असम की भीषण बाढ़ राष्ट्रीय चिंता का विषय, मुआवजा राशि बढ़ाने एवं राहत सामग्री भेजने की अपील – सुमन शील
असम में इस वर्ष आई विनाशकारी बाढ़ और लगातार हो रही भारी बारिश ने जनजीवन को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। राज्य के 7 जिलों में अब भी लगभग 3.32 लाख से अधिक लोग बाढ़ की चपेट में हैं, जबकि इस भीषण आपदा में लगभग 78 से अधिक लोगों की दुखद मृत्यु हो चुकी है।
छत्तीसगढ़ बंगाली मित्र समाज के प्रदेशाध्यक्ष एवं सामाजिक कार्यकर्ता सुमन शील ने असम की इस त्रासदी पर गहरा दुःख व्यक्त करते हुए कहा कि यह केवल असम ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए चिंता का विषय है। उन्होंने दिवंगत लोगों के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए शोकाकुल परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की।
उन्होंने बताया कि शिवसागर, जोरहाट, चराइदेव, गोलाघाट, नगांव और कामरूप सहित कई जिले बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित हैं। लाखों लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हैं। हजारों हेक्टेयर कृषि भूमि जलमग्न हो गई है, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है। पशुधन को भी व्यापक क्षति पहुँची है।
सुमन शील ने राहत एवं बचाव कार्यों में लगे असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, प्रशासन, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ तथा सभी स्वयंसेवी संगठनों के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा मृतकों के परिजनों के लिए 9 लाख रुपये की सहायता राशि निर्धारित करना सराहनीय है, किन्तु इस भीषण आपदा की गंभीरता को देखते हुए केंद्र एवं राज्य सरकार को पीड़ित परिवारों के लिए मुआवजा राशि और अधिक बढ़ाने, बाढ़ प्रभावित किसानों, पशुपालकों तथा बेघर हुए परिवारों के लिए विशेष आर्थिक सहायता पैकेज की घोषणा करने पर भी विचार करना चाहिए।
उन्होंने छत्तीसगढ़ सहित पूरे देश के नागरिकों से मानवीय संवेदना का परिचय देते हुए आगे आने की अपील की। विशेष रूप से छत्तीसगढ़ में निवास करने वाले सभी सामाजिक संगठनों, व्यापारिक संस्थाओं, स्वयंसेवी संगठनों एवं आम नागरिकों से अनुरोध किया कि वे अपनी क्षमता के अनुसार खाद्यान्न, सूखा राशन, वस्त्र, दवाइयाँ, पेयजल, बच्चों के लिए आवश्यक सामग्री तथा अन्य राहत सामग्री एकत्र कर असम के बाढ़ पीड़ितों तक पहुँचाने में सहयोग करें।
सुमन शील ने विश्वास व्यक्त किया कि संकट की इस घड़ी में देशवासियों का सहयोग एवं एकजुटता असम के प्रभावित परिवारों को शीघ्र सामान्य जीवन की ओर लौटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।