राजेन्द्र वार्ष्णेय, रामायण मिश्रा, रमेशचन्द्र बटघरे, राजपालसिंह राघव, जी. एल. अग्रवाल, ए. जग्यासी, आर. एस. पालीवाल, राम बोरकर, सुनील कटारे, रामभाऊ श्रीखंडे, शंकर शेंडे, रामाधार वर्मा, एम. एल. गोपाल, सुरेन्द्र राय, जी.डी. सिंह, देवेन्द्र चौहान, सतीश गुप्ता, संतोष शुक्ला, महेश रतनानी, कुमार साहू आदि उपस्थित थे।
संचालन जोसफ एवं आभार प्रदर्शन दिनेश गुप्ता ने किया। सभी वरिष्ठ नागरिकों के लिए सामूहिक भोजन का आयोजन किया गया था। इस कार्यक्रम ने वरिष्ठ नागरिकों के बीच आपसी स्नेह, आत्मीयता और सांस्कृतिक जुड़ाव को और अधिक मजबूत किया। इस अवसर पर पार्श्व गायक पद्मश्री मोहम्मद रफ़ी एवं प्रसिद्ध पंडवानी गायिका पद्मविभूषण तीजन बाई के योगदान का स्मरण कर श्रद्धांजलि दी गई।
——